Tuesday, October 23, 2018

Blog

प्रकाश भटनागर

पिछले तीस सालों से मुख्यधारा की पत्रकारिता में सक्रिय। भोपाल के कई बड़े-छोटे कहे जाने वालों अखबारों में काम किया। वर्तमान में एलएन स्टार भोपाल के संपादक। राजनीतिक टिप्पणियों और विश्लेषण के लिए अपने मित्रों में सराहे जाते हैं।


अब कमलनाथ क्या करेंगे? 

अब कमलनाथ क्या करेंगे? 

सौ टके का सवाल है, अब कमलनाथ क्या करेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची को लेकर उनकी वह मांग सिरे से खारिज कर दी है, जिसे मान लिए जाने की सूरत में कांग्रेस का यह दावा मजबूत हो...

राफेल पर कुछ धीरज धरे कांग्रेस

राफेल पर कुछ धीरज धरे कांग्रेस

सुदूर किसी समुद्री इलाके में सैलानी के तौर पर जाइए। एक न एक जगह आपको समुद्र के बीचों-बीच ले जाकर किसी दुर्लभतम जलीय जीव को दिखाने का वादा किया जाता है। इसकी भारी कीमत ली जाती है। चतुरसुजान...

क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा

ये उर्दू का एक नानवेजी मुहावरा है। पिद्दी एक छोटी से चिढ़िया होती है। और इस मुहावरे का संदर्भ यह होता है कि किसी तुच्छ या अर्थहीन बात की जा रही हो तो उसे आगे बढ़ने से रोकने...

जिसने पाप ना किया हो, जो पापी ना हो....

जिसने पाप ना किया हो, जो पापी ना हो....

ये किस्सा बिल्कुल रंगे सियार जैसा है। रंगा सियार एक बार जंगल का राजा तो बन सकता है लेकिन अपनी पहचान भला कौन, कब और कहां तक छिपा सकता है? दुर्गति की शिकार कांग्रेस के हाल भी कुछ...

अमंगल ग्रह पर बैठे ये गैंगबाज

अमंगल ग्रह पर बैठे ये गैंगबाज

मीडियावाला.इन।  गुजरात में जो कुछ हो रहा है, वह भयावह है। पड़ताल के लायक है। कठोरता के सााथ निषेध के काबिल है। इस सबके साथ यह सोचने का विषय भी होना चाहिए। बात गुजरात से ही शुरू करते...

शिवराज जी! चिंता कीजिए, गेहलोत और नंदकुमार के ऐसे आचरण पर

शिवराज जी! चिंता कीजिए, गेहलोत और नंदकुमार के ऐसे आचरण पर

बात पुरानी है। थावरचंद गेहलोत तब केवल विधायक थे। विधानसभा में एक दिन वह छा गये। उनकी सीधी भिड़ंत अपने ही जैसे तीखे मिजाज वाले उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव से हो गई। यादव ने गरजते हुए कहा, 'सहकारिता...

तो वाजपेयी को भुनाने पर आपत्ति क्यों...?

तो वाजपेयी को भुनाने पर आपत्ति क्यों...?

विलियम शेक्सपियर ने लिखा था, भला नाम में क्या रखा है? इस लिहाज से किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद देश में कई योजनाओं तथा स्थानों को उनका नाम देने की...

कैचिंयों की तारीफ करने से बचो मोदी जी....

कैचिंयों की तारीफ करने से बचो मोदी जी....

हिन्दी की एक अच्छी फिल्म थी, नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे, यह फिल्म 1966 में बनी थी। इसका मुख्य चरित्र अभिनेता वाला किरदार मूलत: नाई रहता है। दिन फिरते हैं। वह रईस बन जाता है और हज्जाम की पहचान...

इस मदारी की यही सबसे बड़ी सफलता

इस मदारी की यही सबसे बड़ी सफलता

सफल मदारी किसे कहेंगे? डुगडुगी बजाने वाले को? मजमा इकट्ठा करने वाले को? लच्छेदार बातों में उलझाए रखने में निपुण शख्स को? नहीं। मदारी की सफलता मजमे के अंत पर निर्भर करती है। जब वह भीड़ से पापी पेट...

कब आएगा ऐसा गुरूवार?

गजब का गुरूवार! जबरदस्त जुम्मेरात! हर ओर औरत। सर्वोच्च न्यायालय की चिंता में। घुसपैठियों के रोम-रोम में। कांग्रेसी महाराजा द्वारा किए गए अपमान को बिसराने में और भोपाल के मंत्री निवास में भाई के खिलाफ मां के दर्द भरे...

अब कई बातें देखने लायक होंगी कांग्रेस में

अब कई बातें देखने लायक होंगी कांग्रेस में

अब यह बात देखने लायक होगी। इस तरह की और भी कई बातें होंगी। यह सब होगा मध्यप्रदेश की कांग्रेस में। कि क्या कमलनाथ पूरी तरह मैदान में पसीना बहाते दिखने लगेंगे। कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी दिल्ली दरबार से...

उनके पेट दर्द को न बनाएं अपने सिर का दर्द

उनके पेट दर्द को न बनाएं अपने सिर का दर्द

विनम्र निवेदन है। सवाल का जवाब देने की बजाय मोमबत्ती उठाकर मत चल पड़िए। सोशल मीडिया पर ज्ञानवाणी शुरू ना करें। इसे किसी नरेंद्र मोदी या आरएसएस से जोड़कर न देखें।  किसी राहुल गांधी, ममता बनर्जी या अन्य विपक्षी से...

बावरिया जी! बचिए कि दिल्ली बहुत दूर है

बावरिया जी! बचिए कि दिल्ली बहुत दूर है

पता नहीं वह पुलिस अफसर कौन था। लेकिन उसके सामने थर-थर कांपते शख्स का नाम आज भी याद है। गोविंद सिंह राजपूत। उनके कुर्ते पर जितनी सिलवटें पड़ी हुई थीं, उससे ज्यादा बल उनकी पेशानी पर देखे जा सकते...

गिरोहबंदी के खिलाफ गुस्सा तो आएगा ही

गिरोहबंदी के खिलाफ गुस्सा तो आएगा ही

मीडियावाला.इन। कर्नाटक में भाजपा के विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल के कथन पर बवाल मचना स्वाभाविक है। नि:संदेह किसी को मंत्री रहते हुए भी यह हक नहीं कि केवल विचारों की अभिव्यक्ति के लिए किसी को गोली मारने का आदेश...

कांग्रेस का शर्मनाक पूर्ण सत्य 

कांग्रेस का शर्मनाक पूर्ण सत्य 

मीडियावाला.इन। कहा तो यही जा रहा था कि कमलनाथ और मायावती की कैमेस्ट्री अच्छी है। इसलिए कमलनाथ को भरोसा था कि बसपा के साथ मध्यप्रदेश में कांग्रेस का गठबंधन आसानी से हो जाएगा। लेकिन उधर कांग्रेस कार्यसमिति ने...

शिवराज का प्यारा दुश्मन 

शिवराज का प्यारा दुश्मन 

अमजद खान की एक फिल्म थी प्यारा दुश्मन। फिल्म की कहानी का दिग्विजय सिंह या शिवराज सिंह चौहान के ताजा देशद्रोही विवाद से कोई खास नाता नहीं है। फिल्म का नाम बस यूं याद आ गया कि शिवराज सिंह...

मूर्खता से बेहतर नकलीपन ही सही

मूर्खता से बेहतर नकलीपन ही सही

सोनिया गांधी आज निश्चित ही चैन की नींद सो सकती हैं। यकीनन उनके हृदय को बीते लम्बे समय से मथ रही चिंताओं का स्तर आज काफी कम हो गया होगा। क्योंकि उनके बेटे राहुल गांधी ने जता दिया कि...

चवन्नी छाप संवादों की यह सियासत

राजधानी में भोपाल टॉकीज नामक एक संस्था का अस्तित्व खत्म हो चुका है। चौराहा तो अब भी इसी नाम से जाना जाता है। करीब बीस साल पहले यहां एक फिल्म पुन: प्रदर्शित की गई। शीर्षक था, हीरा। टॉकीज...

जाको प्रभु दारुण दुख देही...

पता नहीं कि इस समय अखिल भारतीय कांग्रेस की कार्यसमिति की घोषणा किया जाना कितना जरूरी था। खेर आगे पीछे तो उसे होना ही था। शायद राहुल गांधी ने किसी ज्योतिषि से यह मुहूर्त निकलवाया हो। या किसी...

संभव के विरुद्ध का ऐसा जुनून...?

मुंशी अमीरअहमद मिनाई का एक शेर है, करीब है यारों रोज-ए-महशर, छुपेगा कुश्तों का खूÞन क्यूंकर जो चुप रहेगी जÞबान-ए- खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का कल्पेश जी के दुखद निधन पर मेरे कुछ लिखने...