Monday, September 23, 2019

कॉलम / नजरिया

इस ठीकरे की किरचों से सिर तो आपका भी महफूज नहीं

इस ठीकरे की किरचों से सिर तो आपका भी महफूज नहीं

मीडियावाला.इन। इससे ज्‍यादा बचकाना और कुतर्कपूर्ण बात क्‍या हो सकती है यदि भारतीय जनता पार्टी यह कहे कि जम्‍मू कश्‍मीर में मुख्‍यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती की सरकार समस्‍याओं से ठीक से निपट नहीं पा रही थी...

सरकार गिराकर हथिया ली सत्ता

सरकार गिराकर हथिया ली सत्ता

मीडियावाला.इन। सियासत के खेल में ढपली कौन बजाता है, राग कौन छेड़ता है और महफिल कौन लूट जाता है, अंदाजा लगाना अक्सर बड़ा मुश्किल होता है। जम्मू-कश्मीर में यही तो हुआ है, हफ्तों से होड़...

देश तो जानता था सरकार को 36 महीने बाद समझ आई!

देश तो जानता था सरकार को 36 महीने बाद समझ आई!

नाम मात्र की सीटों के आधार पर अपने दल की सरकार गिनाने वाले मोटा भाई के लिए जम्मू कश्मीर की सरकार हाथ से जाना झटका नहीं है। क्योंकि राजनीति के धुरंधरों की चमड़ी इतनी मोटी हो जाती है...

‘कस्टमर केयर’ को भी मजहबी चश्मे से देखने का क्या मतलब?

‘कस्टमर केयर’ को भी मजहबी चश्मे से देखने का क्या मतलब?

यूं तो यह मामला एक नामी कंपनी की कस्टमर सर्विस से नाखुशी का है, लेकिन इसके पीछे जो सोच सामने आई है और जिस तरह इस सोच को सोशल मीडिया में हवा मिली है, उससे समझा जा सकता है...

मान लीजिये कश्मीर 2019 का मुख्य मुद्दा है

मान लीजिये कश्मीर 2019 का मुख्य मुद्दा है

जम्मू कश्मीर में गठबंधन तीन साल चल गया यह सब्र का बेमेल जोड़ था, दोनों ने निभाया जब तक चला अब बारी टूटने की थी ,सो टूट गया।दरअसल गठबंधन में सियासी मकसद तो होते हैं लेकिन सत्ता ही...

शिवराज के सबसे भरोसेमंद है प्रभात झा

शिवराज के सबसे भरोसेमंद है प्रभात झा

मीडियावाला.इन। राजनीति में कब कौन, किसके निकट और विश्वसनीय हो जाए, कोई भरोसा नहीं। एक ज़माने में भाजपा में शिवराज और प्रभात झा एक दुसरे के विरोधी माने जाते थे लेकिन आज हालत यह है की प्रभात झा, न...

क्या उम्मीद करें, और कहाँ जाकर रोयें?

क्या उम्मीद करें, और कहाँ जाकर रोयें?

मीडियावाला.इन। मेरी बातों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होती होगी,मुझे नहीं मालूम.लेकिन,मेरे एक अग्रज डॉ.कपूरमल जी जैन रोज पूछते हैं कि इसका हल भी तो तुमने सोचा ही होगा.वह जरूर बताओ.मैंने भी ठान ली है कि...

नए रंग से रेलों के जनरल कोच का ‘रंग’ भी बदलेगा?

नए रंग से रेलों के जनरल कोच का ‘रंग’ भी बदलेगा?

भारतीय रेल फिर रंग बदलने वाली है। रेलवे के 164 साल के इतिहास में यह दूसरा बड़ा मौका है, जब रेलवे का व्यापक तौर पर ‘मेक अोवर’ का प्लान है। यह सब रेल यात्रियों को अच्छे सफर (दिन नहीं!)...

बूझो तो जानें... राजनीति में ‘डीएनए’ का क्‍या रोल है

बूझो तो जानें... राजनीति में ‘डीएनए’ का क्‍या रोल है

पैतृक या वंशानुगत संबंधों को स्‍थापित करने में तो डीएनए की भूमिका निर्विवाद है, लेकिन मैं आज तक नहीं समझ पाया कि राजनीति में ‘डीएनए’ का क्‍या रोल है? क्‍योंकि चिकित्‍सा और अपराधशास्‍त्र के अलावा हमारे यहां राजनीति...

यह सभी दलों की मिलीजुली राजनीति है

यह सभी दलों की मिलीजुली राजनीति है

ममता बनर्जी, चन्द्रबाबू नायडू, कुमारस्वामी, विजयन ये चारों मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से केजरीवाल के लिए गुहार लगाने पहुंचे। सरकार आईएएस अफसरों की हड़ताल तुड़वाओ और न्याय करो। अपने अपने राज्य में बढ़ती भाजपा से भयभीत ये क्षेत्रीय क्षत्रप...

यह मामला सिर्फ आंखें नम हो जाने भर का ही नहीं है

यह मामला सिर्फ आंखें नम हो जाने भर का ही नहीं है

मीडियावाला.इन। मध्‍यप्रदेश के आईएएस अधिकारी और सामान्‍य अन्‍य पिछड़ा अधिकारी कर्मचारी संघ (सपॉक्‍स) के संरक्षक राजीव शर्मा ने अपनी फेसबुक वॉल पर 14 जून को एक पोस्‍ट डाली। उसमें उन्‍होंने वांछित रोजगार न मिल पाने पर आत्‍महत्‍या...

‘आकाश’ पिता ‘हीरो’ और ‘रोल मॉडल’ का फर्क...!

‘आकाश’ पिता ‘हीरो’ और ‘रोल मॉडल’ का फर्क...!

मीडियावाला.इन। गनीमत है ‍कि हम में से ज्यादातर पिताअों को यह ठीक से पता नहीं है कि वे अब ‘फादर्स डे’ मटेरियल हैं। इसीलिए 17 जून को मीडिया और बाजार में ‘फादर्स डे’ का हल्ला...

बाक़ी से कुछ हटकर हैं ये क़ाज़ी साब!

बाक़ी से कुछ हटकर हैं ये क़ाज़ी साब!

पहले इनके अब्बा हुज़ूर याकूब अली साहब इंदौर के शहर क़ाज़ी थे। उनके जन्नत नशीं होने के बाद (पेशे से शिक्षक) डा. इशरत अली शहर क़ाज़ी हुए। फिल्मों में निकाह पढ़ाने वाले मौलवी-क़ाज़ी वाली छवि से ये शहर क़ाज़ी...

पिता गोल होते हैं

पिता गोल होते हैं

धरती पर नाक की सीध में कदम बढ़ाते हुए पूरी दुनिया नापने के बाद आप वहीं लौट आते हैं। पिता की परछाई में कदम बढ़ाते हुए भी यही तो होता है। जिंदगी के तमाम सफहे पलटने के बाद...

यात्रा संस्मरण : वर्जीनिया के ग्रेट फाल्स - पोटोमैक नदी का अद्भूत अनुभव

यात्रा संस्मरण : वर्जीनिया के ग्रेट फाल्स - पोटोमैक नदी का अद्भूत अनुभव

वन झरने की धार आह! धार वह वन झरने की  भरती अंजुरी से  झरती रही-------- नदी जब बहुत खुश होती है तो वो गाती है, जीवन का कोई नया राग सुनाती है जल का जल में...

आत्महत्याएँ

आत्महत्याएँ

मीडियावाला.इन। भय्यू महाराज द्वारा की गई आत्महत्या ने उनके जानने वाले सभी लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस घटना पर बहुत कुछ कहा, लिखा और दिखाया जा चुका है तथा इस पर कुछ और कहना व्यर्थ...

एक लघुकथा विंध्य के सांस्कृतिक कायांतरण की, साँच कहै ता..

एक लघुकथा विंध्य के सांस्कृतिक कायांतरण की, साँच कहै ता..

मीडियावाला.इन। वक्त की रफ्तार के साथ इन पिछले पंद्रह दिनों में बहुत कुछ हो गया। प्रणब मुखर्जी नागपुर जाकर संघ के दीक्षांत समारोह में बोल आए, मीडिया की अपेक्षा के विपरीत कोई राजनीतिक वज्रपात नहीं...

पंचतत्व का ये पथ

पंचतत्व का ये पथ

पुष्प की अभिलाषा में कवि ने कहा था, मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएं वीर अनेक। एक वीडियो देखने के बाद दो-तीन दिन से मेरे मन में भी...

अमित शाह डरे हुए हैं या शिवराज!

अमित शाह डरे हुए हैं या शिवराज!

दो चुनाव जिस चेहरे के दम पर जीते अब वह फेयर एंड लवली क्यों नहीं रहा पार्टी के लिए? क्या वाक़ई मध्यप्रदेश में भाजपा की हालत ख़राब है या अमित शाह भोपाल, जबलपुर की यात्राओं के...