Sunday, May 19, 2019
महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं चार महासंयोग, सजे मंदिर

महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं चार महासंयोग, सजे मंदिर

मीडियावाला.इन।

उज्जैन से अजेंद्र  त्रिवेदी की खास खबर

 महाशिवरात्रि को लेकर महाकालेश्वर सहित शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार शिवरात्रि पर्व चार  के दिन सोमवार को है तथा इस बार महाशिवरात्रि पर महासंयोग बन रहा है। मंदिरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना व भजनों की विशेष तैयारियां की जा रही हैं। ज्योतिषियों के अनुसार भगवान शिव के विवाह का दिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को माना जाता है। शिवपुराण में इस चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा गया है। मंदिरों में भोग प्रसाद और शिव बारात की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस अवसर पर कई दुर्लभ संयोग बने हैं, ऐसे में इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। इस साल महाशिवरात्रि सोमवार के दिन है, जिसे बड़ा ही दुर्लभ माना जाता है।

सोमवार का संबंध भगवान शिव और उनके सिर पर विराजमान चंद्रमा से है इसलिए इन्हें सोमनाथ भी कहते हैं। महाशिवरात्रि पर सोमवार होना शिवभक्तों के लिए बहुत ही शुभ है। विवाह योग्य युवक-युवती इस अवसर पर शिवजी का अभिषेक दूध और गंगाजल से करें तो इनके विवाह का योग तेज होगा। इसके अलावा महाशिवरात्रि के अवसर पर इस वर्ष नक्षत्रों में श्रेष्ठ श्रवण नक्षत्र का संयोग बना है।

श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसका प्रतीक चिन्ह भगवान विष्णु के वामन अवतार का चरण चिन्ह है। इस नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा बहुत ही शुभ फलदायी मानी गई है। धन और सुख की चाह रखने वाले शिवभक्त इस अवसर पर गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें। शिवपुराण के अनुसार इससे समृद्धि और धन वैभव बढ़ता है।

इस साल महाशिवरात्रि पर सोने पर सुहागा यह भी कि इस दिन शिव योग है। शिव योग में शिव की पूजा बहुत ही उत्तम और शुभफलदायी मानी गई है। इन तीन संयोगों के अलावा चौथा संयोग यह बना है कि इस बार महाशिवरात्रि के अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग बना है, जो सभी प्रकार के शुभ कर्माें को सफल बनाने वाला है। इस अवसर पर शिवतांडवस्त्रोत, शिव सहस्त्रनाम का पाठ कल्याणकारी होगा।

ज्योतिषिचार्य और पंडित मानते है कि शिवरात्रि तो हर महीने में एक बार आती है लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि साल में केवल एक बार आती है इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि का महत्व इसलिए है क्योंकि यह शिव और शक्ति की मिलन की रात है। आध्यात्मिक रूप से इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में बताया जाता है।


प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्याम नारायण व्यास ने चर्चा उपरांत बताया गया सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.50 से 12 .12 तक हैं. इसके अलावा चार पूजन प्रहर समय  हैं-  पहला शाम 6:44  को दूसरा रात्रि 9:45 तीसरा रात्रि 12:52 और चौथा सुबह 3:54 बजे . 

इसके साथ ही महाकाल के पुजारी पंडित महेश पुजारी ने बताया कि शिव विवाह अपने आप में अति उत्तम योग है ,भोले भंडारी का विवाह समय है।

 रात में आध्यात्मिक शक्तियां अधिक जागृत होती हैं इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस रात का उपयोग ध्यान, योग, तप और साधना में करना चाहिए। इस बार शिवरात्रि पर चार  महासंयोग बन रहे हैं। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसका प्रतीक चिन्ह भगवान विष्णु के वामन अवतार का चरण चिन्ह है। इस नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा बहुत ही शुभ फलदायी मानी गई है।

इन तीन संयोगों के अलावा चौथा संयोग यह बना है कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग बना है, जो सभी प्रकार के शुभ कर्माे को सफल बनाने वाला है। इस अवसर पर शिव तांडव स्त्रोत, शिव सहस्त्राव का पाठ कल्याणकारी होगा, ऐसे में मोक्ष की चाहत रखने वालों को महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को अटूट चावल यानी अक्षत अर्पित करना चाहिए, इससे आत्मा को भी बल मिलता है और भय से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा आरोग्य और बाधाओं से मुक्ति के लिए रुद्राभिषेक करवाएं तो इस योग के प्रभाव से आपके कार्य सफल होंगे। इस बार महाशिवरात्रि सोमवार, श्रवण नक्षत्र में शुरू हो रही है, जबकि महाशिवरात्रि का व्रत 05 मार्च को शिव योग में धनिष्ठा नक्षत्र में पड़ रहा है।

साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। ऐसे में शिवभक्त शिव मंदिरों में शिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा विधि अनुसार करेंगे तो उन्हें कई गुणा पुण्य प्राप्त होगा। महाशिवरात्रि पर कुंभ का शाही स्नान का अंतिम दिन होता है। भगवान के शिव के सिर पर चंद्रमा विराजमान है इसलिए भोलेनाथ को सोमनाथ भी कहा जाता है, सच्चे मन से शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर एक लोटा जल और बेल पत्र चढ़ाने से शिव शंकर प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते हैं। 

 

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