Tuesday, October 23, 2018

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ये किस्से चुनावी: तब जातिपाँति से उठकर वोट पड़ते थे...!

ये किस्से चुनावी: तब जातिपाँति से उठकर वोट पड़ते थे...!

इंंदौर के कामरेड होमीदाजी और सतना की कांताबेन पारेख के व्यक्तित्वों में जमीन आसमान का फर्क था लेकिन जो एक अद्वितीय समानता थी वो यह कि दोनों ही अपने-अपने शहर में अति अल्पसंख्य पारसी व गुजराती परिवारों से...

जिन्हें रावण से हमदर्दी है उनके लिए

जिन्हें रावण से हमदर्दी है उनके लिए

"त्रिलोक विजेता प्रकांड पंडित प्रचंड पराक्रमी परम शिवभक्त महान साहित्यकार लंकेश दशानन को षडयंत्र पूर्वक उसके भाई को मिला कर उसकी हत्या कर इस कपटी दुनिया से मुक्त कराने के दिन की बधाई।" पिछले दशहरे में...

हमारे भीतर जो एक राक्षस है आइए पहले उसका दहन करें ..

हमारे भीतर जो एक राक्षस है आइए पहले उसका दहन करें ..

स्कूल के दिनों में फिल्में देखने की लत थी। बुरी इसलिए नहीं कहेंगे कि फिल्में भी एक पाठशाला ही होती हैं। कई बातें जो स्कूल में नहीं सिखाई जातीं वे फिल्मों से मिल जाती हैं। आदमी जो दिखता...

आज माता भगवती की भी कुछ सुनिए !

आज माता भगवती की भी कुछ सुनिए !

चौतरफा भक्ति भाव का वातावरण है। इन नौ दिनों सभी झंझटों को ताक पर रखकर भक्तगण प्रमुदित, आनंदित रहते हैं। त्योहारों के रूप में आनंद का बंदोबस्त हमारे पुरखे कर गए। हर त्योहार मनुष्य की जिजीविषा बढा देता...

अन्नपूर्णा-रविशंकर के संबंधों पर ऋषिकेश मुखर्जी ने बनाई थी 'अभिमान' फिल्म

अन्नपूर्णा-रविशंकर के संबंधों पर ऋषिकेश मुखर्जी ने बनाई थी 'अभिमान' फिल्म

इन दिनों माँ शारदा की पवित्र नगरी मैहर में भक्तिभाव का समागम है। माँ शारदा ग्यान की देवी हैं, वे वीणावादिनी संगीत की देवी भी हैं। इसी नवदुर्गा में ही बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की बेटी अन्नपूर्णा देवी...

फिर भी जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

फिर भी जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। आज देश लगभग कांग्रेस मुक्त...

काँग्रेस का गुरूर ही कहीं उसे ले न डूबे

काँग्रेस का गुरूर ही कहीं उसे ले न डूबे

अखिलेश यादव का यह कदम मौका देखकर चौका नहीं अपितु आहत मन से किया गया जवाबी प्राहार है।  मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की एक सभा में उन्होंने टिकट वंचित काँग्रेस नेताओं को समाजवादी पार्टी से लड़ने का न्योता...

हाथी की ढाई घर चाल का मतलब समझिए

शतरंज की बिसात पर हाथी जब घोड़े जैसे ढाईघर चाल चलने लगे तो समझ जाइए खेल का अंजाम क्या होगा? बहन मायावती का मध्यप्रदेश में बसपा का काँग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने, इसका ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ने...

कृष्णा राजकपूर: जिन्होंने बालीवुड को "रिमही" संस्कृति से सुवासित किया

कृष्णा राजकपूर: जिन्होंने बालीवुड को "रिमही" संस्कृति से सुवासित किया

पिछले महीने ही जब यह खबर आई कि राजकपूर के बेटों ने तय किया है कि वे अब आरके स्टूडियो बेंच देंगे तो यह अनुमान लगाने लगा कि बेटों के इस निर्णय से कृष्णा कपूर पर क्या गुजरी...

कौव्वे हमारे पुरखों के सांस्कृतिक दूत

कौव्वे हमारे पुरखों के सांस्कृतिक दूत

पितरपख लगा है कौव्वे कहीं हेरे नहीं मिल रहे। इन पंद्रह दिनों में कौव्वे हमारे पितरों के साँस्कृतिक दूत बनके आते थे। अपने हिस्से का भोग लगाते थे।  कौव्वे पितर बनके तर गए या फिर पितरों ने ही...

जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस साँच कहै ता

जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस साँच कहै ता

चित्रकूट की महिमा को लेकर एक दोहा मशहूर है-  चित्रकूट मा बसि रहें रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा परत है ते आवत एंहि देश।। कांग्रेस विपदा में है। मध्यप्रदेश में तीन पंचवर्षी...

भ्रष्टाचार अब व्यंग नहीं विमर्श का विषय

शरद जोशी ने कोई पैतीस साल पहले हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे व्यंग्य निबंध रचा था। तब यह व्यंग्य था, लोगों को गुदगुदाने वाला। भ्रष्टाचारियों के सीने में नश्तर की तरह चुभने वाला। अब यह व्यंग्य, व्यंग्य नहीं रहा।...

हिलते तख्त का कंपन अब महसूस होने लगा है

हिलते तख्त का कंपन अब महसूस होने लगा है

एट्रोसिटी एक्ट को लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की घोषणा के बाद लगता है कि हिलते तख्त  का कंपन अब महसूस किया जाने लगा है। उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार भी इस कथित एक्ट के सख्त प्रावधानों पर फिर...

इस धुएँ को कल की आग समझिए..!

इस धुएँ को कल की आग समझिए..!

पहले तीन सच्चे किस्से फिर आगे की बात  एक  यह सचमुच हैरत में ड़ालने वाली बात थी। सत्ताधारी दल के राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त एक महाशय ने जो ग्लानिपूर्वक सुनाया उसे आप पढ़े- मेरा ड्राइवर अनुसूचित...

आभासी दुनिया से निकलो..प्यारो

छात्र जीवन में हम लोग राजनीति के बारे में खूब चर्चा करते थे। यह राजनीति कालेज और विश्वविद्यालय के परिसर के बाहर की भी होती थी। मँहगाई, बेरोजगारी समेत देश के वे तमाम मुद्दे जो उस समय उबाल...

अष्टधातुई देवों से अलग एक जन नेता

अष्टधातुई देवों से अलग एक जन नेता

मीडियावाला.इन। पिछले दो दशकों में पहली बार ऐसा होगा जब श्रीनिवास तिवारी का जन्मदिन बिना उनकी मौजूदगी के आसन्न विपन्नता के बीच मनाया जाएगा। तिवारीजी काँग्रेस के कद्दावर नेता थे। विधानसभाध्यक्ष के रूप में उनके दस साल देश...

जैसे उड़ि जहाज के पंछी.. साँच कहै ता..

एक मित्र सायकिल की दुकान पर मिल गए। बाहर उनकी चमचमाती कार खड़ी थी। मैंने पूछा-यहां कैसे? वो बोले- डाक्टर ने कहा सायकिल से चला करिए सो सायकिल से बचपन शुरू हुआ और अब बुढापा भी। दूकान वाले...

हिन्दी तुम किनके भरोसे हो..!

हिन्दी तुम किनके भरोसे हो..!

मीडियावाला.इन। दिलचस्प संयोग है कि हिन्दी पक्ष हर साल पितरपक्ष के साथ या आगे पीछे आता है। परंपरानुसार हम लगे हाथ हिन्दी के पुरखों को याद करके उनकी भी श्राद्ध और तर्पण कर लेते हैं। 

भला ऐसा समाजवाद और कहाँ..

भला ऐसा समाजवाद और कहाँ..

मीडियावाला.इन। जैसा कि पिछले साल "अगले बरस तू लौकर आ" का वायदा किया था, गणपत बप्पा घर-घर पधार गए। क्या महाराष्ट्र, क्या गुजरात, समूचा देश आज से गणपति मय गया।  बडे़ गणेशजी,...

शब्द संभारे बोलिए

शब्द संभारे बोलिए

फर्ज करिए कि एक ऐसी प्रयोगशाला बना ली जाए जो हवा में तैरते हुए शब्दों को पकड़कर एक कंटेनर में बंद कर दे, फिर भौतिकशास्त्रीय विधि से  उसका घनत्वीकरण कर ठोस पदार्थ में बदल दिया जाए तो उसका स्वरूप...