Wednesday, February 20, 2019

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एक जवान की आखिरी कविता

एक जवान की आखिरी कविता

यदि मैं रणक्षेत्र में खेत रहूँ, और ताबूत को जब घर भेजें तो मेरे सीने पर मैडल जरूर सजे हों, माँ को यह बताएं कि मैं आखिरी दम तक लड़ा, मातृभूमि को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अर्पित किया...

आतंकवाद की गर्भनाल पर प्रहार करो

मीडियावाला।इन    "कल सपने में इन्दिराजी दिखी थीं। रक्षा मंत्रालय के वाँर रूम में  इस्पात से दमकते चेहरे के साथ युद्ध का संचालन करते हुए।  दृश्य 1971 के युद्ध के दिख रहे थे। ढाका में पाकिस्तान का जनरल...

नर्मदा मैय्या को उन धुरंधरों से भी मुक्ति दिलाएं जो मां के वक्षस्थल पर पाखंड का चिमटा गाड़कर भावनाओं का धंधा कर रहे हैं

मीडियावाला.इन।      अभी कुछेक हफ्ते पहले अमरकंटक जाना हुआ। हर गली चौराहे नमामि देवि नर्मदे ..के पोस्टरों, होर्डिंग्स से पटे मिले। आदि शंकराचार्य विरचित नर्मदाष्टक की पंक्तियां..त्वदीय पाद पंकजम् नमामि देवि नर्मदे ..अब विग्यापनों की पंच लाईन बन चुकी...

निदा फ़ाज़ली को याद करते हुवे

मीडियावाला.इन। निदा साहब को इस दुनिया से रुखसत हुए आज के दिन से तीन साल पूरे हो गए। निदा साहब गजल और शाइरी को कोठे की रूमानियत से निकाल कर खेत, खलिहान में गेहूं, धान, और आंगन में तुलसी के...

इस रसभरी जलेबी में फंगस भी हैं

सत्तापक्ष बजट की ऐतिहासिकता पर व्याख्यान दे, विपक्ष इसे अब तक की सबसे बड़ी बंड़लबाजी बताए, अर्थशास्त्री इसकी चीर फाड़कर आँतें, पलातें निकालें, इससे पहले बजट पर मोटी-मोटी दो चार बातें मेरी भी। मेरे आँकलन की औसत बुद्धि...

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया देसी अन्नों का देहाती"विश्वामित्र"

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया देसी अन्नों का देहाती"विश्वामित्र"

चिलचिलात इया घाम, पसीना हमरे बद है दिन निकरत से काम, पसीना हमरे बद है कूलर, पंखा, छाँह, बैहरा सब तोहरैं ता हमी अराम हराम, पसीना हमरे बद है। पचहत्तर साल के रिमही बोली के इस...

मूछों पर ताव अब और नहीं..!

हम अतीतजीवी हैं। वर्तमान के हर बदलाव को विद्रूप बताते हुए उस पर नाहक ही लट्ठ लेकर पिल पड़ते हैं। अक्सर सुनते हैं कि हमारा जमाना कितना अच्छा था। यहां तक कि लोग अँग्रजों और राजशाही के जमाने...

गणतंत्र के सलामती की फिक्र किसे..!

गणतंत्र के सलामती की फिक्र किसे..!

अपने लोकतंत्र की खासियत यही है कि अब तक इसकी कोई कुंजी नहीं बन पाई।  भारत के गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित होने के बाद से सभी राजनीतिक दल उसी एक कुंजी की तलाश में लगे हैं। सबकी बस एक...

दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें

दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें

स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं। उनकी जयंती पर युवा दिवस मनाया जाता है। उनके बारे में इतना कुछ लिखा पढ़ा जा चुका है कि एक औसत युवा भी कुछ न कुछ तो जानता ही है। स्वामीजी ने...

हिन्दी के दाँत, खाने के कुछ दिखाने के कुछ

हिन्दी के दाँत, खाने के कुछ दिखाने के कुछ

मीडियावाला.इन। मारीशस के विश्व हिंदी सम्मेलन की खुमारी अभी तक नहीं उतरी है। कई लेखकगण वहां के खूबसूरत सागरतट की दृष्यावलियां अभी भी शेयर कर रहे हैं। पोर्ट लुई में किस ठाट के साथ हिंदी को गाया- उसका...

कमलेश्वरजी को याद करते हुए

कमलेश्वरजी को याद करते हुए

पिछले पैतीस साल की पत्रकारीय यात्रा में मेरे दिल-ओ-दिमाग में जिन कुछ शख्सियतों की गहरी छाप रही है उनमें से कमलेश्वर जी प्रमुख हैं।  आज  उनका जन्मदिन है। उन्हें दैनिक भास्कर के सेटेलाइट एडिशन के...

हर पल मनाए जिन्दगी का जश्न

हर पल मनाए जिन्दगी का जश्न

समय की गति के हिसाब से हर नया विहान ही नया वर्ष है। हर क्षण अगले क्षण की पृष्ठभूमि बनता जाता है। सृष्टि के अस्तित्व में आने के बाद से समय की गति ऐसी ही है... ऐसी ही...

वो अक्सर याद आते हैं!

वो अक्सर याद आते हैं!

मीडियावाला.इन। पटवा जी ने कहा था- राजनीति में कोई किसी का गुरू-चेला नहीं, सबका अपना अपना प्रारब्ध! पुण्यस्मरण  पटवाजी आज हमारे बीच नहीं हैं। भगवान ने उनके महाप्रयाण का वही...

विकास का"आदित्य ह्रदय पाठ"है ये सोलर प्लांट साँच कहै ता..

विकास का"आदित्य ह्रदय पाठ"है ये सोलर प्लांट साँच कहै ता..

रीवा का अल्ट्रामेगा सोलर प्लांट, थर्मलपावर के धुंए और सीमेंट के गर्दोगुबार से गैस चैम्बर में बदल रहे विंध्य के लिए गौरवान्वित करने वाला स्तुत्य काम है। ऊर्जा के अजस्त्र श्रोत सूर्य की रजत रस्मियों को बिजली में...

कमलनाथ, इसलिए कुछ अलग, कुछ हटकर

कमलनाथ, इसलिए कुछ अलग, कुछ हटकर

मीडियावाला.इन। छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता/टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता.. भारतरत्न अटलबिहारी वाजपेयी की एक लंबी कविता के बीच की इन दो पंक्तियों के मंत्र को भले ही उनके अनुयायी  आत्मसात...

किसका है देश, हम किसके लिए मरें!

किसका है देश, हम किसके लिए मरें!

इस साल का सोलह दिसंबर नेताओं के आँसू बहाए बिना बीत गया। यह दिन देश के लिए उतना ही खास है जितना छब्बीस जनवरी, पंद्रह अगस्त। 1971 में इसी दिन हमारी फौज ने ढाँका में 96000 पाकिस्तानी सैनिकों...

काँग्रेसः रसातल से धरातल तक, जमीन पर खड़े होकर आसमान की हकीकत को नापिए जनाब

काँग्रेसः रसातल से धरातल तक, जमीन पर खड़े होकर आसमान की हकीकत को नापिए जनाब

मध्यप्रदेश का एक वोटर होने के नाते मुझसे कोई पूछे कि इस जनादेश के मायने क्या..? तो मेरा जवाब होगा- भाजपा के लिए अहंकार को सबक और काँग्रेस के लिए स्वेच्छाचरिता पर लगाम। मध्यप्रदेश के चुनाव...

लोकतंत्र की छाती, शनि की साढे साती 

लोकतंत्र की छाती, शनि की साढे साती 

अपने देश की हर समस्या के इलाज के लिए टोने टोटके हैं। कठिन से कठिन समस्या का समाधान उसी से निकलता है। 11 को चुनाव परिणाम आने हैं, एक अखबार ने ब्योरा छापा कौन उम्मीदवार किस मंदिर की...

अकथ कहानी, इंडियन काँफी हाऊस की

अकथ कहानी, इंडियन काँफी हाऊस की

अपनी झील नगरी भोपाल विरोधाभासों का कंट्रास्ट लेकर जीती है। इसकी रंगीन झिलमिलाहट सिर्फ इश्तहारों में है। वास्तव में है ये ब्लैक एन्ड ह्वाइट।  अब जैसे भोपाल के न्यू मार्केट वाले इंडियन काँफी हाउस को...

दुखिया एक किसान है रोवै औ खोवै

लगता है भगवान ने किसान और बैल की किस्मत एक साथ गढी है। दोनों परस्पर पूरक हैं इसलिए जब बैल का नाम लो तो किसान की आकृति उभरती है।  दोनों के भाग्य में डंडा...