Tuesday, October 23, 2018

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प्रज्ञा पाण्डेय

संस्कृत में एम.ए .के बाद बी.एड. साहित्यिक अभिरुचियों के चलते कहानी लेखन की ओर झुकाव, पहली कहानी देश की अग्रणी साहित्यिक पत्रिका हंस में प्रकाशित। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और लेख निरंतर प्रकाशित. सुप्रसिद्ध कथाकार कृष्ण बिहारी के संपादन में आबूधाबी से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका "निकट " की कार्यकारी संपादक प्रज्ञा स्त्री के सामाजिक सरोकारों को लेकर सतत लिख रही है वर्तमान में लखनऊ में निवासरत।

सम्पर्क - 9532969797

मेरा घर कहाँ है?

मेरा घर कहाँ है?

मीडियावाला.इन। -प्रज्ञा पांडे ये वही बाबूजी थे जिन्होंने बिदाई से पहले माड़ो में उसका माथ ढका था और भैया की टेंट से दस हज़ार और रखवाने के बाद चिर सुख का आशीर्वाद दिया था और वही अम्मा जी थीं...

कहानी : तितली

कहानी : तितली

यह भी फरवरी की एक सर्द सुबह थी.  असल में उन्हें इतना अचम्भा न हुआ  होता जो उस मल्टीस्टोरीड इमारत के अट्ठारहवें माले के दूसरे टावर में उनके पहुंचते ही यह घटा न होता, उन्होने उस वारदात...

आधी आबादी - मुक्ति किस तरह

आधी आबादी - मुक्ति किस तरह

स्त्री के देह का विमर्श आज का नहीं यह सभ्यता के उजाले में पहुँचने के बाद ही मनुष्य ने शुरू कर दिया था।  आजतक यह विमर्श यदि स्त्री की देह पर ही  अटका हुआ है तो  कुछ तो वजह...