Monday, September 23, 2019

कॉलम / नजरिया

मंदसौर पीड़िता: क्यों नहीं सुलगी आक्रोश की ज्वाला

मंदसौर पीड़िता: क्यों नहीं सुलगी आक्रोश की ज्वाला

मीडियावाला.इन। ताज्जुब है कि भोपाल के बोर्ड आॅफिस चौराहे पर केवल भारी और बेतरतीब यातायात का ही शोर है। दिल्ली सहित प्रसिद्धि पाने के लिहाज से 'हॉट' शहरों में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। महज मंदसौर चीख...

फिल्म समीक्षा - संजू : नायक नहीं, असली खलनायक है

फिल्म समीक्षा - संजू : नायक नहीं, असली खलनायक है

हाथों की लकीरें भी गजब होती हैं - रहती तो मुट्ठी में हैं, पर काबू में नहीं रहती। यह संवाद सोच-समझकर संजू फिल्म में रखा गया होगा। परेश रावल और रणबीर कपूर की शानदार एक्टिंग के लिए यह फिल्म देखी...

रुपए की इज्ज़त का सवाल है बाबा

रुपए की इज्ज़त का सवाल है बाबा

साँच कहै ता...जयराम शुक्ल जब जब रुपया धड़ाम से नीचे गिरता है तो अपने देश के स्वयंभू अर्थशास्त्रियों के बीच हाहाकार मच जाता है। तेजडिय़ों, मंदडिय़ों के चेहरे सूखने लगते हैं। शेयर बाजार में सेनसेक्स और...

कच्छ में उज्जैन की पुनरावृत्ति

कच्छ में उज्जैन की पुनरावृत्ति

देश में भाजपा के अखंड राज का असर आज टीवी के परदे पर देखा तो सिहिर उठा .कच्छ विवि में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता एक प्रोफेसर को न सिर्फ पीट रहे थे बल्कि उन्होंने प्रोफेसर का मुंह...

आइये अपने घर फूंक दें

आइये अपने घर फूंक दें

जिंदगी जीने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन एक राह ऐसी है, जो घर फूंक कर साथ चलने को कहती है। बड़े जोखिम हैं, लेकिन जिंदगी के तमाम उतार-चढ़ाव झेलने के बाद समझ आता है कि यकीनन अगर...

भगवान के मंदिर में राष्ट्राध्यक्ष की गरिमा को कौन बचाएगा?

भगवान के मंदिर में राष्ट्राध्यक्ष की गरिमा को कौन बचाएगा?

हिन्दुओं के एक प्रख्यात और प्रतिष्ठित मंदिर में देश के हिंदू राष्ट्रपति के साथ दुर्व्यवहार हो, इसको लेकर राष्ट्रपति भवन गहरी नाराजी जताए, लेकिन इस पर कोई खास राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल न हो, क्या यह हैरान करने...

नए नए विषयों पर चैनलों का ध्यान क्यों नहीं जाता

नए नए विषयों पर चैनलों का ध्यान क्यों नहीं जाता

हमारे समाज में हर व्यक्ति न तो गहराई से राजनीति समझता है न परदे के पीछे की राजनीति और न परदे पर हर राजनीतिक ख़बर देखने में उसकी दिलचस्पी होती है | ठीक वैसे ही ,जैसे स्पोर्ट्स और...

आपातकाल के बहाने विरोधियों को घेरने में सफल रही भाजपा

आपातकाल के बहाने विरोधियों को घेरने में सफल रही भाजपा

भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह आपातकाल को लेकर पूरे देश में काला दिवस मनाया है, उसके पीछे का यह मकसद बहुत साफ और स्पष्ट है और उसे छिपाने की कोई कोशिश भी नहीं की जा रही है।...

चाटुकारों के झाँसे ने देश को तानाशाही से उबार लिया

चाटुकारों के झाँसे ने देश को तानाशाही से उबार लिया

मीडियावाला.इन। चाटुकारिता भी कभी-कभी इतिहास में सम्मान योग्य बन जाती है। आपातकाल  के उत्तरार्ध में यही हुआ। पूरे देश भर से चाटुकार काँग्रेसियों और गुलाम सरकारी मशीनरी ने इंदिरा गांधी को जब यह फीडबैक दिया...

ये कसौटियां तुम्हारे लिए ही बनी हैं मैसी

ये कसौटियां तुम्हारे लिए ही बनी हैं मैसी

आखिरकार इस वर्ल्ड कप में मैसी ने पहला गोल कर ही दिया। अर्जेंटीना के उस भरोसे को बरकरार रखा कि मैसी के आने के बाद वह कभी ग्रुप स्टेज से बाहर नहीं हुआ है। नाइजीरिया को हराकर अर्जेंटीना...

राकेट की रफ्तार से अति गरीबी से बाहर होते गरीब

राकेट की रफ्तार से अति गरीबी से बाहर होते गरीब

‘अच्छे दिन’ को इतने लुभावने ढंग से पारिभाषित करने वाली इससे अच्छी रिपोर्ट शायद कोई और नहीं हो सकती। गोया हम स्वर्ग की देहरी तक पहुंच ही गए हों। अमेिरकी संस्था ब्रूकिंग्स के ‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ ( भावी विकास)...

तन्वी सेठ का पासपोर्ट और ‘वीजा माता’ का इंसाफ!

तन्वी सेठ का पासपोर्ट और ‘वीजा माता’ का इंसाफ!

अंतरधर्मीय विवाह कर पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले एक युगल के साथ कथित बदतमीजी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से शिकायत के बाद तुरंत पासपोर्ट जारी होने के चर्चित मामले में जो ताजा खुलासे हो रहे हैं,...

क्या पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां शेरसिंह राणा भारत लाया है?

क्या पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां शेरसिंह राणा भारत लाया है?

यदि ऐसा है तो फूलन के हत्यारे का नाम सम्मान से लिया  जायेगा जब से व्हाट्स एप्प नाम का हरे जादू का पिटारा दुनिया में ईजाद हुआ है, तब से नाना प्रकार का ज्ञान, जानकारियां, सूचनायें , चरित्र हत्या, दुष्प्रचार...

'हड़बड़ी' को 'बहुमत' कहने के लिए अभिशप्त हम

'हड़बड़ी' को 'बहुमत' कहने के लिए अभिशप्त हम

म.प्र. की चौदहवीं विधानसभा का मानसून या अंतिम सत्र का अवसान हो चुका है.  हालांकि इसमें होने वाले कामों की सूची बहुत बड़ी थी, और काम सब जरूरी भी थे, लेकिन सत्रावसान की हड़बड़ी देखने लायक थी. इसी हड़बड़ी के...

डेढ़ साल में ही हुए बेदम सरकार के आनंदक

डेढ़ साल में ही हुए बेदम सरकार के आनंदक

नज़दीक आते चुनाव से जब सरकार का तनाव बढ़ा हुआ है तो आनंदक विभाग को कौन पूछे। सरकार ने धूमधाम से नेकी और आनंद की दीवार के साथ प्रदेश में आनंदक केंद्र डेढ़ साल पहले खोले थे, अब...

पूर्व आईएएस महिलाओं को लगा राजनीति का चस्का

पूर्व आईएएस महिलाओं को लगा राजनीति का चस्का

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में पूर्व आइएएस महिला अधिकारियों का राजनीति में प्रवेश चर्चा का विषय बना हुआ है. 1981 बैच की अजिता वाजपेयी पांडे को पिछले सप्ताह कांग्रेस मुख्यालय, दिल्ली से जारी फरमान के अनुसार डेटा एनालिटिक्स विभाग का मध्यप्रदेश...

यादों में आपातकाल - भाग 1 : और नसबन्दी ने पाँसा पलट दिया

यादों में आपातकाल - भाग 1 : और नसबन्दी ने पाँसा पलट दिया

पंद्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी यदि सरकारी आयोजन न होते तो पब्लिक इन्हें कब का भुला चुकी होती। लेकिन कुछ ऐसी तिथियां हैं जिन्हें राजनीति तब तक भूलने नहीं देगी जब तक कि इस देश का अस्तित्व है। इन तारीखों में...

सपाक्स से उपजे सवाल

सपाक्स से उपजे सवाल

बहुत साल पहले इंदौर के एक मुखर कर्मचारी नेता शिवाकांत वाजपेयी अक्सर मीडिया में एक सवाल उठाया करते थे। जब कभी कोई नेता या उसके परिवार के लोग बीमार होकर मुंबई, दिल्ली या विदेश जाकर इलाज कराते, वाजपेयी...

खत्म कहां हुआ आपातकाल

खत्म कहां हुआ आपातकाल

अक्सर एक सवाल मन में आता रहा कि आखिर इतने वर्षों की गुलामी के बाद मिली आजादी का गौरव हम ज्यादा देर महसूस क्यों नहीं कर पाए। ऐसा क्या हुआ जो लोगों का सत्ता प्रतिष्ठानों से इतनी जल्दी मोहभंग...

सपना के ठुमके, सत्ता की रागनी और कांग्रेस...!

सपना के ठुमके, सत्ता की रागनी और कांग्रेस...!

घटिया आरोप प्रत्यारोप, निचले स्तर पर उतरती राजनीति और हरदम सियासी स्वार्थों के बीच झूलते देश में एक ‍दिलचस्प देसी कमेंट पढ़ने को मिला। खबर उड़ी कि कांग्रेस इस बार चुनाव में हरियाणा की मशहूर रागनी डांसर सपना...