Sunday, April 21, 2019

कविता

वरमाला रौंद दूंगी:नारीवादी रमणिका गुप्ता की कविता 

वरमाला रौंद दूंगी:नारीवादी रमणिका गुप्ता की कविता 

मीडियावाला.इन। आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाली साहित्यकार और नारीवादी रमणिका गुप्ता का नई दिल्ली में निधन हो गया, वे 89 साल की थींउनकी कविता  स्त्री विमर्श विषयक कृतियां हैं,रमणिका गुप्ता देश की वामपंथी प्रगतिशील...

कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

मीडियावाला.इन। रातों रात दुबेजी बन गये छब्बेजी पल मे धुल गये उनके सारे धब्बेजी महा सियासी साबुन का यह चमत्कार है चमत्कार को नमस्कार है। कलमघसीटे चप्पल चटकाते फिरते हैं और जुगाड़ू पाँव न धरती पर धरते हैं पढ़े क़सीदे...

ह्यूस्टन में होली

ह्यूस्टन में होली

मीडियावाला.इन।             ह्यूस्टन में आनंद भयो  ह्यूस्टन में आनंद भयो है, होरी को रंग बरसे l राम कृष्ण दोउ खेलें होरी, देख-देख मन हरसे ll                                         ह्यूस्टन में आनंद भयो...                                                                                           ...

कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

मीडियावाला.इन।होली रंगों का त्यौहार है जिसमें रंगों का अपना महत्व है। होली के आनंद की शुरुआत रंगों से होती है और गुलाल से ही इसके आनंद का खात्मा होता है। देश के कई हिस्सों में होली पारंपरिक और आधुनिक तरीके...

गौतम राजऋषी  की तीन कवितायें

गौतम राजऋषी की तीन कवितायें

मीडियावाला.इन। 1 --ये कैसी पेड़ों से है उतरी धूप चुभती-चुभती सी ये कैसी पेड़ों से है उतरी धूप आंगन-आंगन धीरे-धीरे फैली इस दोपहरी धूप गर्मी की छुट्‍टी आयी तो गाँवों में फिर महके आम चौपालों पर चूसे...

भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में:कपिल तिवारी

भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में:कपिल तिवारी

मीडियावाला.इन।भारतीय परंपरा में हमने समष्टि को दो रूपों में देखा है एक सत्य के रूप में एक प्रेम के रूप में यह कहना है वरिष्ठ साहित्यकार लोक संस्कृति के विद्वान कपिल तिवारी का। वे बुधवार से महारानी...

कदम मिलाकर चलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा

मीडियावाला.इन। 1-कदम मिलाकर चलना होगा. उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को...

विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह की तीन कविताएं

विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह की तीन कविताएं

मीडियावाला.इन।हिंदी के विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह का निधन हो गया है.उनका जाना साहित्य जगत से पितृ पुरुष के जाने जैसा ही ही . नामवर सिंह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली के एम्स अस्पताल...

स्त्री-1

स्त्री-1

मीडियावाला.इन। स्त्री-1 ***** टूटती जुड़ती स्त्री के बीच बसी दुनियाँ में किसी ने  हँसते हुए कहा स्त्री सिर्फ आंसू है जबकि वो हँसी ले आया था  अपने बाहों में प्रेम की किस्सों से आवाज आयी स्त्री लालची है...

बैतूल और बैतूल के कस्बे

बैतूल और बैतूल के कस्बे

मीडियावाला.इन। बैतूल नहीं बे-तूल की बातें  अनुभूति उजले दिन सी संवेदना  काली रातें  गुज़रती ज़िंदगी आदिवासियों की  एकमात्र बस्तर को छोड़  मध्यप्रदेश का सबसे पिछड़ा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र  भोपाल-नागपुर 60 हाईवे पर ...

नौका को सब पता होता है

नौका को सब पता होता है

मीडियावाला.इन।   बांग्ला/हिन्दी भांगा भांगा आकाशे  काॅतो गोभीर जाॅल लुकीये आछे बूके एक बैथा  काॅतो भीजे भार निये आछे शोब जाना थाके नौऊकार काॅतो वृष्टि, पृथ्वी ते सुखनों आछे भेंगे पाॅड़े जोखोन/ एकटी तारा काॅतो...

कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने

कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने

मीडियावाला.इन।जब तक चलेगी जिंदगी की सांसे, कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा । कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तो, कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तो, कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा कहीं मिलेगी सच्चे मन से...

【जाने स्त्रियां कैसे यह अभ्यास करतीं हैं】

【जाने स्त्रियां कैसे यह अभ्यास करतीं हैं】

मीडियावाला.इन। 1. अचानक एकदिन  स्त्रियां साड़ी पहनने लगतीं हैं और उसे पहनकर तेज-तेज चलने लगतीं हैं वे उसी साड़ी के एक छोर से अपना पूरा मुंह ढंक लेतीं हैं और मुंह ढंके-ढंके चलने लगतीं हैं जाने स्त्रियां कैसे यह...

आहत  है  मन

आहत है मन

मीडियावाला.इन। काँप उठती है भीतर तक रूह  थम जाती है कलम  आहत है मन । कैसी प्रगति है!  अखबार के मुखपृष्ठ की प्रथम पंक्ति  शर्मसार करती खबर,  हिम्मत कर पृष्ठ पलटा  साधु द्वारा सतत्...

गुलाब के बहाने।

गुलाब के बहाने।

मीडियावाला.इन। हर जगह नहीं उगता गोखरू  हर जगह नहीं पाई जाती है  कटेरी  बबूल के लिए भी  निश्चित है स्थान।  परन्तु हो सकता है गुलाब  अधिकतर हर जगह ...

खांटी घरेलू औरत

खांटी घरेलू औरत

मीडियावाला.इन। देश की ख्यातनाम साहित्यकार ममता कालियाजी के जन्मदिन पर  विशेष  कभी कोई ऊंची बात नहीं सोचती खांटी घरेलू औरत उसका दिन कतर-ब्योंत में बीत जाता है और रात उधेड़बुन में बची दाल के मैं पराठे बना लूं खट्टे...

कुछ अनकहे अलफ़ाज़.

कुछ अनकहे अलफ़ाज़.

मीडियावाला.इन।आज साहित्य के कविता की कड़ी में एक युवा वैज्ञानिक डॉ पल्लवी तिवारी की कवितायें लेकर आयें है ,मध्यप्रदेश की रहनेवाली पल्लवी विगत दस वर्षों से यू एस ए के ओहायो स्टेट मे रह रही है ,वे वहाँ क्लीवलैंड...