Tuesday, October 23, 2018

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सुशील सिद्धार्थ

ग्राम भीरा, जिला सीतापुर (उ.प्र.) में 2, जुलाई 1958 को जन्म। हिन्दी साहित्य में पी.एच.डी.

व्यंग्य, आलोचना और कथा साहित्य में लंबे समय से संलग्न। देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें व आलोचनायें प्रकाशित।

दूरदर्शन से 30 वृत्तचित्त प्रसारित। पटकथा एवं संवाद लेखन के अतिरिक्त अनेक पत्रों में स्तंभ लेखन। पढते-लिखते’, ’कथाक्रम’ में ’राग तन्तरानी’ और ’लमही’ में ’कथा प्रान्तर’ का लेखन।

व्यंग्य संग्रह: ’प्रीति न करियो कोय’, ’मो सम कौन’ और ’नारद की चिन्ता’,मालिश महापुराण आदि

कविता संग्रह: ’बागन बागन कहै चिरैया’, ’एका’।

अवसान -17 मार्च 2018

बीमारी, तीमारदारी, दुनियादारी

बीमारी, तीमारदारी, दुनियादारी

मीडियावाला.इन।  सुशील सिद्धार्थ बीमारियाँ जीवन दर्शन के वृक्ष की शाखाएँ हैं। किसी भी शाखा में लटक जाइए किसी न किसी ज्ञान में अटक जाएँगे। बीमार शब्द ही अद्भुत है। अस्वस्थ कहने से हाय हाय के कैनवास पर मुर्दनी, बदहाली, तबाही...

कुछ बात है कि गाली मिटती नहीं हमारी

कुछ बात है कि गाली मिटती नहीं हमारी

मीडियावाला.इन। कुछ दिन पहले  तेरह साल के एक बच्चे की प्रतिभा जान कर मैं खुशी से बेजान सा हो गया।इस बच्चे नेपरीक्षा में कम नंबर आने पर अपने ही अपहरण की सफल योजना बनाई थी।पुलिस की मूर्खता सेयोजना असफल हो ...

व्यंग्य - कद की कवायद

व्यंग्य - कद की कवायद

मीडियावाला.इन। व्यंग्य विधा के जाने-माने साहित्यकार स्व. सुशील सिद्धार्थ  आज होते तो वे इस टीम का हिस्सा होते, अफ़सोस पोर्टल शुरू होने के पहले ही वे असमय चले गए | सुशील सिद्धार्थ का जाना दुखद, बेहद दुखद। अविश्वसनीय...