Monday, October 14, 2019

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विजय मनोहर तिवारी

मध्यप्रदेश में सागर जिले के मंडी बामौरा नाम के कस्बे में पैदा हुए। स्कूली पढ़ाई मंडी बामौरा और शिवपुरी में की। 1991 में विदिशा के एसएसएल जैन पीजी कॉलेज से गणित में फर्स्ट क्लास फर्स्ट एमएससी के बाद एक साल कॉलेज के गणित विभाग में पढ़ाया। लेकिन लिखने का शौक मीडिया में ले लाया। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि के दूसरे बैच के टॉपर हैं। दिल्ली में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग के बाद नईदुनिया इंदौर में रिपोर्टिंग से करिअर की नई शुरुआत। नौ साल प्रिंट में रहने के बाद 2003 में सहारा समय न्यूज चैनल में आए। 2006 में प्रिंट में वापसी दैनिक भास्कर भोपाल के पॉलिटिकल ब्यूरो से। 2010 में दैनिक भास्कर के नेशनल न्यूजरूम में ऑल इंडिया रिपोर्टिंग के लिए चुने गए।

फिर 2015 तक अलग-अलग विषय पर रिपोर्टिंग के लिए पांच साल में लगातार भारत के कोने-कोने की आठ यात्राएं। टीवी और प्रिंट में बीस साल की रिपोर्टिंग के दौरान ऐसे विषयों पर हमेशा पैनी निगाह रही, जिन्हें पांच सौ या हजार शब्दों की खबरों से ज्यादा अहमियत की दरकार थी। यहीं से स्थाई लेखन ने अलग जगह बनाई और छपकर आईं छह किताबें आईं। ये किताबें पत्रकारों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए गौरतलब दस्तावेज हैं।

अब तक छपी किताबें- 2001 में पहली किताब-प्रिय पाकिस्तान छपी। यह ऐसे आलेखों का संग्रह है, जो छपे हैं, जो नहीं छपे हैं और जो कहीं छप नहीं सकते थे। टीवी में इंदिरा सागर बांध में डूबे हरसूद शहर की लाइव रिपोर्टिंग पर 20005 में प्रकाशित चर्चित किताब-हरसूद 30 जून-को भारतेंदु हरिश्चंद्र अवार्ड मिला। एनएसडी ने इस पर नाटक लिखा। मशहूर कथाकार कमलेश्वर ने इस किताब से प्रेरित होकर एक कहानी लिखी, जिसमें विजय मनोहर तिवारी को ही एक किरदार बनाया।

2008 में समकालीन राजनीति पर दिलचस्प उपन्यास-एक साध्वी की सत्ता कथा प्रकाशित। 2010 में वरिष्ठ पत्रकार राहुल बारपुते पर एक मोनोग्राफ लिखा। इसी साल अदालत से भोपाल गैस हादसे का फैसला आने पर लिखी-आधी रात का सच। पांच साल तक भारत भर की लगातार यात्राओं पर 2016 में छपी-भारत की खोज में मेरे पांच साल। भोपाल के भारत भवन में इस किताब का लोकार्पण करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा-यह किताब प्रामाणिक पत्रकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें सच को सच की तरह सामने लाया गया है। यह किताब इक्कीसवीं सदी के भारत को हर रंग-रूप और हर माहौल-मूड में सामने लाती है। इंदौर लिटरेचर फेस्टीवल-2016 में यह यात्रा वृत्तांत चर्चित रहा, जहां तारेक फतेह, अमीश त्रिपाठी और कुमार विश्वास जैसी जानी-मानी हस्तियो ने शिरकत की। पत्रकारिता के कई अवार्ड मिले हैं। सभी किताबों की देश के मीडिया में चर्चा, समीक्षाएं हुईं हैं।

पुरस्कार: हरसूद 30 जून के लिए राष्ट्रीय भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान और यात्रा वृत्तांत के लिए मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार। इसके अलावा श्रेष्ठ रिपोर्टिंग के कई पुरस्कार।

ब्रजेश राजपूत की पिछली किताब

ब्रजेश राजपूत की पिछली किताब

मीडियावाला.इन। भोपाल में एबीपी न्यूज के संवाददाता ब्रजेश राजपूत ने अपनी अगली किताब के आने की सूचना आज दी तो किश्तों में पढ़ी पिछली किताब को पूरा करने आज बैठा-"ऑफ द स्क्रीन।' यह 75 कहानियाें का संग्रह है। एक...

रन भोजपाल रन

रन भोजपाल रन

मीडियावाला.इन। यह राज की बातें हैं। राजदारों की बातें हैं। राजधानी की बातें हैं। राजधानी एक तरह से एक रंगमंच है, जहां अदाकारी की स्पर्धा है। एक मैदान है, जहां खिलाड़ियों को मौके हैं। भोपाल में इन दिनों एक...

हनीट्रैप और रसूखदार

हनीट्रैप और रसूखदार

मीडियावाला.इन। स्केंडल सिर्फ महिलाओं को उजागर करते हैं उन भेड़िए लार टपकाते हुए पुरुषों को नहीं जिन्होंने दुनिया के सबसे पुराने धंधों में से एक वेश्यावृत्ति की नींव रखी। इस कांड में क्या सिर्फ महत्वाकांक्षी महिलाएं जिम्मेदार हैं...

11 घरों के सपनों का जनाजा

11 घरों के सपनों का जनाजा

मीडियावाला.इन। भोपाल में हुए हादसे पर लेखक विजय मनोहर तिवारी की अखबारी कवरेज और कलेक्टर के आत्मज्ञान पर एक गौरतलब टिप्पणी- भोपाल में शुक्रवार की सुबह अखबार आने के पहले मोबाइल पर बहुत विस्तार से पता चल चुका...

हुसैन सागर में गणपति

हुसैन सागर में गणपति

मीडियावाला.इन।प्रथम वंदनीय मंगलमूर्ति गजानन देवलोक में बहुत थके-हार से लौटे। इमाम हुसैन उन्हें देख दौड़कर निकट आए। एक हाथ बढ़ाया तो गणपति ने मुस्कुराकर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया। हुसैन एक घने वृक्ष की छाया में आदर से...

दो जज, दो फैसले

दो जज, दो फैसले

मध्यप्रदेश की दो महिला जज पिछले हफ्ते अपने दो तेज रफ्तार फैसलों के कारण चर्चा में आईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में भी इनका जिक्र किया। ये हैं 2003 बैच की निशा गुप्ता, जो मंदसौर...

राजनीति के देवानंद

राजनीति के देवानंद

अटलजी भारतीय राजनीति के देवानंद थे, जिनकी छवि फूलों के रंग से दिल की कलम से रची रांगोली थी। हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली। जिंदगी का साथ निभाने वाली। वे शोखियों में घोले गए फूलों का...

राम नाम के पुनियानी

राम नाम के पुनियानी

कल राम पुनियानी को सुनने का मौका मिला। उनके बारे में बहुत सुना था। यू-ट्यूब पर कुछ लेक्चर भी सुने थे। मगर रूबरू सुनने का यह पहला मौका था। बारिश के बावजूद हर उम्र के लोग उन्हें सुनने...

सपाक्स से उपजे सवाल

बहुत साल पहले इंदौर के एक मुखर कर्मचारी नेता शिवाकांत वाजपेयी अक्सर मीडिया में एक सवाल उठाया करते थे। जब कभी कोई नेता या उसके परिवार के लोग बीमार होकर मुंबई, दिल्ली या विदेश जाकर इलाज कराते, वाजपेयी...

दाल में काला

मीडियावाला.इन। मैं रजनीकांत का फैन नहीं हूं मगर उनकी फिल्में देख लेता हूं। खासकर हिंदी में डब। उसमें रजनीकांत की आयातित आवाज रजनी के आक्रामक किरदार काे और असरदार बनाती है-कूल SSSS। मगर काला नाम की फिल्म दाल...

प्रणब मुखर्जी ने मंदिर वहीं बनाया

प्रणब मुखर्जी ने मंदिर वहीं बनाया

मीडियावाला.इन। क्या आपको पता है कि प्रणब मुखर्जी ने एक ऐसे प्राचीन जीर्णशीर्ण मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था, जिसकी तुलना बीरभूम और बोलपुर के इलाके के लोग सरदार वल्लभ भाई पटेल के साेमनाथ मंदिर निर्माण से करते हैं। प्रणब...

कालसर्प की शांति त्रयम्बकेश्वर में ही क्यों?

कालसर्प की शांति त्रयम्बकेश्वर में ही क्यों?

मीडियावाला.इन। पंडित विष्णु और पंडित शिवाकांत चार भाई हैं। ये दोनों यहीं हैं। शिवाकांत छोटे हैं मगर त्रयंबकेश्वर में वे पहले से हैं। दोनों ही महर्षि महेश योगी की उन विद्यापीठों से निकले हैं, जिनमें प्रवेश के...

एक मस्जिद में रामनवमी का जलसा

एक मस्जिद में रामनवमी का जलसा

मीडियावाला.इन। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी मस्जिद में कभी रामनवमी का जबर्दस्त जलसा मनाया जाए। इसी रौनक में अगले दिन गोकुल उत्सव भी जुड़ जाए। सुसज्जित चंदन की थालियों की शोभायात्रा गलियों से निकलकर...

सरदार सरोवर का सार संक्षेप

मेधा पाटकर को आखिर क्या चाहिए? तीन दशकों से यह औरत सड़कों पर है। हरसूद में 1989 की रैली के समय पहली बार मेधा का नाम देश के स्तर पर सुना गया था। वे इंदिरा सागर बांध की डूब...

भाग-2 - संघ को खूब कोसिए, बिल्कुल मत छोड़िए

1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो देश के सारे विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनसे किसी भी रूप में जुड़े बेकसूर लोगों को भी जेलों में ठूंस दिया गया था। हर जेलों में आरएसएस के लोग...

एक कपूत, कायर प्रेमी और भगोड़ा पति

एक अनारकली मर गई। अकबर ने उसे दीवार में नहीं चुनवाया। धोखेबाज साला सलीम ही निकला। अब वह किस बादशाह से भिड़ती। बेचारी खुद ही चल बसी। प्रीति के मामले में साहब, पद्मिनी की किस्मत में राणा रतनसिंह की...

समाचार या अत्याचार

किसी भी अच्छे-भले आदमी की मौत एक दुखद खबर है। अगर वो राजनीति, सिनेमा या क्रिकेट की कोई जानी-मानी शख्सियत हो तो खबर बड़ी होगी। हालांकि सरहद पर दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हुए फौजी की खबर उतनी बड़ी...

पहला भाग - बीजेपी का जश्न और संघ की साधना

पहला भाग - बीजेपी का जश्न और संघ की साधना

असम के बाद त्रिपुरा में बीजेपी के बहुमत की सरकार। नगालैंड में शानदार बढ़त। मेघालय में बराबर की टक्कर। उत्तर-पूर्व के पहाड़ों पर बीजेपी का परचम फहराया है तो बेशक सियासी तौर पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह...

मेरे देश के दो बड़े स्पीडब्रेकर

दो बेडरूम के फ्लैट में चार सदस्य बढ़कर चालीस हो जाएं तो उस घर की दशा क्या होगी? अकेली टेक्नोलॉजी के बूते पर ऐसे घर की कितनी समस्याओं के हल हो सकेंगे जबकि घर में लोग लगातार बढ़ ही रहे...

कहानी हेमंत और प्रिंशु की

मध्यप्रदेश से उपजी यह एक दिलचस्प स्टोरी है। इसमें प्यार के ड्रामे भी हैं। सेक्स का तड़का है। बेहिसाब पैसा है। सत्ता का नशा है। महत्वाकांक्षा का बुखार है। इश्क है। तड़प है। वादे हैं। खुशनुमा जिंदगी हर तरह...