Thursday, September 19, 2019

कॉलम / नजरिया

कांग्रेस की ‘कंगाली’ और दांत खुरच कर पेट भरने की मजबूरी ! 

कांग्रेस की ‘कंगाली’ और दांत खुरच कर पेट भरने की मजबूरी ! 

मीडियावाला.इन। अगर धन और संसाधनों को चुनाव जीतने का जरूरी फैक्टर माना जाए तो अंदाजा लगा लीजिए ‍कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत की  संभावनाएं क्या हैं? कारण कांग्रेस के राजनीतिक दावे कुछ भी...

'अन्न-स्वराज'की हानि तो 'जीवन की हानि'है

'अन्न-स्वराज'की हानि तो 'जीवन की हानि'है

मीडियावाला.इन। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में अभी-अभी,6 अक्टूबर से गांधी जी की 150 वीं जयंती की शुरुवात में 'स्वराज-यात्रा'निकाली गई.जिले के यशस्वी पूर्वज स्व.माखनलालजी चतुर्वेदी की जन्मस्थली से निकली यह यात्रा,स्व.भवानी प्रसादजी मिश्र,स्व.डॉ.आर एच रिछारिया,स्व.हरिशंकर परसाई और...

राज टॉवर से लेकर मनी सेंटर तक सरकार बदली, ढर्रा नहीं बदला

राज टॉवर से लेकर मनी सेंटर तक सरकार बदली, ढर्रा नहीं बदला

मीडियावाला.इन। विकास प्राधिकरण ने रविवार को नगर निगम के सहयोग से बड़े साहस का काम किया, कोर्ट ने रणजीत हनुमान के समीप नाले की जमीन पर बने 52 दुकानों वाले व्यावसायिक मनी सेंटर की दुकानों का कब्जा लेने...

भारत-मुकुट थे डाॅ. लोहिया

भारत-मुकुट थे डाॅ. लोहिया

12 अक्तूबर को डाॅ. राममनोहर लोहिया की 51 वीं पुण्य-तिथि थी। 1967 में जब दिल्ली के विलिंगडन अस्पताल में वे बीमार थे, मैं वहां रोजाना जाया करता था। उन्हें देखने के लिए जयप्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी, जाकिर हुसैन,...

‘माइकल’ से ‘मी-2’ तक, दिल का हाल बेहाल है

‘माइकल’ से ‘मी-2’ तक, दिल का हाल बेहाल है

सप्ताह दिल के मरीजों के लिए शुभ साबित नहीं हुआ। अमेरिका में आए ‘माइकल’ तूफान ने भले ही जनहानि पर रहम किया हो लेकिन जिस तरह से उसने जनता की आर्थिक कमर तोड़ी है, उससे उबरना अमेरिकी प्रभावितों...

ताई फिर मैदान में आई, भाई की परेशानी बढ़ाई

ताई फिर मैदान में आई, भाई की परेशानी बढ़ाई

मीडियावाला.इन।  दादा इतने भी दयालु नहीं कि आकाश के लिए अपना जमाजमाया मैदान छोड़ दें   भाजपा की स्थानीय राजनीति में ताई की सक्रियता ने फिर चौंका दिया है, जैसे आठवीं बार टिकट...

पैरों में चप्पल तो थी ना ! 

पैरों में चप्पल तो थी ना ! 

सुबह एक धमाका और उस धमाके पर मीटू का फिर दूसरा, तीसरा धमाका। इस #मीटू के चलते मुझे अपने  तत्कालीन समूह संपादक कल्पेश याग्निक की याद आ रही है, जिन्होंने मर जाना अधिक आसान समझा। हैशटेग मीटू की...

अब कमलनाथ क्या करेंगे? 

अब कमलनाथ क्या करेंगे? 

सौ टके का सवाल है, अब कमलनाथ क्या करेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची को लेकर उनकी वह मांग सिरे से खारिज कर दी है, जिसे मान लिए जाने की सूरत में कांग्रेस का यह दावा मजबूत हो...

गंगाभक्त स्वामी सानंद का बलिदान

गंगाभक्त स्वामी सानंद का बलिदान

मीडियावाला.इन। गंगाभक्त स्वामी सानंद (प्रो. जी.डी. अग्रवाल) का कल अनशन करते हुए निधन हो गया। वे 111 दिन से अनशन पर थे। उनकी आयु 86 वर्ष थी। उनके निधन को क्या कहें? बलिदान, मृत्यु या हत्या ? उसे...

फिर भी जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

फिर भी जलती रहेगी लोहिया के विचारों की मशाल

राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। आज देश लगभग कांग्रेस मुक्त...

रेफल-सौदाः गले की चट्टान

रेफल-सौदाः गले की चट्टान

सर्वोच्च न्यायालय ने रेफल-सौदे पर उंगली उठा दी है। उसने सरकार से यह पूछा है कि वह उसे सिर्फ यह बताए कि इन रेफल विमानों की खरीद का फैसला कैसे किया गया है ? अदालत को इससे मतलब...

क्योंकि नदी को मौत नहीं आती

क्योंकि नदी को मौत नहीं आती

यह उसकी नियती है या विवशता कि रोज मरकर भी नदी को मौत नहीं आती। न जाने कौन सी उम्मीद हर बूंद में बांध रखी है, जो उसे जिलाए रखती है। जिंदगी और मौत दोनों उसके आंचल में...

स्कूली मासूमों को हिंदू-मुस्लिम में बांटकर कौन सा देश बना रहे हैं?

स्कूली मासूमों को हिंदू-मुस्लिम में बांटकर कौन सा देश बना रहे हैं?

ने की वह खबर पूरे देश को स्तब्ध और क्रुद्ध करने वाली थी। क्योंकि वह देश की राजधानी नई दिल्ली से आई थी। जो खुलासा हुआ, उससे मन में यही सवाल उठा ‍कि देश में यह हो क्या...

बलात्कारः भारत कैसे बचे ?

बलात्कारः भारत कैसे बचे ?

अमेरिका में चले मी टू (मैं भी) अभियान की तरह महिलाओं का अभियान अब भारत में भी चल पड़ा है। अब कई महिलाएं खुलकर बता रही हैं कि किस अभिनेता या किस संपादक या किस अफसर ने कब...

राफेल पर कुछ धीरज धरे कांग्रेस

राफेल पर कुछ धीरज धरे कांग्रेस

सुदूर किसी समुद्री इलाके में सैलानी के तौर पर जाइए। एक न एक जगह आपको समुद्र के बीचों-बीच ले जाकर किसी दुर्लभतम जलीय जीव को दिखाने का वादा किया जाता है। इसकी भारी कीमत ली जाती है। चतुरसुजान...

मीडिया द्वारा आलोचना को ‘देशद्रोह’ बताने की यह कैसी सोच?

मीडिया द्वारा आलोचना को ‘देशद्रोह’ बताने की यह कैसी सोच?

क्या राज्यपाल या राजभवन के खिलाफ लिखना अथवा आलोचना करना देशद्रोह है? क्या देशद्रोह की धारा अभिव्यक्ति की आजादी से बड़ी है? ये सवाल फिर इसलिए उठे हैं कि तमिलनाडु में वहां के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के खिलाफ...

पैदल पत्रकारिता वाला दीवाना संपादक 

पैदल पत्रकारिता वाला दीवाना संपादक 

इंदौर कीर्ति राणा।शहर की फुटपाथ पर पैदल सड़क नापते एक दीवाने संपादक को देखा जा सकता है। पहले लूना पर चला करते थे, वह भी कब तक साथ देती, अब सालों से पैदल हैं। सफेदी झलकाती दाढ़ी, बेतरतीब से...

क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा

क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा

ये उर्दू का एक नानवेजी मुहावरा है। पिद्दी एक छोटी से चिढ़िया होती है। और इस मुहावरे का संदर्भ यह होता है कि किसी तुच्छ या अर्थहीन बात की जा रही हो तो उसे आगे बढ़ने से रोकने...

सत्ता के लिए झूठे वादों को आईना दिखाते गडकरी के बोल !

सत्ता के लिए झूठे वादों को आईना दिखाते गडकरी के बोल !

राजनीति में सच बयानी भी हिम्मत का काम है। केन्द्रीय परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ऐसी ही शख्‍सियत हैं। उनके एक ताजा बयान पर कई लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया तो कांग्रेस अध्यक्ष...

जिसने पाप ना किया हो, जो पापी ना हो....

जिसने पाप ना किया हो, जो पापी ना हो....

ये किस्सा बिल्कुल रंगे सियार जैसा है। रंगा सियार एक बार जंगल का राजा तो बन सकता है लेकिन अपनी पहचान भला कौन, कब और कहां तक छिपा सकता है? दुर्गति की शिकार कांग्रेस के हाल भी कुछ...