Monday, December 10, 2018
ये देखिए सोशल मीडिया का सकारात्मक पहलु  : निमाड़ संस्कृति मंच व्हाट्स एप ग्रुप संजा संस्कृति-गीतों को सहेज रही हैं महिलाएं 

ये देखिए सोशल मीडिया का सकारात्मक पहलु  : निमाड़ संस्कृति मंच व्हाट्स एप ग्रुप संजा संस्कृति-गीतों को सहेज रही हैं महिलाएं 

मीडियावाला.इन।

प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले इस सुरीले पर्व की गरिमा आज भी अपनी चमक को यथावत रखे हुए है तो इसकी वजह संस्कृति को समर्पण भाव से सहेजन की महिलाओं की ऐसी ललक ही है।सोशल नेटवर्किंग के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर फेसबुक, व्हाट्स एप आदि को कोसने वालों के लिए निमाड़ संस्कृति मंच ग्रुप एक मिसाल भी है जहां राजनीतिक टीका-टिप्पणी से हटकर सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य किया जा रहा है।निमाड़-मालवा संस्कृति में पली-बढ़ी लड़कियों को विवाहोपरांत भी लोक संस्कृति पर्व संजा की इंद्रधनुषी स्मृतियां हमेशा ताजगी और मिठास का अहसास कराती  रहेगी।

लोक संस्कृति आधारित संजा पर्व यूं तो पारंपरिक पर्व कहा जा सकता है लेकिन इसमें अब जागरुकता का तड़का भी लगने लगा है और इसकी शुरुआत महेश्वर से हुई है। इंदौर के शहरी क्षेत्र में तो संजा पर्व की पहले जैसी धूम अब नहीं रही लेकिन श्राद्ध पक्ष में मनाए जाने वाले इस पर्व का निमाड़-मालवा अंचल में अभी भी उत्साह यथावत है। 


चर्चा में लोक संस्कृति के कार्य से जुड़ी महेश्वर निवासी ज्योति विकास डोंगरे ने बताया कि निमाड़ क्षेत्र में इस बार सबसे बड़ी संजा महेश्वर में हम सब सखियों ने मिल कर बनाई । उनका कहना था इस बार 6 फीट लंबी और 12 फीट चौड़ी संजा (किला कोट) तैयार किया गया इसे महेश्वर स्थित नार्मदीय समाज की धर्मशाला में समाज की महिलाओं विनीता चौरे, प्रीति गीते, मनीषा शास्त्री, प्रीति अत्रे, दीपा शास्त्री, पूजा शास्त्री,नीता पुराणिक, दीपाली गांवशिंदे, दिव्या केशवरे, अंकिता चौरे आदि ने मिलकर  बनाया है।


निसंमं की एडमिन विभा भटोरे की पहल (विभा भटोरे फोटो)


महेश्वर सहित निमाड़ की महिलाओं को खरगोन की (अब इंदौर में रह रहीं) विभा भटोरे ने व्हाट्सएप पर ‘निमाड़ संस्कृति मंच’ (निसंमं) ग्रुप में जोड़ रखा है जिस पर महिलाएं संजा, उसके गीत, अन्य पर्वों की जानकारी आदि आपस में सेंड करती रहती हैं।विभा भटोरे बताती हैं ‘निसंमं’ ग्रुप से जुड़ीं ज्योति डोंगरे व अन्य सखियों ने मिलकर महेश्वर में सबसे बड़ी संजा बनाई तो अनामिका अत्रे ने खंडवा में वोटर जागरूकता व स्वच्छता पर संझा बनाई।इस ग्रुप के माध्यम सेहमारी लोक संस्कृति को सहेज रहे हैं। संध्या सोहनी खरगोन, मंजुला शर्मा और श्वेता रत्नदीप शर्मा सेंधवा, संध्या शर्मा मंडलेश्वर, गायत्री शर्मा बडवानी ये सब ‘निसंमं’ की सम्मानीय सदस्य हैं और लोक परम्परा को जीवित रखने की दिशा में आवश्यक जानकारी सेंड करती रहती हैं।

 


कन्याओं को कुछ सीख भी देता है संझा फूली पर्व 


अभी संझा फूली का त्यौहार कन्याओं को कुछ सीख भी देता है। देखा जाए तो अब यह पर्व अब केवल गांवों में ही सिमट कर रह गया है। पहले छोटी बच्चियाँ घर घर संझा बनाती थी और अपनी सहेलियों के घर गीत गाने जाती थी।ये त्यौहार माता पार्वती को प्रसन्न कर आशीर्वाद लेने के साथ कन्याओं को कुछ सीख भी देता है ।सुबह जल्दी उठकर गाय का गोबर इकठ्ठा करना गाय का महत्व बताता है। प्रकृति के पास जाकर फूल एकत्रित करना पर्यावरण को बचाना और इससे यह भी सीख मिलती थी कि किसी भी कार्य के लिए उसकी पहले से व्यवस्था करना, सामग्री इकठ्ठी करना जरूरी है। दीवार पर गोबर से कलाकृतियां बनाना जो बच्चियों में कला के प्रति रुझान बढ़ाता है । संजा पर्व यानी गांव-गवाड़ी की लड़िकयों का समूह में एकत्र होना जिससे एकता और आपस में प्रेमभाव बढ़ता है। समूह में रहकर गाना-बजाना से मेलजोल बढ़ता है, वे आपस में अपनी खुशी-परेशानी बांट सकती हैं।उनकी झिझक समाप्त होती है, एकदूसरे के साथ से हिम्मत बढ़ती है।पहले इसी बहाने लड़कियाँ घर से बाहर आती-जाती थीं।                           

मंजुला शर्मा, सेंधवा

अनामिका अत्रे (खंडवा) ने 
मतदाता  जागरूकता पर संजा बनाई 

ग्रुप एडमिन विभा भटोरे 

महेश्वर में सबसे बड़ी संजा बनाई ज्योति डोंगरे व समूह की अन्य हिलाओं ने। 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


संपर्क : 8989789896