Wednesday, February 20, 2019

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक

  • डॉ॰ वेद प्रताप वैदिक (जन्म: 30 दिसम्बर 1944, इंदौर, मध्य प्रदेश) भारतवर्ष के वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक, पटु वक्ता एवं हिन्दी प्रेमी हैं। हिन्दी को भारत और विश्व मंच पर स्थापित करने की दिशा में सदा प्रयत्नशील रहते हैं। भाषा के सवाल पर स्वामी दयानन्द सरस्वती, महात्मा गांधी और डॉ॰ राममनोहर लोहिया की परम्परा को आगे बढ़ाने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है।
  • वैदिक जी अनेक भारतीय व विदेशी शोध-संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में ‘विजिटिंग प्रोफेसर’ रहे हैं। भारतीय विदेश नीति के चिन्तन और संचालन में उनकी भूमिका उल्लेखनीय है। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने लगभग 80 देशों की यात्रायें की हैं।
  • अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले हिन्दी में बेहतर पत्रकारिता का युग आरम्भ करने वालों में डॉ॰ वैदिक का नाम अग्रणी है। उन्होंने सन् 1958 से ही पत्रकारिता प्रारम्भ कर दी थी। नवभारत टाइम्स में पहले सह सम्पादक, बाद में विचार विभाग के सम्पादक भी रहे। उन्होंने हिन्दी समाचार एजेन्सी भाषा के संस्थापक सम्पादक के रूप में एक दशक तक प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में काम किया। सम्प्रति भारतीय भाषा सम्मेलन के अध्यक्ष तथा नेटजाल डाट काम के सम्पादकीय निदेशक हैं।

कश्मीर: यह काफी नहीं

मीडियावाला.इन।   पुलवामा के आतंकी हमले के 100 घंटे के अंदर ही हमारी फौज ने जैश-ए-मुहम्मद के कमांडर कामरान और गाजी रशीद समेत एक और आतंकी को मार गिराया। बहादुरी के इस कारनामे ने भारत के घावों पर...

आतंकवाद: बात और लात,दोनों चले

मीडियावाला.इन कश्मीर में हमारे लगभग 50 जवानों की हत्या ने देश को ऐसा दहला दिया है कि अनेक परस्पर विरोधी नेता भी आज एक स्वर में बोल रहे हैं। यह वक्त इतना नाजुक है कि भारत सरकार जो भी कदम...

दिखाएं अब 56 इंच का सीना

मीडियावाला.इन। कश्मीर में हुए 44 जवानों के बलिदान ने देश का दिल दहला दिया है। लोग चाहते हैं कि इस खून का बदला खून से लिया जाए। इतना ही नहीं, आतंकवाद को जड़ से उखाड़ दिया जाए लेकिन इस...

लोकतंत्र को न बनाएं मजाक तंत्र

  मीडियावाला.इन देश की राजनीति किधर जा रही है ? कोई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री को चोर और दलाल कहता है तो सत्तारुढ़ नेता अपने विपक्षी नेताओं को भ्रष्ट, भौंदू, मंदमति आदि क्या-क्या नहीं कह रहे हैं। देश के बड़े-बड़े...

खाला का घर नाय

मीडियावाला. इन सर्वोच्च न्यायालय ने दो नेताओं को कल करारे झटके दिए हैं। एक उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को और दूसरा बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को। तेजस्वी से अदालत ने पटना का वह बंगला खाली करवा लिया...

सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश

मीडियावाला.इन। प्र्् केरल के सबरीमाला मंदिर के देवस्वम बोर्ड ने अचानक शीर्षासन कर दिया है। जब देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2018 में हर उम्र की औरत को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी, तब इस संचालन-मंडल...

सीबीआई: फिजूल का विवाद

  केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के पद पर ऋषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने जो विवाद खड़ा किया है, वह अनावश्यक लगता है। यह ठीक है कि शुक्ला पहले कभी इस ब्यूरो के अफसर...

बेरोजगारी: कोरी जुमलेबाजी

वित्तमंत्री पीयूष गोयल का बजट-भाषण इतना प्रभावशाली था कि विपक्ष तो हतप्रभ-सा लग ही रहा था। वह अकेला भाषण नरेंद्र मोदी के पिछले पांच वर्षों के सारे भाषणों के मुकाबले भी भारी पड़ रहा था और मुझे याद नहीं पड़ता...

जार्ज फर्नांडीसः कुछ संस्मरण

जार्ज फर्नांडीसः कुछ संस्मरण

जाॅर्ज फर्नांडीस जब 1967 में पहली बार लोकसभा में चुनकर आए तो सारे देश में उनके नाम की धूम मची हुई थी। वे बंबई के सबसे लोकप्रिय मजदूर नेता थे। उन्होंने कांग्रेस के महारथी एस के पाटील को...

वेनेजुएला: नया शीत युद्ध ?

मीडियावाला.इन।   लातीन अमेरिका के देश वेनेजुएला में वैसी ही स्थिति बनती दिखाई पड़ रही है, जैसी कि 1962 में क्यूबा में बन रही थी। जो तनाव वहां अभी चल रहा है, यदि एक हफ्ते में वह नहीं सुलझा...

ये कैसे भारत रत्न है

मीडियावाला.इन। ‘भारत-रत्न’ सम्मान को देश का सबसे ऊंचा सम्मान कहा जाता है लेकिन इस बार जिन तीन लोगों को यह सम्मान दिया गया है, उन्हें देकर ऐसा लगता है कि मोदी सरकार अपना अपमान करवा रही है। कई अखबारों और...

राम मंदिर सबक ले सबरीमाला से

राम मंदिर सबक ले सबरीमाला से

कितनी विडंबना है कि सबरीमाला मंदिर में केरल की जिन दो महिलाओं ने अंदर जाकर पूजा करने की हिम्मत दिखाई, उनके साथ निकृष्ट कोटि का बर्ताव किया जा रहा है। ये दो महिलाएं हैं, कनकदुर्गा और बिन्दु !...

विपक्ष क्या करें

मीडियावाला.इन।   डॉ. वेदप्रताप वैदिक कोलकाता में हुई विशाल जन-सभा के बारे में मैंने कल लिखा था। आज मैं महागठबंधन के बारे में लिखूंगा। देश की चार-पांच छोटी-बड़ी पार्टियों के अलावा वहां सभी का जमावड़ा था लेकिन क्या यह...

धूर्त्त संत और निर्भीक पत्रकार

धूर्त्त संत और निर्भीक पत्रकार

मीडियावाला.इन।हरयाणा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के हत्यारे तथाकथित संत या संतों के कलंक गुरमीत राम रहीम और उसके तीन चेलों को उम्रकैद की सजा हुई है। इस फैसले का सारे देश में स्वागत होगा। 16 साल बाद यह फैसला आया,...

शिक्षा में करें क्रांति

शिक्षा में करें क्रांति डॉ. वेदप्रताप वैदिक आर्थिक आधार पर शिक्षा-संस्थाओं में आरक्षण स्वागत योग्य है। वह दस प्रतिशत क्यों, कम से कम 60 प्रतिशत होना चाहिए और उसका आधार जाति या कबीला नहीं होना चाहिए। जो भी गरीब...

भाजपा के लिए खतरे की घंटी

भाजपा के लिए खतरे की घंटी

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन सिर्फ प्रादेशिक राजनीति तक सीमित नहीं है। यह गठबंधन इतना शक्तिशाली है कि यह राष्ट्रीय राजनीति में भी गजब का उलट-फेर कर सकता है। कोई आश्चर्य नहीं कि...

अपने-अपने भ्रष्टाचारी

अपने-अपने भ्रष्टाचारी

सीबीआई, सवर्णों का आर्थिक आरक्षण और अध्योध्या विवाद- इन तीनों मसलों पर गौर करें तो हम किस नतीजे पर पहुंचेंगे ? सरकार, संसद, सर्वोच्च न्यायपालिका और विपक्ष -- सबकी इज्जत पैंदे में बैठी जा रही है। सीबीआई के...

आर्थिक आरक्षण: सरासर फर्जीवाड़ा?

आर्थिक आरक्षण: सरासर फर्जीवाड़ा?

सवर्णों के लिए आर्थिक आरक्षण के विधेयक को संसद के दोनों सदनों ने प्रचंड बहुमत से पारित कर दिया है। आरक्षण का आधार यदि आर्थिक है तो उसे मेरा पूरा समर्थन है। वह भी सरकारी नौकरियों में नहीं,...

आरक्षण: अंधे से काणा भला

आरक्षण: अंधे से काणा भला

केंद्र सरकार की इस घोषणा का कोई भी विरोध नहीं कर सकता कि देश के सवर्णों में जो भी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं, उन्हें भी अब शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इस...

क्या भाजपा लौट पाएगी?

क्या भाजपा लौट पाएगी?

भाजपा के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री संघप्रिय गौतम के बयान ने तहलका-सा मचा दिया है। वे अटलजी और आडवाणीजी  के साथी रहे हैं और उनकी उम्र 88 साल की हैं। वे नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शक मंडल के...