Monday, September 23, 2019

कॉलम / नजरिया

बेटी किस किस से बचाएँ

बेटी किस किस से बचाएँ

मीडियावाला.इन। मार्निंग वॉक पर निकला ज़रूर लेकिन रात को न्यूज चैनल पर देखी आसिफा के साथ ज्यादती की खबर दिमाग़ पर हथोड़े चला रही थी। सड़क से आती-जाती स्कूल बसों में बैठे बच्चों में देखने...

संविधान के प्रावधान समझ लें तो तनाव ही न हो

संविधान के प्रावधान समझ लें तो तनाव ही न हो

मीडियावाला.इन। भारत ने कोई बहुत बड़ी भौतिक तरक्की नहीं कर ली है, बल्कि भारत के पास जो एक सांस्कृतिक जीवनधारा है, वह दुनिया को अपनी ओर खींचती है और वैचारिक रूप से प्रभावित करती है। हमने सदियों...

इस चेतना के मायने

इस चेतना के मायने

मीडियावाला.इन। भाजपा के कतिपय सांसदों की अप्रत्याशित मुखरता चौंकाने वाली है। ये अपनी ही पार्टी के लिए समस्या पैदा करने वाले बयान दे रहे हैं। ऐसे सांसदों में अनेक समानताये हैं। इनमें से कोई भी...

राजनीति भ्रष्टाचार की काली रात से बाहर कब आएगी?

राजनीति भ्रष्टाचार की काली रात से बाहर कब आएगी?

मीडियावाला.इन। सांसदों-विधायकों-राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व ने आर्थिक अपराधों, घोटालों एवं भ्रष्टाचार को राजनीति का पर्याय बना दिया था। इन वर्षों में जितने भी चुनाव हुए हैं वे चुनाव अर्हता, योग्यता एवं गुणवत्ता के आधार पर न...

संसद की मर्यादा तोड़ते राजनेता

संसद की मर्यादा तोड़ते राजनेता

मीडियावाला.इन। देश के संसदीय इतिहास में 2012 के मॉनसून सत्र को सबसे ज्यादा गतिरोध वाला सत्र माना जाता है। तब कोयला खदानों में आवंटन में हुई गड़बड़ी का मुद्दा था और इस पर यूपीए सरकार को विपक्ष ने...

राहुल में राजनीतिक परिपक्वता का अभाव...!

राहुल में राजनीतिक परिपक्वता का अभाव...!

मीडियावाला.इन। राहुल गांधी के पूरे राजनीतिक जीवन में एक-आध अवसर को छोड़ कर इस परिपक्वता के दर्शन नहीं हुए परंतु एक राष्ट्रीय दल कांग्रेस के सर्वेसर्वा होने के नाते उनमें जो समझ विकसित होनी चाहिए थी उसकी अभी...

हिंदी कामेंट्री के कारण ही क्रिकेट चौके चूल्हे से लेकर खेत-खलिहानों तक पहुँच सका

हिंदी कामेंट्री के कारण ही क्रिकेट चौके चूल्हे से लेकर खेत-खलिहानों तक पहुँच सका

मीडियावाला.इन। ••• विदेशी चैनलों को पैसे से मतलब है, हिंदी कामेंट्री को बर्बाद करने का षड्यंत्र चल रहा है। ••• कमेंटेटर सुशील दोषी उतने ही अच्छे कहानीकार भी, अब लिख रहे हैं उपन्यास। ••• उन्हे...

संसद की मर्यादा तोड़ते राजनेता

संसद की मर्यादा तोड़ते राजनेता

मीडियावाला.इन। देश के संसदीय इतिहास में 2012 के मॉनसून सत्र को सबसे ज्यादा गतिरोध वाला सत्र माना जाता है. तब कोयला खदानों में आवंटन में हुई गड़बड़ी का मुद्दा था और इस पर यूपीए सरकार को विपक्ष ने...

बेटी बचाओ में महाराष्ट्र के करमला तालुका ने रचा इतिहास

बेटी बचाओ में महाराष्ट्र के करमला तालुका ने रचा इतिहास

डॉक्टर, वकील, कोचिंग, कटिंग वाले नहीं लेंगे बेटी के पिता से पैसे पुणे के डॉ. गणेश राख की मुहिम रंग ला रही है बेटी के जन्म पर निशुल्क प्रसूति करने वाले डॉ.गणेश राख ने...

अटारी सीमा पर जब हमारा पसीना छूटा

अटारी सीमा पर जब हमारा पसीना छूटा

लफ्जों से तो कई बार हम कहते हैं कि सीमा पर जब हमारे सिपाही जागते रहते हैं तब हम अपने घरों में चैन की नींद सोये रहते हैं। झुलसा देने वाली धूप, हाड़ कंपकंपा देने वाली ठंड और...

यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं है?

यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं है?

मीडियावाला.इन। सवाल तो यही है कि अपने अधिकारों की रक्षा की खातिर आवाज उठाने के लिए क्या दूसरों के अधिकारों की बलि चढ़ा देनी चाहिए? जिस तरह से सड़कों पर उपद्रव मचाया गया, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया गया,...

आसाराम के पड़ोस में सलमान

आसाराम के पड़ोस में सलमान

मीडियावाला.इन। जोधपुर सेंट्रल जेल की बैरक नंबर दो में यौन शोषण के कथित आरोपी आसाराम बापू ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सलमान खान भी उसी बैरक में रात गुजारेंगे।बीस साल से सलमान और उनके साथी कलाकारों...

इस घटाघोप को छाँटिए वरना इतिहास माफ नहीं करेगा..! साँच कहै ता..जयराम शुक्ल

इस घटाघोप को छाँटिए वरना इतिहास माफ नहीं करेगा..! साँच कहै ता..जयराम शुक्ल

मीडियावाला.इन। सड़कों पर पंद्रह लाशों (अवर्णों-सवर्णों की) के बिछनें, सैकड़ों के घायल होने, अरबों की संपत्ति फुँकने के बाद उन कलेजों को जरूर कुछ ठंडक मिली होगी जो सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या को अपनी डूबती राजनीति के लिए संजीवनी...

कैंसर रोगियों का जीवन अमृत - सिप्ला फाउंडेशन

कैंसर रोगियों का जीवन अमृत - सिप्ला फाउंडेशन

रोग का इलाज करना और रोगी में जीवन के प्रति अनुराग पैदा करना ये दोनों अलग-अलग मसले हैं। इस मामले में पुणे का सिप्ला पेलिएटिव केयर  सेंटर अपने आप में  अकेला, अदभुत और अनुकरणीय है। यहाँ कैंसर जैसे जानलेवा...

इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है

इनके ही लहू से सियासत सुर्ख दिखती है

"सड़कों पर बिछी लाशें, बहते खून,जलती बसें और दुकानों की आँच से इस मौसमी तपिश में भी उन कलफदारों के कलेजे में ठंडक पहुँच रही होगी जो इस बात पर यकीन करते हैं कि सड़कों पर बहने वाले...

बापू से साक्षात्कार का एहसास

बापू से साक्षात्कार का एहसास

मैं खड़ी थी सत्याग्रह भवन के सामने और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में यह मेरी यात्रा का सम्मेलन स्थल से पृथक पहला दर्शनीय स्थल बना। यहाँ चलने का हमने नहीं कहा था पर यहाँ सबसे पहले पहुँचाने का श्रेय...

फेसबुक के विकल्प भी कम नहीं

फेसबुक के विकल्प भी कम नहीं

जब से यह खबर सुर्खियों में आई है कि फेसबुक के डाटा का उपयोग कुछ कंपनियां शोध के लिए कर रही है और वे राजनैतिक विज्ञापनों में उसे काम में लेती है, तब से फेसबुक पर आपत्तियां आने...

कहानी हेमंत और प्रिंशु की

कहानी हेमंत और प्रिंशु की

मध्यप्रदेश से उपजी यह एक दिलचस्प स्टोरी है। इसमें प्यार के ड्रामे भी हैं। सेक्स का तड़का है। बेहिसाब पैसा है। सत्ता का नशा है। महत्वाकांक्षा का बुखार है। इश्क है। तड़प है। वादे हैं। खुशनुमा जिंदगी हर तरह...

सारी दुनिया एक ही नक़्शे में - लॉस वेगास

सारी दुनिया एक ही नक़्शे में - लॉस वेगास

बस जीवन में एक बार असली टेबल पर खेल लिया पोकर और बन गई जुआरी जीतने का दाँव कृत और हारने का दाँव कलि कहलाता था। बौद्ध ग्रंथों में भी कृत तथा कलि का यह विरोध संकेतित किया गया...

भाग-2 - संघ को खूब कोसिए, बिल्कुल मत छोड़िए

भाग-2 - संघ को खूब कोसिए, बिल्कुल मत छोड़िए

1975 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया तो देश के सारे विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनसे किसी भी रूप में जुड़े बेकसूर लोगों को भी जेलों में ठूंस दिया गया था। हर जेलों में आरएसएस के लोग...