Wednesday, July 24, 2019

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अजय बोकिल

जन्म तिथि : 17/07/1958, इंदौर

शिक्षा : एमएस्सी (वनस्पतिशास्त्र), एम.ए. (हिंदी साहित्य)

पता : ई 18/ 45 बंगले,  नार्थ टी टी नगर भोपाल

मो. 9893699939

अनुभव :

पत्रकारिता का 33 वर्ष का अनुभव। शुरूआत प्रभात किरण’ इंदौर में सह संपादक से। इसके बाद नईदुनिया/नवदुनिया में सह संपादक से एसोसिएट संपादक तक। फिर संपादक प्रदेश टुडे पत्रिका। सम्प्रति : वरिष्ठ संपादक ‘सुबह सवेरे।‘

लेखन : 

लोकप्रिय स्तम्भ लेखन, यथा हस्तक्षेप ( सा. राज्य  की नईदुनिया) बतोलेबाज व टेस्ट काॅर्नर ( नवदुनिया) राइट क्लिक सुबह सवेरे।

शोध कार्य : 

पं. माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के  रूप में कार्य। शोध ग्रंथ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित।

प्रकाशन : 

कहानी संग्रह ‘पास पडोस’ प्रकाशित। कई रिपोर्ताज व आलेख प्रकाशित। मातृ भाषा मराठी में भी लेखन। दूरदर्शन आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन।  

पुरस्कार : 

स्व: जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार, मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार, मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान।

विदेश यात्रा : 

समकाालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलंबो (श्रीलंका)  में सहभागिता। नेपाल व भूटान का भ्रमण।

चांद पर पहली बार पड़े कदम अब चांद को क्या बनाना चाहते हैं

मीडियावाला.इन।उस महान क्षण की ऐतिहासिक अनुभूति को आज आधी सदी पूरी हो चुकी है, जब 20 जुलाई 1969 को मनुष्य ने चमकते चांद पर अपना कदम रखा था। सारी दुनिया रात भर जागकर उस लमहे की साक्षी बनी थी, जब...

सीता के बेदाग चरित्र पर तो सियासत का दागी दांव न खेलें ...!

सीता के बेदाग चरित्र पर तो सियासत का दागी दांव न खेलें ...!

मीडियावाला.इन।   कहावत है ‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्टमलट्ठा।‘ श्रीलंका स्थित दिवुरमपोला में सीता माता का मंदिर बनवाने को लेकर मध्यप्रदेश में दो राजनीतिक जुलाहों सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच कुछ इसी तरह का लट्ठमलट्ठा छिड़ा...

साक्षी और ऋचा: मुद्दों को ‘राष्ट्रीय तमाशे’ में बदलने का खेल...!

साक्षी और ऋचा: मुद्दों को ‘राष्ट्रीय तमाशे’ में बदलने का खेल...!

मीडियावाला.इन।                             कुछ साल पहले तक ( शायद अभी भी हो) निबंध लेखन का एक स्थायी विषय होता था ‘विज्ञान वरदान है या अभिशाप।‘ यही अब थोड़ा बदलकर इस रूप में हो सकता है-‘सोशल मीडिया ( कुछ हद...

तो क्या इसे हम ‘राजनीतिक वेश्यावृत्ति’ का स्वीकार मानें?

तो क्या इसे हम ‘राजनीतिक वेश्यावृत्ति’ का स्वीकार मानें?

मीडियावाला.इन। गोवा में सत्ता की मजबूती के लिए बीजेपी ने जो राजनीतिक खेल खेला, उसे कांग्रेस के (शेष बचे) विधायको में से एक एलेक्सो रेजिनाल्डो ने ‘राजनीतिक वेश्यावृत्ति’ ( पाॅलिटिकल प्राॅस्टिट्यूशन) करार दिया। हैरानी की बात यह है कि...

माॅब लिंचिंग के डरावने पहलू और ‘निराशावाद’ की नई व्याख्या

मीडियावाला.इन।  दो घटनाक्रम काबिले गौर हैं। पहला तो ‘देशद्रोही सीरीज ‘की अगली कड़ी का खुलासा हो गया है। यानी कि आप अर्थव्यवस्था की उड़ान की व्यावहारिकता पर भी कोई सवाल उठा रहे हैं तो आप ‘पेशेवर निराशावादी’ हैं। शक्की...

ममता का ‘कट मनी’ दांव कितना सियासी कट मारेगा

मीडियावाला.इन। लोकसभा चुनावों के बाद की राजनीतिक झड़पों के बाद अब ममता बैनर्जी का बंगाल ‘ कट मनी गेम प्लान’ से जूझ रहा है। कुछ राजनीतिक प्रेक्षक तो इसे ‘तृणमूल कांग्रेस का गृह युद्ध’ मान रहे हैं। कारण...

क्या इन इस्तीफों के बाद कांग्रेस का खुद पर भरोसा लौटेगा? 

क्या इन इस्तीफों के बाद कांग्रेस का खुद पर भरोसा लौटेगा? 

मीडियावाला.इन।क्या इन इस्तीफों के बाद कांग्रेस का खुद पर भरोसा लौटेगा?  देश की सबसे पुरानी और आजादी के बाद सबसे ज्यादा सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी में अजब नजारा है। हाल के लोकसभा चुनाव में करारी हार के...

जनप्रतिनिधि को वोटों के बदले जनता के काम का सौदा करना जायज है ?

जनप्रतिनिधि को वोटों के बदले जनता के काम का सौदा करना जायज है ?

मीडियावाला.इन। क्या जनप्रतिनिधि वोट के बदले जनता के काम का सौदा कर सकता है? क्या ऐसा करना जायज है? लोकतं‍त्र में सरेआम यह कहना कितना नैतिक है कि अगर आप मुझे वोट नहीं देंगे तो मुझसे अपने काम करवाने...

अभिनंदन का शौर्य अभिनंदनीय है या उनकी मूंछे ?

अभिनंदन का शौर्य अभिनंदनीय है या उनकी मूंछे ?

मीडियावाला.इन। विंग कमांडर अभिनंदन वर्द्धमान बालाकोट एयर स्ट्राइक ( इसे सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले वायुवीरों के नाम अभी भी अज्ञात हैं) के बाद एक पाक युद्धक विमान को मार गिराने और इसी चक्कर में उन्हें पाक द्वारा बंदी बनाने तथा...

इन आधुनिक भगीरथों को पानी भरा सलाम !

मीडियावाला.इन।  जब सारी निगाहें घुमड़ते बादलों की तरफ हों, चेन्नई जैसे महानगर भीषण जल संकट से तड़प रहे हों, तमाम राजनीतिक लफ्फाजी के बावजूद ऊपर से बरसने वाला 54 फीसदी पानी बेकार बह रहा हो, तब ऐसे बेकल...

पेट की खातिर गर्भाशय का सौदा करने पर विवश गन्ना मजदूर महिलाएं

मीडियावाला.इन। यह खबर भी बिहार में चमकी बुखार से मासूमों की हर रही मौतों जितनी ही हिला देने वाली है।  क्योंकि यह पापी पेट की खातिर स्त्रीत्व को ही तिलांजलि देने जैसा है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे...

ईश्वर व कलेक्टर के बीच फंसी मिर्ची बाबा की जान और दिग्विजय...! 

ईश्वर व कलेक्टर के बीच फंसी मिर्ची बाबा की जान और दिग्विजय...! 

मीडियावाला.इन। अगर वैराग्यानंद जैसे ढोंगी साधु भगवान से मरने की परमिशन मांगे तो भगवान भी बिना आॅफिशियल क्वेरी के ऐसा करने से हिचकते हैं। क्योंकि जो दावे ईश्वर को लूप में लिए बगैर किए जाते हैं, भगवान उनका हिसाब...

लिची - अमरूद की दहशत और रोगों के प्रति लापरवाह फितरत...

 mediawala.in देश में इन ‘फलवाहक बीमारियों’ और उनसे होने वाली मौतों को देखकर लगता है कि हमे अब ‘फलने-फूलने’ जैसे मुहावरों का भी रिव्यू करना पड़ेगा। क्योंकि अब  रसीले फल भी जानलेवा रोगों के वाहक बनने लगे हैं। हालांकि...

लीची-अमरूद की ‘दहशत’ और रोगों के प्रति लापरवाह फितरत...

लीची-अमरूद की ‘दहशत’ और रोगों के प्रति लापरवाह फितरत...

मीडियावाला.इन। देश में इन ‘फलवाहक बीमारियों’ और उनसे होने वाली मौतों को देखकर लगता है कि हमे अब ‘फलने-फूलने’ जैसे मुहावरों का भी रिव्यू करना पड़ेगा। क्योंकि अब  रसीले फल भी जानलेवा रोगों के वाहक बनने लगे हैं। हालांकि वैज्ञानिक...

डिप्टी सीएम का रेवड, एक नया राजनीतिक मज़ाक

मीडियावाला.इन। इधर मध्यप्रदेश में कमलनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के साथ राजनीतिक गोटियां नए सिरे से जमाने की कवायद की चर्चा है तो उधर आंध्र प्रदेश में पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई वायएसआर कांग्रेस के मुख्यमंत्री...

कमलनाथ का आत्मविश्वास और भार्गव का ‘रंगाई’ रूपक !

कमलनाथ का आत्मविश्वास और भार्गव का ‘रंगाई’ रूपक !

‘जय किसान कर्ज माफी योजना’ के शुभारंभ अवसर पर मंगलवार को प्रदेश में अपनी अन्य दलों के समर्थन से बनी सरकार की स्थिरता को लेकर मुख्यनमंत्री कमलनाथ की बाॅडी लैंग्वेज में एक अलग तरह का आत्मविश्वास और बेफिकरी...

क्या महागठबंधन का ‘केक’ बहनजी को सत्ता शीर्ष पर पहुंचा देगा?

क्या महागठबंधन का ‘केक’ बहनजी को सत्ता शीर्ष पर पहुंचा देगा?

मीडियावाला.इन। क्या ‍किसी नेता का ‘बर्थ डे सेलीब्रेशन’ उसे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा सकता है? यह सवाल इसलिए कि इस देश में ज्यादातर प्रधानमंत्रियों के जन्म दिन उनके इस पद पर विराजमान होने के बाद ही देश ने जानें या...

बेटी आशा की बाप पासवान के खिलाफ इस बगावत के मायने..!

बेटी आशा की बाप पासवान के खिलाफ इस बगावत के मायने..!

मीडियावाला.इन।  इसे शुद्ध राजनीति या परिवार में आंतरिक मतभेदो के दर्शन से हटकर देखा जाना चाहिए कि एक बेटी अपने ही रसूखदार बाप ‍के खिलाफ इसलिए सड़क पर धरना दे रही है कि उसने बिहार की एक...

आर्थिक आरक्षण से विषमता की नई लामबंदियां शुरू  ...!

आर्थिक आरक्षण से विषमता की नई लामबंदियां शुरू  ...!

जैसी कि आशंका थी, सामान्य वर्ग और खासकर सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू होने के पहले ही विवादो में घिर गया है। जातिवादी आरक्षण का घोर विरोध करने वाली संस्था ‘यूथ फाॅर इक्वेलिटी’ ने इसके खिलाफ...

सवर्णों को आरक्षण से ज्यादा जरूरत रोजगार के अवसरों की है..! 

सवर्णों को आरक्षण से ज्यादा जरूरत रोजगार के अवसरों की है..! 

मोदी सरकार द्वारा सामान्य वर्ग को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण को भाजपा और सहयोगी दल भले लोकसभा चुनाव की दृष्टि से भले ‘गेम चेंजर’ मान रहे हों, लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से यह दांव ‘गेम चेंजर’ साबित...