Tuesday, October 23, 2018

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अजय बोकिल

जन्म तिथि : 17/07/1958, इंदौर

शिक्षा : एमएस्सी (वनस्पतिशास्त्र), एम.ए. (हिंदी साहित्य)

पता : ई 18/ 45 बंगले,  नार्थ टी टी नगर भोपाल

मो. 9893699939

अनुभव :

पत्रकारिता का 33 वर्ष का अनुभव। शुरूआत प्रभात किरण’ इंदौर में सह संपादक से। इसके बाद नईदुनिया/नवदुनिया में सह संपादक से एसोसिएट संपादक तक। फिर संपादक प्रदेश टुडे पत्रिका। सम्प्रति : वरिष्ठ संपादक ‘सुबह सवेरे।‘

लेखन : 

लोकप्रिय स्तम्भ लेखन, यथा हस्तक्षेप ( सा. राज्य  की नईदुनिया) बतोलेबाज व टेस्ट काॅर्नर ( नवदुनिया) राइट क्लिक सुबह सवेरे।

शोध कार्य : 

पं. माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के  रूप में कार्य। शोध ग्रंथ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित।

प्रकाशन : 

कहानी संग्रह ‘पास पडोस’ प्रकाशित। कई रिपोर्ताज व आलेख प्रकाशित। मातृ भाषा मराठी में भी लेखन। दूरदर्शन आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन।  

पुरस्कार : 

स्व: जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार, मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार, मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान।

विदेश यात्रा : 

समकाालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलंबो (श्रीलंका)  में सहभागिता। नेपाल व भूटान का भ्रमण।

व्यवस्था का पटरी से उतर जाना ही ‘रावण’ हो जाना है !

व्यवस्था का पटरी से उतर जाना ही ‘रावण’ हो जाना है !

अमृतसर में इस साल दशहरे पर रावण दहन के दौरान जिस ढंग से ‘मौत की होली’ खेली गई, उससे तो आततायी रावण भी सिहर गया होगा। दशहरे पर रावण दहन के दौरान छुट पुट हादसों की खबरें आती...

‍दिग्गज नेता एनडी और ‘मी टू’ से पहले लड़ी गई ‘वी टू’ की लड़ाई...!

‍दिग्गज नेता एनडी और ‘मी टू’ से पहले लड़ी गई ‘वी टू’ की लड़ाई...!

इसे दुर्योग ही मानें कि जिस ‘मी टू’ अभियान में फंसने के बाद केन्द्रीय मं‍त्री और पूर्व संपादक एम.जे. अकबर को पद से इस्तीफा देना पड़ा, उसी कुल की एक मिलती-जुलती पटकथा पर भारतीय राजनीति की ‘अनोखी’ शख्सियत...

कन्या भोज के आईने में भूख से मरते भारत को भी देखें !

कन्या भोज के आईने में भूख से मरते भारत को भी देखें !

जिस देश में महानवमी पर कन्या भोज की पवित्र और अनुकरणीय परंपरा हो, उसी नवरात्र में यह खबर आए ‍कि  भुखमरी खत्म करने वाले देशों की सूची में भारत और पीछे चला गया है, क्षुब्ध और चिंतित करने...

क्या इलाहाबाद ‘प्रयाग’ बनकर भाजपा को  राजनीतिक ‍अनिष्ट से भी बचाएगा ?

क्या इलाहाबाद ‘प्रयाग’ बनकर भाजपा को  राजनीतिक ‍अनिष्ट से भी बचाएगा ?

उत्तर प्रदेश के योगी सरकार ने बड़ी हिम्मत के साथ एक आसान सा काम यह किया  कि जो शहर 443 सालों से इतिहास में इलाहाबाद के नाम से चल रहा था, उसे उसका पुराना पौराणिक नाम प्रयाग लौटा...

याददाश्त सुधार के बादाम राहुल को ही

याददाश्त सुधार के बादाम राहुल को ही

राजनीतिक हल्के से यह स्वास्थ्यवर्द्धक और सूखे मेवे से परिपूर्ण खबर आई है। दिल्ली भाजपा प्रवक्ता सरदार तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को अपनी याददाश्त सुधारने के लिए पाव भर बादाम भिजवाए दिए हैं।...

कांग्रेस की ‘कंगाली’ और दांत खुरच कर पेट भरने की मजबूरी ! 

कांग्रेस की ‘कंगाली’ और दांत खुरच कर पेट भरने की मजबूरी ! 

मीडियावाला.इन। अगर धन और संसाधनों को चुनाव जीतने का जरूरी फैक्टर माना जाए तो अंदाजा लगा लीजिए ‍कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत की  संभावनाएं क्या हैं? कारण कांग्रेस के राजनीतिक दावे कुछ भी...

स्कूली मासूमों को हिंदू-मुस्लिम में बांटकर कौन सा देश बना रहे हैं?

ने की वह खबर पूरे देश को स्तब्ध और क्रुद्ध करने वाली थी। क्योंकि वह देश की राजधानी नई दिल्ली से आई थी। जो खुलासा हुआ, उससे मन में यही सवाल उठा ‍कि देश में यह हो क्या...

मीडिया द्वारा आलोचना को ‘देशद्रोह’ बताने की यह कैसी सोच?

मीडिया द्वारा आलोचना को ‘देशद्रोह’ बताने की यह कैसी सोच?

क्या राज्यपाल या राजभवन के खिलाफ लिखना अथवा आलोचना करना देशद्रोह है? क्या देशद्रोह की धारा अभिव्यक्ति की आजादी से बड़ी है? ये सवाल फिर इसलिए उठे हैं कि तमिलनाडु में वहां के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के खिलाफ...

सत्ता के लिए झूठे वादों को आईना दिखाते गडकरी के बोल !

सत्ता के लिए झूठे वादों को आईना दिखाते गडकरी के बोल !

राजनीति में सच बयानी भी हिम्मत का काम है। केन्द्रीय परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ऐसी ही शख्‍सियत हैं। उनके एक ताजा बयान पर कई लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया तो कांग्रेस अध्यक्ष...

ईवीएम की ‘पवित्रता’ पर भी ‘मोहर’ लगाएंगे पांच राज्यों के चुनाव !

ईवीएम की ‘पवित्रता’ पर भी ‘मोहर’ लगाएंगे पांच राज्यों के चुनाव !

मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के अगले दो माह में होने वाले चुनाव सत्ता का सारथी तय करने के साथ-साथ इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीन ( ईवीएम) की विश्वसनीयता की अग्नि परीक्षा भी होंगे। अगर इन चुनावों के नतीजों पर भी...

‘मी टू’ या ‘यू टू’: स्त्री-पुरूष में नैसर्गिक विश्वास टूट  न हो जाए...

‘मी टू’ या ‘यू टू’: स्त्री-पुरूष में नैसर्गिक विश्वास टूट  न हो जाए...

अनचाहा संयोग है कि जब दुनिया भर  में महिलाअों के यौन प्रताड़ना के वैश्विक ‘हैशटैग मी टू कैम्पेन’ की बरसी इसी माह मनने वाली हो, उसी मौके पर भारत में बाॅलीवुड में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा जाने माने...

माना कि मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन प्रेम पत्र नहीं है, फिर भी...!

माना कि मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन प्रेम पत्र नहीं है, फिर भी...!

मीडियावाला.इन। मामला डाॅक्टरों द्वारा गलत इलाज का नहीं, बल्कि इलाज के सही नुस्खे की अबूझ लिखावट का है। हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इलाज की पर्ची में खराब और अपठनीय हैंडराइटिंग के तीन अलग...

क्यों दम तोड़ रहे हैं गुजरात के शेर !

क्यों दम तोड़ रहे हैं गुजरात के शेर !

ये चिंताजनक खबर किसी ‘राजनीतिक जंगल’ की नहीं, बल्कि गुजरात के मशहूर गिर अभयारण्य के शेरो से जुड़ी है। 2015 तक जिन शेरों की बढ़ती तादाद और हलचल से गुजरात सहित सारे देश में खुशी और गर्व का...

फर्क बापू की नशाबंदी और सिद्धू के नशाबंदी नुस्खे का !

फर्क बापू की नशाबंदी और सिद्धू के नशाबंदी नुस्खे का !

अजीब संयोग है कि ‍जिन बापू ने देश को नशाबंदी से मुक्त होने के लिए प्रेरित किया, उन्हीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की डेढ़ सौ वीं जयंती पर पंजाब के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रदेश...

लखनऊ मर्डर: यह लोगों के पुलिस पर भरोसे की भी हत्या है !

लखनऊ मर्डर: यह लोगों के पुलिस पर भरोसे की भी हत्या है !

मीडियावाला.इन।  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी पुलिस द्वारा एक निजी कंपनी के मैनेजर की सरे आम हत्या की घटना जितनी उद्वेलित करने वाली है, उससे भी ज्यादा क्षुब्ध करने वाली इस अत्यंत निंदास्पद घटना के...

क्या सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों में बदलते समाज की आहट है?

क्या सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों में बदलते समाज की आहट है?

वर्ष 2018 का सितंबर माह इतिहास में  दो ऐसे ‘क्रांितकारी’ फैसलों के लिए जाना जाएगा, जो पूरे भारतीय समाज के बदलाव की बुनियाद बन सकते हैं। बनेंगे। हालांकि इन संवेदनशील मसलों और मान्यताअों पर देश की सर्वोच्च अदालत...

वो वाकई हिंदी कमेंट्री कला के अनोखे ‘जसदेव’ थे...!

वो वाकई हिंदी कमेंट्री कला के अनोखे ‘जसदेव’ थे...!

कुछ इवेंट उसके साथ चलने और गूंजने  वाली आवाज के साथ दिल-दिमाग में हमेशा के लिए फ्रीज हो जाते हैं। महान हिंदी कमेंटेटर जसदेव सिंह की आवाज और कमेंट्री कला उन्हीं में से एक थी। वो रेडियो युग का...

राजनीति में ‘मामा’ बनना ‘काका’ कहलाने से ज्यादा फायदेमंद क्यों ?

राजनीति में ‘मामा’ बनना ‘काका’ कहलाने से ज्यादा फायदेमंद क्यों ?

भारतीय राजनीति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ही अकेले ‘मामा’ नहीं है, एक और राजनीतिक मामा पश्चिम बंगाल में भी हैं। ये हैं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार के उत्तर बंगाल विकास मंत्री रबीन्द्रनाथ घोष। घोष ने हाल में...

बंगाल का ‘राजनीतिक हिंदुत्व’ और कम्युनिस्टों की जाति उपेक्षा ?

बंगाल का ‘राजनीतिक हिंदुत्व’ और कम्युनिस्टों की जाति उपेक्षा ?

देश और खासकर मध्यप्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट के विरोध और समर्थन के हो हल्ले के बीच एक दलित चिंतक के गंभीर आरोप( या स्थापना) पर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया। दलित राजनीतिक विचारक और एक्टिविस्ट कांचा इलैया...

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी बरसी पर राजनीतिक बवाल क्यों...?

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी बरसी पर राजनीतिक बवाल क्यों...?

एलअोसी के उस पार भारतीय सेना द्वारा की गई सफल सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी बरसी सेना सहित पूरे भारत के लिए गर्व और आत्मावलोकन का अवसर होनी  चाहिए थी, लेकिन अगर यह प्रसंग भी राजनीतिक बवाल का मुद्दा...