Wednesday, June 26, 2019

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श्रुति अग्रवाल

कई बार जीवन में ऐसे पल आते हैं जो सदियों तक किस्से के रूप में याद रहते हैं... उन्हीं किस्सों की किस्सागोई में गुम श्रुति अग्रवाल पत्रकारिता का चिरपरिचित चेहरा है। वे लम्बे समय तक राजस्थान पत्रिका और सहारा समय में पत्रकार रही है।

ट्वेल्व पाइंट ब्लॉग संचालित करते हुए श्रुति ने कई अनछुए पहलुओं पर कलम चलायी है।

भगवा की जगह रक्ताभ जामा पहन लो..

भगवा की जगह रक्ताभ जामा पहन लो..

मीडियावाला.इन। भीड़ ने तबरेज को नहीं मारा श्री राम की पावन मूरत को खंडित किया है श्री राम के लिए ही सही केसरिया रंग को बख्श दो...बख्श दो उनके नाम को....बहुत पहले लिखा था अयोध्या राम मंदिर विवाद पर....राम...

किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए....

किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए....

मीडियावाला.इन। रमजान का माह कितना मुकद्दस होता है...बचपन में अपने करीबियों के साथ जिया है इसे इसलिए कहती हूं "सबकी मीठी ईद में कड़वाहट घोलने का हक एक क्रूर हैवान को कैसे दिया जा सकता है।"अलीगढ़ में ढ़ाई साल...

कुछ रोज से जिंदगी रोज उल्टे कदम चल रही है...

कुछ रोज से जिंदगी रोज उल्टे कदम चल रही है...

मीडियावाला.इन। कहते हैं डायन के पांव उल्टे होते हैं। वो हमेशा पीछे की तरफ जाती है। कुछ रोज से जिंदगी ने डायन का चोला पहन लिया है। सच एक मासूम पीजी डॉक्टर पायल तडवी की आत्महत्या....जिंदगी का पीछे जाना ही...

सूरत हादसे में ज्यादतर बेटियां ही क्यों ... एक बेटी सुना रही माँ की कहानी जिसे आप अपने बच्चों को सुनाइएगा ना प्लीज

मीडियावाला.इन। " मेरी माँ सासू माँ कहती हैं, स्कूलों में लड़कियों के लिए तो स्काउट को 10 वीं तक कंपलसरी कर देना चाहिए। वह स्काउट की गाइड कैप्टन थी, मुझे भी कल ही पता चला। पापाजी कहते थे कपड़े मौसम...

21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना.

21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना.

मीडियावाला.इन। "कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनपर लिखना खुद की आत्मा पर कुफ्र तोड़ने जैसा है, सूरत की बिल्डिंग में आग...21 बच्चों की मौत...आग और घुटन से घबराए बच्चों को इससे भयावह वीडियो आज तक नहीं देखा....इससे ज्यादा छलनी मन...

यादगार चुनाव.

यादगार चुनाव.

मीडियावाला.इन।बुद्धिजीवी कुछ भी कहें, 2019 के चुनाव हमेशा यादगार रहेंगे क्योंकि इस बार लोकतंत्र के जन ने राजा-रजवाड़ों-राजकुमारों को पदच्युत कर साबित कर दिया, भीड़ भेड़चाल चल सकती है लेकिन गुलाम मानसिकता से इंकार करना सीख गई है। देश को...

बचपन को बचाइए सेक्सुअल हैरेसमेंट का पाश उन्हें ताउम्र जकड़ा रहता है..

बचपन को बचाइए सेक्सुअल हैरेसमेंट का पाश उन्हें ताउम्र जकड़ा रहता है..

मीडियावाला.इन | केके बिड़ला फौन्डेशन से बिहारी पुरस्कार प्राप्त उपन्यास स्वप्नपाश  पर चर्चा  "कुछ किताबों में जिंदगी खुद शब्द का रूप लेकर मुखर होती है...हंसती-मुस्कुराती ही नहीं डराती है...सहमाती है...फिर धीरे से चाबी दे जाती है, उस बंद ताले...

बोलती गुड़िया क्या मुख्य भूमिका में आएगी?

बोलती गुड़िया क्या मुख्य भूमिका में आएगी?

मीडियावाला.इन। अरे इंदिरा गाँधी की पोती आई है...बिलकुल इंदिरा जी जैसा बोलती है...साड़ी उनकी ही तरह पहनती है...बिलकुल उनकी कॉपी है...कितना अच्छा बोला ना...प्रिंयका गांधी...रोड शो में यहां से वहां तक हर जगह भीड़, हर जगह उनकी एक झलक पाने...

येती-सेना और हमलोग

येती-सेना और हमलोग

मीडियावाला.इन। जब भी कुछ अजीबोगरीब घटित होता है तो उसका सामने आना जरूरी है...फिर वह बड़े से पांव का आकार हो जिसे येती के नाम से जाना जाता है या फिर उड़नतश्तरी। टैक्नालॉजी का युग है, आम व्यक्ति के हाथ...

हां मैं मोह में हूं...

हां मैं मोह में हूं...

मीडियावाला.इन। हां मैं मोह में हूं। जिंदगी का मोह, रिश्तों का मोह। जिंदगी के उतार चढ़ाव का मोह। ये मोह मुझे जीने की शक्ति देता है। मेरे अंदर समाहित जुनून का नाम यह मोह ही तो है। इस स्वीकारोक्ति से...

मोहब्बतों के देश में नफरत की पहली आंधी:न्यूजीलैंड

मोहब्बतों के देश में नफरत की पहली आंधी:न्यूजीलैंड

मीडियावाला.इन। मेरे लिए न्यूजीलैंड मोहब्बतों का देश है। क्राइसचर्च इस देश के दिल की धड़कन। यहां की मस्जिद में हुआ हमला मोहब्बतों के देश में नफरत की पहली आंधी है...सोच सकते हैं कैसी दुनिया बना दी है हमने...यदि एक तरफ...

किसका जूता, किसका सिर  अरे यार फिर वही जूतम पैजार और गांव के नेताजी की याद

किसका जूता, किसका सिर अरे यार फिर वही जूतम पैजार और गांव के नेताजी की याद

मीडियावाला.इन। जूतम पैजार से मेरी मुलाकत बहुत पहले हुई थी...मुलाकात की जगह थी...शहर का एक कॉन्वेंट स्कूल, जहां हम पढ़ते थे। क्लॉस 4 थ में थी...एकाएक खबर मिली एक सर ( यहां नाम लिखने का मन नहीं क्योंकि छात्रों को...

शिव उनकी सती और पार्वती

शिव उनकी सती और पार्वती

मीडियावाला.इन। शिव मेरे अराध्य ही नहीं प्रथम गुरु है..प्रथम ही नहीं-अंतिम गुरु भी। शिव मेरे लिए सष्टिकर्ता भी हैं और संहारक भी। त्रिनेत्रधारी...तीसरा नेत्र खोले तो जग विध्वंस कर दें। वे कत्थक के जन्मदाता हैं...रागनियों के प्रणेता हैं। जग में...

एक अधूरा सा "आई लव यू"

एक अधूरा सा "आई लव यू"

टीवी से दूरी बनाकर चल रही हूं....न्यूज चैनल का उन्माद चिढ़ पैदा कर रहा है....लेकिन आज कुछ मिनटों की न्यूज में देखा निकिता जी का चेहरा जेहन से जा ही नहीं रही...ना ही भूल पा रही हूं उनका...

कमजोर नस पर हाथ

कमजोर नस पर हाथ

मीडियावाला.इन। नाम बड़ा या काम...जब भी इस तथ्य पर चर्चा उठती है तो राजनीति के नक्कारखाने में नाम की ही तूती बोलती है. दुनिया के किसी भी कोने में जाइए...वंशावली की गहरी जड़े राजतंत्र की ओर इशारा करती हैं, इशारा...

इन इबारतों को मिटा दिया जाना चाहिए.

इन इबारतों को मिटा दिया जाना चाहिए.

मीडियावाला.इन। आज रोना-चीख़ना और चिल्लाना नहीं चाहिए...सवाल करने चाहिए, तब तक करने चाहिए, जब तक हर एक पालक को उसके सवालों का जवाब ना मिल जाए। एक नामी स्कूल...स्कूल का होस्टल ....रात सीनियर्स अपने जूनियर्स को निर्वस्त्र करते थे। बेहूदगी...

मैं नफरत भी लिखना चाहू तो प्यार लिखा जाता है

मैं नफरत भी लिखना चाहू तो प्यार लिखा जाता है

मीडियावाला.इन। नफरत....ये शब्द किसने बनाया। किसने बनाया, बेचारा जैसा शब्द। याद है, पापाजी को माथे पर आए बल भी पसन्द ना थे, ना ही खुद को कभी बेचारा कहना। कुछ ऐसी ही मैं होती जा रही हूं, हर गुजरते साल...

ये कैसी चुप्पी... एज अ यंग जर्नलिस्ट इन इंडिया, आई वॉज रेप्ड बाई एम.जे.अकबर, हेअर इज माय स्टोरी....

ये कैसी चुप्पी... एज अ यंग जर्नलिस्ट इन इंडिया, आई वॉज रेप्ड बाई एम.जे.अकबर, हेअर इज माय स्टोरी....

मीडियावाला.इन। Shruti Agrawal   ये कैसी चुप्पी... एज अ यंग जर्नलिस्ट इन इंडिया, आई वॉज रेप्ड बाई एम.जे.अकबर, हेअर इज माय स्टोरी.... छोटी सी लड़की, पत्रकारिता के बड़े ख्वाब...क्रूर और वहशी बॉस। छोटी...

तनुश्री दत्ता के बहाने: दुनिया गोल है और कुछ लोग कभी ना बदलेंगे.

तनुश्री दत्ता के बहाने: दुनिया गोल है और कुछ लोग कभी ना बदलेंगे.

मीडियावाला.इन। कहानी शुरू होती है 10 साल पहले एक फिल्म के सेट पर। अभिनेत्री युवा है...ब्यूटी कांटेस्ट की विजेता...इमेज हॉट हिरोइन की है, स्वतंत्र है ( पिंक फिल्म की अभिनेत्रियों की तरह लेकिन वह वास्तविक स्वतंत्र है)। उसका परिवार हमेशा...

थोड़ा संभलिए, आप बेटियां पाल रहे हैं!

थोड़ा संभलिए, आप बेटियां पाल रहे हैं!

मीडियावाला.इन। " कुछ दशक पहले के पूर्वाग्रह में बेटियों को ससुराल से डरना सिखाया जा रहा था, आज नफरत करना...यह दोनों ही स्थितियां गलत हैं...बिलकुल गलत।" आईपीएस सुरेंद्र कुमार की आत्महत्या...इससे पहले आईएएस मुकेश...