Wednesday, November 13, 2019

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अजय बोकिल

जन्म तिथि : 17/07/1958, इंदौर

शिक्षा : एमएस्सी (वनस्पतिशास्त्र), एम.ए. (हिंदी साहित्य)

पता : ई 18/ 45 बंगले,  नार्थ टी टी नगर भोपाल

मो. 9893699939

अनुभव :

पत्रकारिता का 33 वर्ष का अनुभव। शुरूआत प्रभात किरण’ इंदौर में सह संपादक से। इसके बाद नईदुनिया/नवदुनिया में सह संपादक से एसोसिएट संपादक तक। फिर संपादक प्रदेश टुडे पत्रिका। सम्प्रति : वरिष्ठ संपादक ‘सुबह सवेरे।‘

लेखन : 

लोकप्रिय स्तम्भ लेखन, यथा हस्तक्षेप ( सा. राज्य  की नईदुनिया) बतोलेबाज व टेस्ट काॅर्नर ( नवदुनिया) राइट क्लिक सुबह सवेरे।

शोध कार्य : 

पं. माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि में श्री अरविंद पीठ पर शोध अध्येता के  रूप में कार्य। शोध ग्रंथ ‘श्री अरविंद की संचार अवधारणा’ प्रकाशित।

प्रकाशन : 

कहानी संग्रह ‘पास पडोस’ प्रकाशित। कई रिपोर्ताज व आलेख प्रकाशित। मातृ भाषा मराठी में भी लेखन। दूरदर्शन आकाशवाणी तथा विधानसभा के लिए समीक्षा लेखन।  

पुरस्कार : 

स्व: जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी उत्कृष्ट युवा पुरस्कार, मप्र मराठी साहित्य संघ द्वारा जीवन गौरव पुरस्कार, मप्र मराठी अकादमी द्वारा मराठी प्रतिभा सम्मान व कई और सम्मान।

विदेश यात्रा : 

समकाालीन हिंदी साहित्य सम्मेलन कोलंबो (श्रीलंका)  में सहभागिता। नेपाल व भूटान का भ्रमण।

भगवा जुनून: इसे अंधी श्रद्धा कहें या लोगों की आस्था का उपहास?

मीडियावाला.इन। देश में ' विजय के जश्न' के बीच यह खबर भी यूपी से ही आई है। पसंद तो आप इसे लोगों की भोली आस्था का मजाक उड़ाना कहें,...

जन सेवकों को हर बार नए घर क्यों? वो भी हरियाली की कीमत पर क्यों?

मीडियावाला.इन। एक तरफ दुनिया भर के वैज्ञानिक पर्यावरण बचाने के लिए अपीलें कर रहे हैं। खुद भोपाल जैसे शहर की हवा प्रदूषित होती जा रही है, वहीं प्रदेश की इस राजधानी में मौजूदा हरियाली को भी पलीता लगाया जा...

शायद इसीलिए कविता ने कुत्ते के लिए मरना मंजूर किया...

मीडियावाला.इन। ‘कुत्ते की मौत’ मुहावरा सभी ने सुना होगा, क्योंकि इसमे इंसान के प्रति सबसे वफादार प्राणी को लेकर आदर और तुच्छता का समन्वित भाव है, लेकिन किसी कुत्ते के लिए भी कोई मर जाए, यह जरा नया और...

खट्टर की ‘कमजोर निष्क्रियता’ और खेमका की सक्रिय ईमानदारी है?

मीडियावाला.इन। अब जबकि इस बात की पूरी संभावना है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की लंगड़ी जीत के बाद पार्टी नेता मनोहरलाल खट्टर दोबारा सीएम होंगे, तब इसी प्रदेश के एक चर्चित और ईमानदारी का खमियाजा भुगत रहे...

छप्पन इंची छाती की धड़कन और एनसीआरबी के आंकड़े..

मीडियावाला.इन। छप्पन इंची छाती रखने वाली, पाकिस्तान को आए दिन ठोकने वाली और कश्मीर से धारा 370 एक झटके में हटाने वाली मोदी सरकार भला आंकड़ों से क्यों डरती है? बेजान से लगने वाले इन आंकड़ों में ऐसी कौन...

‘कल्कि भगवान’ की अकूत दौलत और अध्यात्म का सुपरमार्केट..!

मीडियावाला.इन। ‘कल्कि पुराण’ के अनुसार तो ‘भगवान कल्कि’ को कलियुग के अंतिम चरण में अवतरित होना था, लेकिन लगता है इस भविष्यवाणी में कहीं एरर आ गया और भारत भूमि पर ‘कल्कि भगवान’ बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में ही...

बीसीसीआई बनाम ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल फाॅर कजिन्स इन इंडिया’...!

मीडियावाला.इन।फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की मशहूर कव्वाली है-‘जब रात है ऐसी मतवाली फिर सुबह का आलम क्या होगा?’ देश के सबसे अमीर खेल संगठन बीसीसीआई ( बोर्ड ऑफ कंट्रोल फाॅर क्रिकेट इन इंडिया) के नए अध्यक्ष और पूर्व कप्तान सौरव...

यह गरीबी को शिक्षा के जरिए हराने के उपायों का नोबेल पुरस्कार है..

यह गरीबी को शिक्षा के जरिए हराने के उपायों का नोबेल पुरस्कार है..

मीडियावाला.इन। पाकिस्तान की कंगाली पर गदगद होने, बौद्धिकता को बुद्धिहीनता की हद तक खारिज करने और अपनी ही आत्ममुग्ध दुनिया में रमने वाले हम भारतीयों के लिए यह खबर बहुत मायने न रखती हो, लेकिन दुनिया के लिए बहुत...

देश में आर्थिक मंदी और रविशंकर का फिल्मी चश्मा...

देश में आर्थिक मंदी और रविशंकर का फिल्मी चश्मा...

मीडियावाला.इन। क्या देश में सचमुच आर्थिक मंदी है? अगर है तो वह सत्ताधीशों को क्यों नहीं दिख रही और नहीं है तो आम आदमी अपनी तंग जेब और काम-धंधों को लेकर इतना बेचैन क्यों है? यदि देश में...

रेलवे को ‘कुतरते’ बलशाली चूहे और चूहों की रेल...

रेलवे को ‘कुतरते’ बलशाली चूहे और चूहों की रेल...

मीडियावाला.इन। यकीन मानिए भारतीय रेल को आतंकियों के हमले से भी ज्यादा खतरा चूहों के आतंक का है और इस आतंक का कोई ठोस समाधान रेलवे आज तक नहीं खोज पाई है। चूहों से रेलवे और रेल यात्री कितने...

राहुल की विपश्यना: रण में जूझने और रण तजने का फर्क...

मीडियावाला.इन। राजकपूर की यादगार फिल्म ‘बरसात’ का गाना है-‘छोड़ गए बालम मुझे हाय अकेला छोड़ गए...। देश की सबसे पुरानी और सर्वाधिक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी में कुछ ऐसा ही आलम है। कहने को देश में दो राज्यों...

क्या भाजपा के ‘चुनावी दशहरे’ में रावण की जगह पाक ने ले ली है?

मीडियावाला.इन। तो क्या भाजपा के ‘चुनावी दशहरे’ में रावण की जगह पाकिस्तान ने ली है, जिसके उल्लेख के बगैर, जिसे गरियाए बगैर और जिसे मारे बगैर कोई भी निर्वाचन अनुष्ठान अधूरा है ? यह सवाल इसलिए भी  कवायद...

उफ् ! ‘खुले में शौच से मुक्ति’ अभियान का यह जानलेवा मोड़...

उफ् ! ‘खुले में शौच से मुक्ति’ अभियान का यह जानलेवा मोड़...

मीडियावाला.इन। देश को खुले में शौच से मुक्त कराने का एक अच्छा अभियान ऐसा हिंसक मोड़ ले लेगा, शायद ही किसी ने सोचा हो। मध्यप्रदेश में इसी वजह से तीन लोग जानें गवां चुके हैं तो अब मनुष्य के...

तो क्या हम ‘दो राष्ट्रपिताओ के देश में जी रहे हैं?

तो क्या हम ‘दो राष्ट्रपिताओ के देश में जी रहे हैं?

मीडियावाला.इन। खुद को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का प्रशंसक बताने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘फादर आॅफ इंडिया’ कहा तो शायद वे उसी ‘न्यू इंडिया’ और उसके ‘पिता’ के बारे में...

‘रेनी ट्रैप’ और ‘हनी ट्रैप’ में फंसा अपना मध्‍यप्रदेश...!

‘रेनी ट्रैप’ और ‘हनी ट्रैप’ में फंसा अपना मध्‍यप्रदेश...!

मीडियावाला.इन। अजब और गजब नजारा है। इधर काले बादलों के रह- रहकर आतंकियों की तरह ‘हमले’ हो रहे हैं, उधर एक के बाद सीडियों, वीडियो और नई-नई नामावलियों की चर्चा है। लगता है पूरा ‘अतुल्य’ मध्‍यप्रदेश रेनी ट्रैप और...

कॅरियर के मझधार में युवा आईएएस के नौकरियां छोड़ने के मायने !

कॅरियर के मझधार में युवा आईएएस के नौकरियां छोड़ने के मायने !

मीडियावाला.इन। देश में मोदी राज की दूसरी पारी में एक के बाद एक आईएएस अधिकारियो द्वारा नौकरी से इस्तीफे की घटनाएं चौंकाने वाली इसलिए है कि अगर राष्ट्र आजादी  के बाद सर्वाधिक चमकीले दौर में प्रवेश कर गया है...

पड़ोसी न बदल पाने की मजबूरी और राजनाथ की पीड़ा

मीडियावाला.इन। अगर हम पड़ोसी का चुनाव नहीं कर सकते तो पड़ोसी धर्म की व्याख्या किस तरह की जानी चाहिए? मनुष्य के पड़ोसीपन और दो देशों के पड़ोसीपन में कितना फर्क है? उनकी क्या मर्यादाएँ और तकाजे हैं?...

मोदी-शाह की कठोर राजनीतिक इच्छाशक्ति का नतीजा है यह फैसला

मीडियावाला.इन। जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म करना मोदी सरकार का नोटबंदी के बाद दूसरा बड़ा मास्टर स्ट्रोक है और देश में स्व. इंदिरा गांधी द्वारा इमर्जेंसी की घोषणा के बाद किसी केन्द्र सरकार का दूसरा बड़ा...

राजनेता, किताबों की चोरी और आजम खान...!

मीडियावाला.इन। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान पर लगे तमाम आरोपों के बीच एक हैरान करने वाला इल्जाम नवाबी मदरसे से किताबों की चोरी का है। हैरानी इसलिए, क्योंकि एक तो यह आरोप मदरसे से किताबों की...

अब खाने को भी ‘हिंदू-मुसलमान’ में बांटने का ‘अ- धर्म’..!

मीडियावाला.इन। देश में हिंदू-मुस्लिम ऊर्ध्व विभाजन का यह नया ‘फूड एंगल’ है। मकसद इस विभाजन रेखा को माइक्रो लेवल तक ले जाने का है। मंशा यह संदेश देने की है कि ‘सच्चे’ हिंदू को मुस्लिम और मुसलमान के हाथों...