Monday, March 25, 2019
हम सैन्डविच पीढ़ी के लोग हैं

हम सैन्डविच पीढ़ी के लोग हैं

मीडियावाला.इन।

सखियों आज एक खेल पिट् ठू / सतोलिया । अचानक से याद आया । जो लड़कियों का खेल है पर बचपन में हमारे दोस्त लड़के भी खेलते थे । तब हमारे बीच कोई जेन्डर फीलिंग नहीं होती थी । हम इतने पक्के दोस्त होते थे कि गिल्ली डन्डा और गुड़ियों का खेल हमें अपने ही खेल लगते । हम लड़ते झगड़ते बड़े हो गए और फिर जिन्दगी के चक्र में इस जेन्डर फीलिंग को लेकर कितनी बातें होती रहीं होती हैं । कितने विमर्श कितनी कविताएँ कहानियाँ 
और इस सबके बीच हमारी दोस्त नीता मेहरोत्रा की यह सीख देती कविता - जिसने हम लड़कियों को खेल के माध्यम से हमारी सीमा रेखा बताई है ।
अब यह सब उलट पलट है देखने में पढ़ने में लेकिन वास्तव में अभी मानसिकता वही है । अगली की अगली पीढ़ी में शायद बदलाव आए

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, खड़े रहना

 

माँ ने दी थी सात गिट्टक 
सतोलिया खेलने को ,
" कुल की मर्यादा रही सौंप तेरे हाथों में " ..
गूंजते हैं आज भी ये स्वर 
बोले गए माँ की आँखों से।

बात है ये बचपन की 
जब दिया था आदेश एंकर 
दादा जी ने ...
पहनने का 
सलवार कमीज , और 
सिर पर धरने को 
ओढ़नी का।

संभालनी थी सिर पर " ओढ़नी "
और 
पायचा सलवार का ,
गिरना नहीं 
संभल कर था चलना , क्योंकि ...
माँ ने हाथों में 
सतोलिया की गिट्टक थी जो सौंपी।

गिट्टकों में थी _
मर्यादा कुल की ,
बिन्धी हुई थी 
सब्र और शालीनता 
स्त्री की।

देहरी के भीतर बंधी 
अदृश्य जंजीर को सहेज 
धरनी थी 
सातो गिट्टक 
एक पर एक।

पहली गिट्टक से सातवीं गिट्टक तक धरते 
दबानी थी हर दर्द की चीख ,
संजोनी थी सातो यूँ कि _
टप्पा गेंद का 
पीठ पर न आ गिरे ....

आँखें रही सबसे तेज 
घेरे रहे तंग ,
चक्रव्यूह था रचा 
गिट्टकों से
सीख का ...

पहला मर्यादा का 
दूजा परम्परा , रिवाजों का 
तीजा शालीनता , और 
चौथा नम्रता का 
पाँचवा रहा लबालब भरा सब्र से 
छठे ने कर दी आँख नीची 
सातवें ने सिखाया रखनी आवाज़ नीची।

मौका सभी तलाश रहे 
हाथ हिलने का ...

अब ???

ऐ माँ !!
तेरी सात गिट्टक संजोते 
रीत रही हूँ मैं .....

टप्पा गेंद का 
अपनी पीठ पर 
अब तक 
झेल रही हूँ 
मैं ........ ।
शादी के रिसेप्शन पर जाने की तैयारी है 
साड़ी गर्मी की कोसा जरी और धागे का बहुत बारीक काम और सदाबहार मूंगा माला । चन्द्रमा को थामें गाड़ी का राॅड

चर्चित साहित्यकार पुष्पा तिवारी की फेसबुक वाल से 

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