Sunday, April 21, 2019

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"बजरंगबली गरीब गुरबों के भगवान हैं। लिखने पढने वालों के प्रेरक हैं। वे भगवान नहीं वास्तव में सद्गुरु हैं"  कृपा करहुँ गुरुदेव के नाईं

"बजरंगबली गरीब गुरबों के भगवान हैं। लिखने पढने वालों के प्रेरक हैं। वे भगवान नहीं वास्तव में सद्गुरु हैं" कृपा करहुँ गुरुदेव के नाईं

अपन के गुरदेव बजरंग बली हैं। गोस्वामी जी कह गए.. अउर देवता चित्त न धरई, हनुमत सेइ सर्व सुख करई। गोसाईं जी के लिए बजरंगबली देवता, ईश्वर नहीं बल्कि गुरु हैं।  इसलिए जब भी अपने ...

विंध्य में अर्जुन सिंह-श्रीनिवास फैक्टर -क्या गुल खिलाएगी दो विपरीत ध्रुवों की यह युति!

विंध्य में अर्जुन सिंह-श्रीनिवास फैक्टर -क्या गुल खिलाएगी दो विपरीत ध्रुवों की यह युति!

भोपाल/रीवा लोकसभा चुनाव के लिए जब श्रीनिवास तिवारी के पौत्र सिद्धार्थ तिवारी नामांकन का पर्चा दाखिल कर रहे थे तब अजय सिंह राहुल उनके गार्जियन की भूमिका में खड़े थे। इससे पहले जिस दिन अजयसिंह ने सीधी से...

समाजवाद सबको चाहिए लेकिन कटपीस में.

समाजवाद सबको चाहिए लेकिन कटपीस में.

मीडियावाला.इन।"संविधान की पोथी तैय्यार करते समय या तो बाबा साहेब अँबेडकर समाजवाद को भूल गए थे या फिर भविष्य में उसकी दुर्गति की कल्पना करते हुए अपने तईं उसकी इज्जत वख्श दी।" ......................

अखबारों में विचार अब घाटे का सौदा!

आज बाबूजी(पुण्यस्मरणीय मायाराम सुरजन) का जन्मदिन है। संयोग देखिए कि आज ही के दिन भवानी प्रसाद मिश्र भी जन्मे। दोनों महापुरूषों का अवतरण उस माटी में हुआ जहाँ सतपुड़ा की छाँह में माँ नर्मदा आशीष लुटाती हैं। आज...

फगुआ का बीटिंग रिट्रीट है 'बुढवा मंगल' लोकरंजन

इधर इंदौर के राजवाड़े में जैसे रंगपंचमी के दिन हुरियारों का धमाल रहता है वैसे ही उधर बनारस में 'बुढ़वा मंगल' की मस्ती। संकटमोचन बजरंगी  मंदिर का प्रागंण हुरियाए भक्तों से भरा रहता है। बुढवा मंगल एक तरह...

आभासी दुनिया में गत्ते की तलवार भाँजती 'युवाशक्ति'

आभासी दुनिया में गत्ते की तलवार भाँजती 'युवाशक्ति'

मीडियावाला.इन। "सोशल मीडिया एक ऐसा सोख्ता बन गया है जो युवाओं का गुस्सा, प्रतिरोध, विद्रोह, आंदोलन, विचार सबकुछ सोखकर कर उन्हें दिमागी तौरपर सफाचट कर रहा है। छात्रों व युवाओं के सम्मुख एक वैकल्पिक संस्कृति रच दी गई...

दुनिया मेरे आगे/सिसकते दरख्त

दुनिया मेरे आगे/सिसकते दरख्त

मीडियावाला.इन। हमारे गांव के सीवान पर महुआ के दो बड़े दरख्त थे। उम्र कोई दो सौ वर्ष। उन्हीं के बगल से गांव जाने का रास्ता गुजरता था। पहले ढर्रा था, फिर मुरम वाली सड़क से पक्की डामर सड़क होते हुए...

ड्रैगन साँप का पुरखा, अभी तक नहीं समझे!

मीडियावाला.इन। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन लगातार चौथी बार पाकिस्तान के हक में अजहर मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के आड़े आ गया। यह अप्रत्याशित नहीं। 'पयंपानम् भुजंगानाम केवलम् विष वर्धनम्' लेकिन  वह तो साँप का...

एक अपराजेय योद्धा जिसे  सिर्फ मौत ही मात दे पायी...! जन्मदिवस पर विशेष

एक अपराजेय योद्धा जिसे सिर्फ मौत ही मात दे पायी...! जन्मदिवस पर विशेष

मीडियावाला.इन।स्व.माधवराव सिंधिया के जन्मदिवस  पर एक संस्मरण  देश में जब भी एक संजीदा और कर्तव्यनिष्ठ राजनेता की चर्चा चलेगी उसमें एक नाम होगा स्वर्गीय माधवराव सिंधिया जी का। (जन्म 10 मार्च 1945 को मुंबई में, निधन...

संभावनाओं के क्षितिज में हमारी बेटियां

संभावनाओं के क्षितिज में हमारी बेटियां

महिला दिवस पर विशेष  मीडियावाला.इन। जितने कष्टकंटकों में है जिसका जीवन सुमन खिला,  गौरव गंध उसे उतना ही  यत्र-तत्र-सर्वत्र मिला..! ..राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त शब्दचित्र कभी-कभी ही अर्थवान होते हैं लेकिन अवनि चतुर्वेदी,...

ग्वालियर का एयरबेस, खमरिया के बम  और हमारी अवनि चतुर्वेदी

ग्वालियर का एयरबेस, खमरिया के बम और हमारी अवनि चतुर्वेदी

मीडियावाला.इन। वीर योद्घा विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान के साथ परिस्थिजन्य दुर्घटना के दुख के बीच आईएएफ की बालाटोक स्ट्राइक के बाद दुनिया भर से जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं वह उम्मीदों से कहीं...

जीने की ख्वाहिश है तो तो मरने की तैयारी रख...

जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख..!  ज्वलंत/जयराम शुक्ल             -अमेरिका इसलिए महान है क्योंकि अस्तित्व में आने के बाद से  लागातार युद्ध लड़ रहा है, पहले अपने लिए लड़ा, अब दूसरों पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए!...

एक जवान की आखिरी कविता

एक जवान की आखिरी कविता

यदि मैं रणक्षेत्र में खेत रहूँ, और ताबूत को जब घर भेजें तो मेरे सीने पर मैडल जरूर सजे हों, माँ को यह बताएं कि मैं आखिरी दम तक लड़ा, मातृभूमि को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अर्पित किया...

आतंकवाद की गर्भनाल पर प्रहार करो

मीडियावाला।इन    "कल सपने में इन्दिराजी दिखी थीं। रक्षा मंत्रालय के वाँर रूम में  इस्पात से दमकते चेहरे के साथ युद्ध का संचालन करते हुए।  दृश्य 1971 के युद्ध के दिख रहे थे। ढाका में पाकिस्तान का जनरल...

नर्मदा मैय्या को उन धुरंधरों से भी मुक्ति दिलाएं जो मां के वक्षस्थल पर पाखंड का चिमटा गाड़कर भावनाओं का धंधा कर रहे हैं

मीडियावाला.इन।      अभी कुछेक हफ्ते पहले अमरकंटक जाना हुआ। हर गली चौराहे नमामि देवि नर्मदे ..के पोस्टरों, होर्डिंग्स से पटे मिले। आदि शंकराचार्य विरचित नर्मदाष्टक की पंक्तियां..त्वदीय पाद पंकजम् नमामि देवि नर्मदे ..अब विग्यापनों की पंच लाईन बन चुकी...

निदा फ़ाज़ली को याद करते हुवे

मीडियावाला.इन। निदा साहब को इस दुनिया से रुखसत हुए आज के दिन से तीन साल पूरे हो गए। निदा साहब गजल और शाइरी को कोठे की रूमानियत से निकाल कर खेत, खलिहान में गेहूं, धान, और आंगन में तुलसी के...

इस रसभरी जलेबी में फंगस भी हैं

सत्तापक्ष बजट की ऐतिहासिकता पर व्याख्यान दे, विपक्ष इसे अब तक की सबसे बड़ी बंड़लबाजी बताए, अर्थशास्त्री इसकी चीर फाड़कर आँतें, पलातें निकालें, इससे पहले बजट पर मोटी-मोटी दो चार बातें मेरी भी। मेरे आँकलन की औसत बुद्धि...

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया देसी अन्नों का देहाती"विश्वामित्र"

पद्मश्री बाबूलाल दाहिया देसी अन्नों का देहाती"विश्वामित्र"

चिलचिलात इया घाम, पसीना हमरे बद है दिन निकरत से काम, पसीना हमरे बद है कूलर, पंखा, छाँह, बैहरा सब तोहरैं ता हमी अराम हराम, पसीना हमरे बद है। पचहत्तर साल के रिमही बोली के इस...

मूछों पर ताव अब और नहीं..!

हम अतीतजीवी हैं। वर्तमान के हर बदलाव को विद्रूप बताते हुए उस पर नाहक ही लट्ठ लेकर पिल पड़ते हैं। अक्सर सुनते हैं कि हमारा जमाना कितना अच्छा था। यहां तक कि लोग अँग्रजों और राजशाही के जमाने...

गणतंत्र के सलामती की फिक्र किसे..!

गणतंत्र के सलामती की फिक्र किसे..!

अपने लोकतंत्र की खासियत यही है कि अब तक इसकी कोई कुंजी नहीं बन पाई।  भारत के गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित होने के बाद से सभी राजनीतिक दल उसी एक कुंजी की तलाश में लगे हैं। सबकी बस एक...