Monday, August 26, 2019

कॉलम / नजरिया

सर्जिकल या फर्जीकल स्ट्राइक ?

सर्जिकल या फर्जीकल स्ट्राइक ?

मीडियावाला.इन। सरकार कितनी नौटंकीप्रिय है ? दो साल पहले हुई तथाकथित सर्जिकल स्ट्राइक की वह दूसरी जयंति मना रही है ? कोई उससे यह पूछे कि उसकी पहली जयंति का क्या हुआ ? पिछले साल सितंबर में वह उसकी...

ये है गांधीगिरी का चमत्कार !

ये है गांधीगिरी का चमत्कार !

बाजार में अफीम की भाजी तो आ नहीं रही मतलब इसकी फसल का सीजन नहीं है।फिर ये मंदसौर में कौनसी नशीली हवा चल पड़ी कि शासकीय पीजी कॉलेज के प्राध्यापक दिनेश गुप्ता के डील में बापू की सवारी आ...

वह बपौती नहीं है

वह बपौती नहीं है

मीडियावाला.इन। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने सदियों से स्त्री को गुलाम बनाकर उस पर शासन के दंभ को जी रहे पुरुषवादियों को एक और करारा झटका दिया है। धारा 497 को असंवैधानिक करार देते ही स्त्री पुरुषों...

त्वरित सुनवाई का मतलब जल्दी फैसले की उम्मीद !

त्वरित सुनवाई का मतलब जल्दी फैसले की उम्मीद !

मीडियावाला.इन। सर्वोच्च न्यायालय ने मस्जिद में नमाज को लेकर जो फैसला दिया है, उसके राजनीतिक निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। चुनाव पास हैं इसलिए और अतिसंवेदनशील मुद्दा होने से भी इसे लेकर वैचारिक कसरतें चल रही हैं। दरअसल...

जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस साँच कहै ता

जा पर विपदा परत है ते आवहिं एहि देस साँच कहै ता

चित्रकूट की महिमा को लेकर एक दोहा मशहूर है-  चित्रकूट मा बसि रहें रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा परत है ते आवत एंहि देश।। कांग्रेस विपदा में है। मध्यप्रदेश में तीन पंचवर्षी...

पढ़ाना अपराध है, आइये नारे लगाते हैं, क्योंकि यही देशभक्ति है 

पढ़ाना अपराध है, आइये नारे लगाते हैं, क्योंकि यही देशभक्ति है 

मंदसौर कॉलेज में कुछ लोग घुसते हैं। कक्षाओं के दौरान नारेबाजी करते हैं। विद्यार्थियों को पढ़ा रहे एक प्रोफेसर शोर न करने का आग्रह करते हैं तो पूरी भीड़ उन्हें प्रताडि़त करने लगती है। उन पर राष्ट्रद्रोह का...

क्या सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों में बदलते समाज की आहट है?

क्या सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों में बदलते समाज की आहट है?

वर्ष 2018 का सितंबर माह इतिहास में  दो ऐसे ‘क्रांितकारी’ फैसलों के लिए जाना जाएगा, जो पूरे भारतीय समाज के बदलाव की बुनियाद बन सकते हैं। बनेंगे। हालांकि इन संवेदनशील मसलों और मान्यताअों पर देश की सर्वोच्च अदालत...

पढ़ाना अपराध है, आइये नारे लगाते हैं, क्योंकि यही देशभक्ति है

पढ़ाना अपराध है, आइये नारे लगाते हैं, क्योंकि यही देशभक्ति है

मीडियावाला.इन। मंदसौर कॉलेज में कुछ लोग घुसते हैं। कक्षाओं के दौरान नारेबाजी करते हैं। विद्यार्थियों को पढ़ा रहे एक प्रोफेसर शोर न करने का आग्रह करते हैं तो पूरी भीड़ उन्हें प्रताडि़त करने लगती है। उन पर राष्ट्रद्रोह...

क्या बीजेपी का एक धड़ा व्यापम मुद्दे को जिंदा रखना चाहता है?

क्या बीजेपी का एक धड़ा व्यापम मुद्दे को जिंदा रखना चाहता है?

मीडियावाला.इन। बुधवार को भोपाल की एक अदालत द्वारा पुलिस को दिया गया निर्देश अब तक पूरे देश में खबर बन चुका है!अदालत ने कांग्रेस के तीन प्रमुख़ नेताओं- कमलनाथ,दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ केस दर्ज करने तथा...

कैमरों को अदालत में क्या देखने को मिलेगा

कैमरों को अदालत में क्या देखने को मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्रवाई का सीधा प्रसारण करने की इजाजत दे दी है। तब से सोच में डूबा हूं कि इन कैमरों को अदालत में क्या देखने को मिलेगा। संसद का सीधा प्रसारण शुरू होने के...

इतना बुरा भी नहीं है शिवराज का चेहरा !

इतना बुरा भी नहीं है शिवराज का चेहरा !

इन चार सालों में मुझे आज तक यह बात पल्ले नहीं पड़ी कि प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज जहां जहां, जब जब आमने-सामने होते हैं पीएमजी की भाव भंगिमा से लगता है वह उन्हें फूटी आंख नहीं सुहाते।सीएम हाउस से...

हुसैन सागर में गणपति

हुसैन सागर में गणपति

मीडियावाला.इन।प्रथम वंदनीय मंगलमूर्ति गजानन देवलोक में बहुत थके-हार से लौटे। इमाम हुसैन उन्हें देख दौड़कर निकट आए। एक हाथ बढ़ाया तो गणपति ने मुस्कुराकर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया। हुसैन एक घने वृक्ष की छाया में आदर से...

प्रेमसुख पुल देगा कितने दुख ?

प्रेमसुख पुल देगा कितने दुख ?

शुक्रवार-शनिवार(21-22 सितंबर) रात की बारिश ने एक बार फिर इंदौर की शहर सरकार को बेनकाब कर दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि उसका भरोसा गड्ढे भरने में है, गड्ढे न हो इसमें नहीं । महज 58 साल...

विमान पर सवार घोड़े

विमान पर सवार घोड़े

एक गांव में एक सेठ रहता था। सेठ बहुत परोपकारी था। खास बात यह थी कि उसने सबकुछ अपनी मेहनत से कमाया था। पैसा कमाने, बचाने और सही जगह लगाने में उसे महारत हासिल थी। सबसे अहम उसकी पारखी...

वो वाकई हिंदी कमेंट्री कला के अनोखे ‘जसदेव’ थे...!

वो वाकई हिंदी कमेंट्री कला के अनोखे ‘जसदेव’ थे...!

कुछ इवेंट उसके साथ चलने और गूंजने  वाली आवाज के साथ दिल-दिमाग में हमेशा के लिए फ्रीज हो जाते हैं। महान हिंदी कमेंटेटर जसदेव सिंह की आवाज और कमेंट्री कला उन्हीं में से एक थी। वो रेडियो युग का...

मायावती और कांग्रेस के रिश्तों में दरार चुनाव में असर दिखाएगी!

मायावती और कांग्रेस के रिश्तों में दरार चुनाव में असर दिखाएगी!

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को जो उम्मीद नहीं थी, वो हो गया। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस से चार महीने से चल रही बातचीत तोड़कर 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। अब उनका एलान...

गुजर गई खुली आंखों से झूठ देखने की झिलमिल रात 

गुजर गई खुली आंखों से झूठ देखने की झिलमिल रात 

सरकारों ने इंट्रेस्ट ही नहीं दिखाया कि कपड़ा मिलें चालू रहें साल में एक दिन इंदौर में हजारों परिवार खुली आंखों से झूठ देखते हैं और आसपास से भी लोग इस झिलमिल करती रात के झूठ में सहभागी...

राजनीति में ‘मामा’ बनना ‘काका’ कहलाने से ज्यादा फायदेमंद क्यों ?

राजनीति में ‘मामा’ बनना ‘काका’ कहलाने से ज्यादा फायदेमंद क्यों ?

भारतीय राजनीति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ही अकेले ‘मामा’ नहीं है, एक और राजनीतिक मामा पश्चिम बंगाल में भी हैं। ये हैं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार के उत्तर बंगाल विकास मंत्री रबीन्द्रनाथ घोष। घोष ने हाल में...

भ्रष्टाचार अब व्यंग नहीं विमर्श का विषय

भ्रष्टाचार अब व्यंग नहीं विमर्श का विषय

शरद जोशी ने कोई पैतीस साल पहले हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे व्यंग्य निबंध रचा था। तब यह व्यंग्य था, लोगों को गुदगुदाने वाला। भ्रष्टाचारियों के सीने में नश्तर की तरह चुभने वाला। अब यह व्यंग्य, व्यंग्य नहीं रहा।...