Tuesday, November 12, 2019

कॉलम / नजरिया

तो वाजपेयी को भुनाने पर आपत्ति क्यों...?

तो वाजपेयी को भुनाने पर आपत्ति क्यों...?

विलियम शेक्सपियर ने लिखा था, भला नाम में क्या रखा है? इस लिहाज से किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिए कि अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद देश में कई योजनाओं तथा स्थानों को उनका नाम देने की...

गुलजार ने बोए थे थ्री इडियट के बीज

गुलजार ने बोए थे थ्री इडियट के बीज

जन्मदिन पर गुलजार को याद करना वैसा ही है, जैसे डिब्बे से कोई पसंदीदा मिठाई निकालकर तश्तरी में सजा लेना। मिठाई खाए या न खाएं ये अलग बात है, उसका सामने होना भी मिठास से भर देता है।...

शिवपुरी का हादसा और शिवराज की सहृदयता

शिवपुरी का हादसा और शिवराज की सहृदयता

मीडियावाला.इन। पंद्रह अगस्त पर जब टीवी पर लगातार देशभक्ति के रिकार्डेड कार्यक्रम दोपहर से जारी थे ऐसे में बेफिक्री ओढ कर शाम को बुलबुल को घुमाने की सोची। घर के पास शौर्य स्मारक के लान पर दौड लगाना...

अटल जी ने कहा था - "मैं अविवाहित हूँ, कुंवारा नहीं''

अटल जी ने कहा था - "मैं अविवाहित हूँ, कुंवारा नहीं''

राजकुमारी कौल से अटल जी के रिश्ते काफी चर्चा  में रहे  अटल बिहारी वाजपेयी केवल कवि और राजनेता ही नहीं थे। वे फिल्मों, अच्छे भोजन, अच्छी मित्रता में भी रूचि रखते थे। कई लोग उन्हें दिलचस्प...

चिता का ये धुआं

चिता का ये धुआं

मैं नहीं जानता प्राण देह से अर्जित ज्ञान और अनुभव का कितना हिस्सा जाते वक्त पार्थिव में छोडक़र जाता है। अगर वह सारे कोष खाली कर देह को अपशिष्ट की तरह छोड़ जाता हो तब भी प्राण के...

 इन ‘हिंदू कोर्टों’ से आखिर किस का भला होना है? 

 इन ‘हिंदू कोर्टों’ से आखिर किस का भला होना है? 

इस खबर के पीछे असली मकसद भले सुर्खियां बटोरना ही हो, लेकिन इसको लेकर कौतुहल जरूर रहा। पता चला कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने देश के 72 वे स्वंतत्रता दिवस पर एक ‘क्रांतिकारी कदम’ उठाते हुए यूपी में...

देशप्रेम की चाशनी में डूबी ‘गोल्ड’

देशप्रेम की चाशनी में डूबी ‘गोल्ड’

सन 2007 में आई चक दे इंडिया और इसी वर्ष आई सूरमा की तरह गोल्ड भी हॉकी के मैदान में खेल की कहानी है। तीनों ही फिल्मों में हॉकी मैच को देशभक्ति से जोड़कर देखा गया। सूरमा संदीप सिंह...

चिता बुझी नहीं कि सक्रिय हो गए शत्रु

चिता बुझी नहीं कि सक्रिय हो गए शत्रु

भले ही हम कहते रहें पर अटलजी चौबीस घंटे भी अजातशत्रु नहीं रह पाए। चिता धधक रही है, राख ठंडी होने से लेकर गंगाजी में प्रभावित होने में अभी काफी वक्त बचे हैं। इस बीच शत्रुओं के तरकश...

राजनीति के देवानंद

राजनीति के देवानंद

अटलजी भारतीय राजनीति के देवानंद थे, जिनकी छवि फूलों के रंग से दिल की कलम से रची रांगोली थी। हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली। जिंदगी का साथ निभाने वाली। वे शोखियों में घोले गए फूलों का...

ऐसे थे अटलजी, दूर की सोचकर कदम उठाने वाले राजनेता

ऐसे थे अटलजी, दूर की सोचकर कदम उठाने वाले राजनेता

अटल जी जिस दौर में प्रधानमंत्री बने, उस समय उनसे बेहतर कोई राजनीतिक शख्सियत नहीं थी। अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों को साथ लेकर चलने की उनके अंदर एक खास कला थी। सभी लोगों को बिठाकर उनसे चर्चा करके निष्कर्ष...

हर साल क्यों नहीं हो सकता विश्व हिन्दी सम्मेलन ?

हर साल क्यों नहीं हो सकता विश्व हिन्दी सम्मेलन ?

मॉरीशस में तीसरी बार 18 से 20 अगस्त तक होगा आयोजन  इस बार 11वां विश्व हिन्दी सम्मेेलन मॉरीशस में होने जा रहा है और यह तीसरा मौका है, जब इस देश को मेजबानी का मौका मिला ।...

अमेरिका में राष्ट्रपति ‘ट्रंप बनाम मीडिया’ वॉर के मायने 

अमेरिका में राष्ट्रपति ‘ट्रंप बनाम मीडिया’ वॉर के मायने 

अमेरिका के इस अनोखे घटनाक्रम को कुछ लोग चाहें तो भारत के आईने में भी देख सकते हैं, हालां‍कि उसकी सीधे तौर पर तुलना सही नहीं होगी। संयुक्त राज्य अमेरिका के 350 सौ अखबारों ने अपनी खबरों को...

जब हम यमदूत का इंतजार करते हैं

जब हम यमदूत का इंतजार करते हैं

जीवन जितनी सहजता से जीया जा सकता है, उतनी ही असहज मृत्यु हो सकती है। खासकर तब जब वह देहरी पर आकर खड़ी हो जाए। न भीतर आए न बाहर जाए। वह द्वार पर खड़ी है, उस भिक्षुक...

ओझल हुआ राजनीति का ध्रुवतारा , अटलजी की सभा के लिए कभी भीड़ नहीं जुटाना पड़ी

ओझल हुआ राजनीति का ध्रुवतारा , अटलजी की सभा के लिए कभी भीड़ नहीं जुटाना पड़ी

जैसे नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी की सभा के लिए महीनों पहले से भीड़ जुटाने की रणनीति पर काम करना पड़ता है ऐसे दिन कभी अटलजी की सभा के लिए नहीं देखना पड़े। अटल जी की सभा यानी सिंहस्थ...

राष्ट्र प्रथम और यही अपना धर्म

राष्ट्र प्रथम और यही अपना धर्म

खानवा के युद्ध में राणा सांगा के हमलों से पस्त बाबर ने अपने जासूसों को आदेश दिया कि यह पता लगाकर बताएं कि दुश्मन (राणा सांगा) की फौज की कमजोर "नस" क्या है? खोज-खबर के बाद जासूसों ने...

प्रधानसेवक का बुनियादी विषयों से दूर भाषण !

प्रधानसेवक का बुनियादी विषयों से दूर भाषण !

मीडियावाला.इन। डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल भारत की स्वाधीनता दिवस पर प्रधान सेवक मोदी जी द्वारा अपने कार्यकाल का अंतिम भाषण लाल  किला की प्राचीर से दिया गया और बहुत भावुक भाषण रहा .उन्होंने जिन बिंदुओं पर जोर...

आजादी की नागपंचमी

आजादी की नागपंचमी

किसी बिल में हाथ डालकर मुद्दों का एक नाग पकड़ लीजिए। उसका मुंह दबाइये और वश में कर लीजिए इस हद तक कि वह पलटकर न आपको पूंछ मारे और न ही दांत गड़ाए। अब इसे पिटारे में...

खजराना में खुद के पैसों से  संचालित कर रहे हैं लायब्रेरी

खजराना में खुद के पैसों से संचालित कर रहे हैं लायब्रेरी

अदब का उजाला फैलाने में लगे हैं कुछ उम्रदराज लोग इन दिनों ‘मुल्क’ फिल्म चर्चा में है और इसकी चर्चा की वजह है भारत का आम मुसलमान।अपने मुल्क के ऐसे ही कुछ आम मुसलमानों से मेरी...

छतरपुर में अंग्रेजी हुकूमत ! ये कैसी आजादी…….

छतरपुर में अंग्रेजी हुकूमत ! ये कैसी आजादी…….

अंग्रेजों को देश छोडे 71 बरस बीत गए हैं। देश आजादी की 72 वीं वर्षगांठ के जश्न में डूबा हुआ है। जश्न के लिए छतरपुर जिला मुख्यालय पर सरकारी स्कूल की छात्राओं के एक गीत पर कलेक्टर ने...

जान से खेलती खेती और बेफिकर बैठे हम

जान से खेलती खेती और बेफिकर बैठे हम

पूरी दुनिया में,शायद हम भारतीय ही,समाज के रूप में अकेले होंगे,जो अपने खुद के तन-मन और धन की जरूरी बातें,अपनी रोजमर्रा की बहस में शामिल नहीं करते.इन पर बात करना पिछड़ापन भी समझा जाता है. हमने,हमारे जनप्रतिनिधियों ने,सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक या...