Tuesday, October 23, 2018

कहानी

कहानी : दूर होती रोशनी 

कहानी : दूर होती रोशनी 

मीडियावाला.इन। दूर होती रोशनी[ पद्मा शर्मा ] बच्चों की लम्बी कतार ...    कई स्कूलों के बच्चे अपनी-अपनी यूनीफॉर्म में पंक्तिबद्ध थे। सपना भी अपने स्कूल की लाइन में खड़ी थी। दो घण्टे व्यतीत हो गये लाइन में खड़े...

स्वप्न महल

स्वप्न महल

मीडियावाला.इन। पिछले एक साल से हमारे बीच स्वयं का घर और घर में शिफ्ट होना एक ऐसा मुद्दा बना हुआ है, जिसके चलते हम सहज बात शुरू होने पर भी लड़ने लगते और कई बार चुप इसलिये होना पड़ता कि...

स्त्री मुक्ति का यूटोपिया

स्त्री मुक्ति का यूटोपिया

मीडियावाला.इन। डा. स्वाति तिवारी   प्रथम दृष्टा सब कुछ अद्भुत अलौकिक असाधारण था उसके घर में। सर्वप्रथम तो जान लीजिए कि उसके घर की पारिवारिक व्यवस्था ऐसी बनी थी जिसकी ना पितृसत्तामकता थी ना मातृसत्तात्मकता। वहाँ व्यक्तिवादी सत्ता का...

ताई की बुनाई

ताई की बुनाई

मीडियावाला.इन। गेंद का पहला टप्पा मेरी कक्षा अध्यापिका ने खिलाया था| उस दिन मेरा जन्मदिन रहा| तेरहवां| कक्षा के बच्चों को मिठाई बांटने की आज्ञा लेने मैं अपनी अध्यापिका के पास गया तो वे पूछ बैठीं, “तुम्हारा स्वेटर...

नशामुक्ति

नशामुक्ति

मीडियावाला.इन। एक समय था, जब मुन्ना जी  की नियमित दोस्ती थी शराब से, नशा मुक्ति अभियान का बैनर थामे अभियान की अगुवाई करते थे, तो सब लोग इस जुमले पर हंसी ठिठोली किया करते थे । यूं तो...

पुष्प की पीड़ा

पुष्प की पीड़ा

स्वतंत्रता दिवस पर विशेष  पुष्प की अभिलाषा शीर्षक से लिखी कविता से आप भी चिरपरिचित हैं न? आपने भी मेरी तरह यह कविता पढ़ी या सुनी जरूर होगी। कई बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में किसी बच्चे को...

रवीन्द्रनाथ  टैगोर की कहानी काबुलीवाला

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला

मीडियावाला.इन। रबिन्द्रनाथ टैगोर विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के  नोबल पुरस्कार विजेता हैं।  वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। टैगोर एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं – भारत का...

कहानी: सुनो वत्स, सुनो

कहानी: सुनो वत्स, सुनो

            शुरुआत एक छोटी सी कहानी से,वत्स! एक गाँव में एक किसान का युवा पुत्र जेठ की चिलमिलाती धूप में सामान को ढोनेवाली अपनी गाड़ी ठीक कर रहा था ,उसका बूढा बाप उसे देख रहा था .आसमान आग बरसा...

मायका

मायका

मीडियावाला.इन।लघु कथा      सुशी सक्सेना         मम्मी पापा के गुजर जाने के बाद मायके जाने को दिल ही नहीं कर रहा था। एक कहावत जो सुन रखी थी कि " मां बाप से ही मायका होता है।" डरती थी...

कहानी :गिल्लू

कहानी :गिल्लू

मीडियावाला.इन।- महादेवी वर्मा सोनजुही में आज एक पीली कली लगी है। इसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सघन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कंधे...

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

आज राष्ट्रकवि डा.शिवमंगल सिंह सुमनजी की जयंती है। सुमनजी, दिनकरजी की तरह ऐसे यशस्वी कवि थे जिनकी हुंकार से राष्ट्रअभिमान की धारा फूटती थी। संसद में अटलजी ने स्वयं की कविता से ज्यादा सुमनजी की कविताएँ उद्धृत की।...

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

मीडियावाला.इन।  पाठकों के लिए   क्लासिक साहित्य  शृंखला में आज एक ख़ास कहानी  रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र   लेकर आये है   कहानी : स्त्री का पत्र    पूज्यवर, आज पन्द्रह साल हुए...

वो जो भी है, मुझे पसंद है

वो जो भी है, मुझे पसंद है

मीडियावाला .इन   स्वाति तिवारी "कब आ रही हैं आप?" "परसों रात की फ्लाइट है... अच्छा मैं तुम्हें अपना टिकट मेल करती हूँ। तुम समय देख लेना।" "जी, आप बेफिक्र होकर आइए मैं आपको लेने पहुंच जाऊंगी।"...

माई री मैं टोना करिहों

माई री मैं टोना करिहों

मीडियावाला.इन। “ कहां से आ रही हो...ये तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है...फोन क्यों नहीं उठाया तुम लोगो ने..कितनी बार कॉल किया है..कुछ अंदाजा है तुम दोनों को...?”   दोनों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।...

अंतराल

अंतराल

मीडियावाला.इन। धूप लगातार तेज हो रही थी। लू ऐसी चल रही थी, मानो धूल का गुबार उड़ाकर मनुष्य का मजाक उड़ाना चाहती हो! शायद वह चुनौती दे रही थी कि मगना देखती हूँ, तू तेज चलता है या मैं?...

निगोड़ी

निगोड़ी

मीडियावाला.इन। रूपकान्ति से मेरी भेंट सन् १९७० में हुई थी. उसके पचासवें साल में. उन दिनों मैं मानवीय मनोविकृतियों पर अपने शोध-ग्रन्थ की सामग्री तैयार कर रही थी और रूपकान्ति का मुझसे परिचय ‘एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर’, अतिपाती तनाव से...

कहानी : आढ़ा वक्त 

कहानी : आढ़ा वक्त 

तब गांव में इक्का दुक्का लोग ही जागे होंगे, जब अकेली सुभद्रा ने विदिशा स्टेशन आकर सीधे भोपाल की ट्रेन पकड़ ली थी। वह रात भर से दादा की तबियत बिगड़ने की खबर से हलकान थी। पप्पू के...

एक फलसफा जिन्दगी

एक फलसफा जिन्दगी

मीडियावाला.इन। ''शाम का अखबार पढ़ा?'' अमन ने शाम को दफ्तर से घर आकर अपनी टाई ढीली टाई ढीली करते हुए मेरी तरफ देखकर पूछा। ''नहीं, अखबार आया ही नहीं।'' ''मेरी फाइल के अंदर रखा है।'' अमन यह कहते हुए...

कहानी : तितली

कहानी : तितली

यह भी फरवरी की एक सर्द सुबह थी.  असल में उन्हें इतना अचम्भा न हुआ  होता जो उस मल्टीस्टोरीड इमारत के अट्ठारहवें माले के दूसरे टावर में उनके पहुंचते ही यह घटा न होता, उन्होने उस वारदात...