Monday, September 23, 2019

कॉलम / नजरिया

हिमा के गोल्ड की चमक जाति के कैरेट में नापने वाला देश!

हिमा के गोल्ड की चमक जाति के कैरेट में नापने वाला देश!

ऐसे देश का क्या करें? ऐसा देश जो उपलब्धियों से रोमांचित होने से ज्यादा उसे हासिल करने वाली व्यक्ति की जाति को जानकर संतुष्ट होता है। देश की नई ‘उड़नपरी’ हिमा दास जब फिनलैंड के टेम्पीयर की ठंडी...

केंद्रीय नेतृत्व या शिवराज नेतृत्व - किसके नेतृत्व नाम लड़ा जाएगा मप्र का चुनाव?

केंद्रीय नेतृत्व या शिवराज नेतृत्व - किसके नेतृत्व नाम लड़ा जाएगा मप्र का चुनाव?

मीडियावाला.इन। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गत 4 मई को भोपाल में साफ साफ कहा था कि मध्यप्रदेश में इस बार संगठन चुनाव लड़ेगा लेकिन 14 जुलाई को उज्जैन में उन्होंने शिवराज की तारीफ के पुल बांधते...

बंद तिजोरी है मध्यप्रदेश के 30 लाख नए मतदाता!  

बंद तिजोरी है मध्यप्रदेश के 30 लाख नए मतदाता!  

मीडियावाला.इन।     मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के दांव-पेंच चले जाने लगे हैं। राजनीतिक पार्टियों का सबसे ज्यादा ध्यान उन युवा मतदाताओं पर है, जिनकी...

तुम्‍हारा क्‍या तुम्‍हें तो राह दे देते हैं गड्ढे भी...

तुम्‍हारा क्‍या तुम्‍हें तो राह दे देते हैं गड्ढे भी...

जब जब चुनाव नजदीक आते हैं, करीब करीब हर राजनीतिक दल का कोई न कोई नेता यह बयान जरूर देता है कि वह अमुक इलाके को लंदन, पेरिस, न्‍यूयार्क आदि बना देगा। इन शहरों के नाम लेते वक्‍त संदर्भ...

हार का हाजमोला

हार का हाजमोला

कुछ दिनों पहले एक दोस्त को बाइक सवार बदमाशों ने लूट लिया। बदमाश पीछे से आए, गर्दन पर बड़ी सी कटार टिकाई और पर्स मांग लिया। इन्होंने भी बिना किसी ना-नुकुर के पर्स सुपुर्द कर दिया। इस बीच सामने...

न्यूटन से आगे जाने में हमारी कितनी मदद करेगा ‘न्यूटन्स ट्री’?

न्यूटन से आगे जाने में हमारी कितनी मदद करेगा ‘न्यूटन्स ट्री’?

क्या विज्ञान में भी प्रतीकवाद का वैसा ही महत्व है या होना चाहिए, जैसा कि राजनीति और धर्म में है? अगर है भी तो इससे हासिल क्या होना है? ये सवाल इसलिए कि दुनिया के महान वैज्ञानिक और...

पाखंड के पर्वत जब दरकते हैं बिना शोर ढह जाता है मूल्यों का बाजार...

पाखंड के पर्वत जब दरकते हैं बिना शोर ढह जाता है मूल्यों का बाजार...

मीडियावाला.इन।  मन तो नहीं था इस विषय पर कुछ लिखूं। भय्यूजी की मौत के बाद खामोश रहा, कल्पेश जी की मौत के चौथे दिन तक भी सब्र रखा, लेकिन कल दोपहर से ही उद्वेलित था जब ये पता चला...

इसलिये जरूरी है ई.व्ही.एम.

इसलिये जरूरी है ई.व्ही.एम.

मीडियावाला.इन।  ई.व्ही.एम. को लेकर उठा राजनीतिक बवंडर गुजरात और कर्नाटक चुनाव परिणामों से कुछ शांत हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि जरा उन दिनों को याद कर लिया जाए जब हमारे चुनाव ई.व्ही.एम. से नहीं बल्कि...

हमारी तरक्की ने आम आदमी को सुदृढ़ नहीं बनाया

हमारी तरक्की ने आम आदमी को सुदृढ़ नहीं बनाया

मीडियावाला.इन। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत का एक स्थान ऊपर चले जाना अच्छी खबर भले ही हो, लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं है,  जिसे नई बात कही जा सके। भारतीय अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने की...

अखाड़ा न बने संसद

अखाड़ा न बने संसद

मीडियावाला.इन।  मानसून सत्र को गर्माए रखने के लिए कांग्रेस समेत लगभग समूचे विपक्ष ने अपने-अपने हथियार भांज लिए हैं। गोया, यह आषंका कायम है कि विपक्षी दल संसद को ठप बनाए रखने में ही अपना समय जाया करेंगें।  नतीजतन...

देश के दिल का दर्द देखो, पसीज जाएगा दिल

देश के दिल का दर्द देखो, पसीज जाएगा दिल

70 साल के आजाद भारत की ये तस्वीर झकझोर देने वाली है। ये महज एक तस्वीर या कहानी नहीं है बल्कि हमारे कथित विकास को आईना दिखाने वाली कडवी हकीकत है। देश के दिल मध्यप्रदेश के एक गांव के...

राइट क्लिक माॅब लिंचिंग : क्या इस समाज में इंसानियत के लिए कोई आरक्षण नहीं है...?

राइट क्लिक माॅब लिंचिंग : क्या इस समाज में इंसानियत के लिए कोई आरक्षण नहीं है...?

अब एक इंजीनियर माॅब लिंचिंग ( भीड़ द्वारा हत्या) का निर्मम शिकार बना है। उसका दोष यही था कि वह कि कुछ बच्चों को चाकलेट बांट रहा था। यानी  किसी अनजान व्यक्ति का चाकलेट बांटना भी उसका गला चाक...

संभव के विरुद्ध का ऐसा जुनून...?

संभव के विरुद्ध का ऐसा जुनून...?

मुंशी अमीरअहमद मिनाई का एक शेर है, करीब है यारों रोज-ए-महशर, छुपेगा कुश्तों का खूÞन क्यूंकर जो चुप रहेगी जÞबान-ए- खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का कल्पेश जी के दुखद निधन पर मेरे कुछ लिखने...

हरित-क्रांति में कीड़े पड़े

हरित-क्रांति में कीड़े पड़े

आज जब मैं अपनी यह बात लिख रहा हूँ,तब मुझे हिंदी के वरेण्य और कालजयी पत्रकार स्व.प्रभाष जोशी का लिखा एक वाक्य याद आ रहा है.क्योंकि आज,15 जुलाई को स्व.प्रभाष जी का जन्मदिन है.उन्होंने लिखा था कि भारत...

फिर आप में और भय्यू महाराज में क्या फ़र्क़ रहा!

फिर आप में और भय्यू महाराज में क्या फ़र्क़ रहा!

आदमकद फोटो को इससे क्या मतलब कि बेटियों की आँख से अश्रुधारा बह रही है। पत्नी किस तरह आँसू रोके हुए है। वृद्ध माँ का टूटा भरोसा कैसे क़तरा क़तरा बह रहा है ।रोते हुए भाई कैसे बहनों को...

देखनीय फ़िल्म सूरमा, सब काम छोड़कर देखने जा सकते हैं 

देखनीय फ़िल्म सूरमा, सब काम छोड़कर देखने जा सकते हैं 

मीडियावाला.इन। दो सप्ताह पहले संजय दत्त पर बनी बायोपिक संजू रिलीज़ हुई थी, इस सप्ताह हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन पर बनी बायोपिक सूरमा रिलीज हुई है। दोनों बायोपिक एक दूसरे के विपरीत है। संजू में जहाँ एक नशेड़ी,...

कल्पेशजी, इस तरह जाने का प्रश्न किससे पूछें? 

कल्पेशजी, इस तरह जाने का प्रश्न किससे पूछें? 

मीडियावाला.इन। पत्रकारिता को लेकर समर्पण, जुनून, जज़्बे आदि को न्यूनतम शब्द में परिभाषित किया जाना हो तो कल्पेशजी का नाम लेना ही पर्याप्त है। रिपोर्टर या न्यूज डेस्क की खबर जहाँ समाप्त होती थी, उस खबर पर तब...

समाज को तोड़ने वालों पर तो निगरानी जरूरी है

समाज को तोड़ने वालों पर तो निगरानी जरूरी है

सोशल मीडिया को लेकर चल रही देशव्‍यापी बहस के बीच इसी मुद्दे से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचा है। ममता बैनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा ने सूचना एवं प्रसारण...

मजारों पर दुआ के साथ दवा की पहल और ‘पागल मामा’

मजारों पर दुआ के साथ दवा की पहल और ‘पागल मामा’

मीडियावाला.इन। अगर यह अंधविश्वास और झाड़ फूंक के जंजाल से लोगों को बाहर निकालने और एक प्रामाणिक पद्धति से मनोरोगियों के इलाज की ईमानदार पहल है तो यकीनन स्वागत योग्य है। खबर है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार...

कल्पेशजी, इस तरह जाने का प्रश्न किससे पूछें ?

कल्पेशजी, इस तरह जाने का प्रश्न किससे पूछें ?

मीडियावाला.इन।  पत्रकारिता को लेकर समर्पण, जुनून, जज़्बे आदि को न्यूनतम शब्द में परिभाषित किया जाना हो तो कल्पेशजी का नाम लेना ही पर्याप्त है। रिपोर्टर या न्यूज डेस्क की खबर जहाँ समाप्त होती थी, उस खबर पर तब...