Monday, August 26, 2019

कॉलम / नजरिया

तथ्यों और कल्पनाओं का घालमेल

तथ्यों और कल्पनाओं का घालमेल

द ताशकंद फाइल्स का डायलॉग है - ट्रूथ इज़ ए लग्ज़री। फिल्म यह लग्जरी बर्दाश्त नहीं कर पाई। दूसरे डायलाॅग भी कम दिलचस्प नहीं है। जैसे टीवी के सामने बोलने के लिए नहीं, चुप रहने के लिए...

अब जमीन पर आ जाओ प्यारे

अब जमीन पर आ जाओ प्यारे

हां तो हो गई ना वोटिंग। अंगुली पर नीले निशाने वाले फोटो डाल दिए फेसबुक पर। बता दिया ना कि कितने जिम्मेदार नागरिक हो। वाट्सएप के फैमिली ग्रुप में भी फोटो दौड़ा दिए ना। फिर क्या बाकी रह...

स्मृतिशेष:एक कहकहे का अवसान

स्मृतिशेष:एक कहकहे का अवसान

मीडियावाला.इन। अमेरिका में आज शाम जब फेसबुक खोली तो एक मनहूस खबर मिली की हास्य सम्राट प्रदीप चौबे हमारे बीच नहीं रहे .प्रदीप चौबे के अचानक जाने की खबर मेरे लिए किसी वज्रपात   से कम नहीं हैं .इस खबर से...

मोदी पर तीन-तीन मुसीबतें

मोदी पर तीन-तीन मुसीबतें

मीडियावाला. इन   मोदी सरकार पर तीन-तीन मुसीबतें एक साथ आन पड़ी हैं। रफाल-सौदा, फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ और ‘नमो टीवी’-- इन तीनों पर सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग की गाज़ गिरी है। रफाल-सौदे पर छपे गोपनीय दस्तावेजों पर...

अब आ गया बायोपिक फिल्मों का ट्रेंड!

अब आ गया बायोपिक फिल्मों का ट्रेंड!

मीडियावाला.इन। फिल्मी दुनिया का अपना चलन है। यहाँ जब भी कोई आइडिया हिट होता है, सभी फिल्म बनाने वाले वही चाल चलने लगते हैं। वास्तव में तो ये भेड़ चाल है, लेकिन हिट आइडिये को कोई छोड़ना नहीं चाहता। ख़ास...

आखिर खुल ही गई 'ताई' के पल्लू से इंदौर की चाभी!

आखिर खुल ही गई 'ताई' के पल्लू से इंदौर की चाभी!

मीडियावाला.इन। ये आशंका सही साबित हुई कि भारतीय जनता पार्टी ने इस बार इंदौर लोकसभा सीट से सुमित्रा महाजन 'ताई' को उम्मीदवार नहीं बनाएगी! पार्टी ने ये फैसला काफी पहले कर लिया था! इस राज को...

इमरान खान का मोदी - प्रेम

इमरान खान का मोदी - प्रेम

मीडियावाला.इन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का एक बड़ा मजेदार बयान अखबारों में छपा है। उनका कहना है कि यदि नरेंद्र मोदी की जीत हो गई और वे प्रधानमंत्री बन गए तो कश्मीर का मसला हल हो सकता है। एक...

राजनीति की नौटंकी

राजनीति की नौटंकी

मीडियावाला.इन।             एक ऐसा अधिकारी होने के नाते जिसने मध्य प्रदेश पुलिस और CRPF दोनों में काम किया है, मुझे कल यह देखकर बड़ा दुख हुआ कि ये दोनों बल इनकम टैक्स रेड के समय झड़प की स्थिति में...

मुद्दे बालाकोट और बहत्तर हजार ही क्यों, किसानी क्यों नहीं?

मुद्दे बालाकोट और बहत्तर हजार ही क्यों, किसानी क्यों नहीं?

अपने देश-प्रदेश ने पिछले दो-ढाई साल में,चार पांच तो बड़े-बड़े और कई छोटे-मोटे स्थानीय किसान आंदोलन देखे हैं.ये आंदोलन इतने प्रभावी तो थे ही,कि पूरे देश का ध्यान उन पर गया था. मध्यप्रदेश के मंदसौर में गोली चली,जानें...

सोशल मीडिया है या शौचालय ?

सोशल मीडिया है या शौचालय ?

मीडियावाला.इन जब से सोशल मीडिया अस्तित्व में आया है, इस पर चलने वाली बहस में पक्ष-विपक्ष जो आरोप-प्रत्यारोप करता है, वह लगातार मयार्दाहीन होता जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे सोशल मीडिया अपनी वैचारिक गंदगी विर्सजन की जगह हो...

सुमित्रा जी जैसा कोई और नहीं

सुमित्रा जी जैसा कोई और नहीं

मीडियावाला.इन भाजपा की नेता और भारत की लोकसभा-अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने घोषणा की है कि वे इस बार संसद का चुनाव नहीं लड़ेंगी। मप्र के भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में उनका नाम नहीं था। उन्होंने अपनी बेइज्जती का इंतजार...

पहले मैं, फिर पार्टी, फिर देश !

पहले मैं, फिर पार्टी, फिर देश !

भाजपा के बुजुर्ग नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लाॅग में अपना मुंह खोलने की कोशिश की है। जब मोदी-राज शुरु हुआ था तब उन्होंने थोड़ी हिम्मत की थी और कहा था कि भारत में आपात्काल जैसे हालात...

घोषणापत्र बनाम रिश्वतनामा

घोषणापत्र बनाम रिश्वतनामा

मीडियावाला.इन  आजकल घोषणापत्रों की खूब चर्चा है,खासकर कांग्रेस के घोषणापत्र की।कांग्रेस की तमाम घोषणाओं से प्रतिद्वंदियों में हड़कंप है।मुझे लगता है कि आज की सियासत में घोषणापत्र सत्ता संघर्ष का सबसे धारदार औजार हो सकता है लेकिन राजनीतिक दलों...

इससे अच्छी विदाई की हकदार थी ताई

इससे अच्छी विदाई की हकदार थी ताई

मीडियावाला.इन। सुमित्रा महाजन के चुनाव लडऩे से इनकार के साथ ही इंदौर की सियासत का एक बड़ा अध्याय पूरा हो गया। आठ लोकसभा चुनाव से वे इंदौर का चेहरा रही हैं। 38 वर्ष से भी अधिक लंबी पारी...

घोषणा-पत्र अच्छा है लेकिन......

घोषणा-पत्र अच्छा है लेकिन......

मीडियावाला.इन कांग्रेस पार्टी का चुनावी घोषणा-पत्र यदि पढ़ें तो ऐसा लगता है कि यदि उसकी सरकार बन गई तो भारत के ‘अच्छे-दिन’ शुरु हो जाएंगे लेकिन डर यही है कि जैसे ‘अच्छे दिन’ वर्तमान सरकार लाई है, क्या वैसे ही...

इसमें ‘भयंकर’, ‘भयंकर’ क्या है ?

इसमें ‘भयंकर’, ‘भयंकर’ क्या है ?

मीडियावाला.इन। कांग्रेस के चुनाव घोषणा-पत्र पर आज मैं अपनी प्रतिक्रिया देना चाहता था लेकिन हमारे उपग्रहभेदी प्रक्षेपास्त्र पर अमेरिका ने एक नई बहस छेड़ दी है। यह बहस कुछ ऐसी ही है, जैसे हमारी फौज के बालाकोट हमले पर...

कलाकारों पर आश्रित होती सियासत

कलाकारों पर आश्रित होती सियासत

मीडियावाला.इन भारत की सियासत को घुन लगने लगी है.किसी भी राजनितिक दल के पास आज की तारीख में कोई ऐसा नेता नहीं है जिसे सर्वमान्य रूप से देश अपना 'हीरो' स्वीकार कर ले .हालात ऐसे बन गए हैं की अब...

भाजपा के कितने टिकिट कटेंगे और कितने बचेंगे?

भाजपा के कितने टिकिट कटेंगे और कितने बचेंगे?

मीडियावाला.इन।  भाजपा को यदि मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करना है, तो उसे आरएसएस की सर्वे रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसा कि उसने विधानसभा चुनाव के समय किया था! ऐसा किया गया...

जिगर की आग से कैसे जलाएं बीड़ी

जिगर की आग से कैसे जलाएं बीड़ी

जिस सीने पर हाथ रखता हूं, झुलस उठता हूं। लगता है, अंदर शोले धधक रहे हैं। हर सांस, हर धडक़न के साथ तपीश बढ़ती जाती है। लपटें और ऊंची होती जाती हैं। बेचैनी उग्र हो रही है। छटपटाहट...

'नरवई'की आग नीति से नहीं अच्छी नीयत से बुझेगी

'नरवई'की आग नीति से नहीं अच्छी नीयत से बुझेगी

मीडियावाला.इन। अनिश्चितताओं के,दुनिया में जितने भी खेल होते होंगे,या विरोधाभासों के जितने भी मुहावरे सभी भाषाओँ में होंगे,वे सब भारत की खेती-बाड़ी पर लागू होते हैं.सांप,छछूंदर,नेवले,कुँओं-खाइयों आदि वाले सारे मुहावरों का सच या सांप-सीढ़ी के खेल की अनिश्चितता आदि सब...