Wednesday, February 20, 2019

कविता

स्त्री-1

स्त्री-1

मीडियावाला.इन। स्त्री-1 ***** टूटती जुड़ती स्त्री के बीच बसी दुनियाँ में किसी ने  हँसते हुए कहा स्त्री सिर्फ आंसू है जबकि वो हँसी ले आया था  अपने बाहों में प्रेम की किस्सों से आवाज आयी स्त्री लालची है...

बैतूल और बैतूल के कस्बे

बैतूल और बैतूल के कस्बे

मीडियावाला.इन। बैतूल नहीं बे-तूल की बातें  अनुभूति उजले दिन सी संवेदना  काली रातें  गुज़रती ज़िंदगी आदिवासियों की  एकमात्र बस्तर को छोड़  मध्यप्रदेश का सबसे पिछड़ा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र  भोपाल-नागपुर 60 हाईवे पर ...

नौका को सब पता होता है

नौका को सब पता होता है

मीडियावाला.इन।   बांग्ला/हिन्दी भांगा भांगा आकाशे  काॅतो गोभीर जाॅल लुकीये आछे बूके एक बैथा  काॅतो भीजे भार निये आछे शोब जाना थाके नौऊकार काॅतो वृष्टि, पृथ्वी ते सुखनों आछे भेंगे पाॅड़े जोखोन/ एकटी तारा काॅतो...

कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने

कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने

मीडियावाला.इन।जब तक चलेगी जिंदगी की सांसे, कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा । कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तो, कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तो, कहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगा कहीं मिलेगी सच्चे मन से...

【जाने स्त्रियां कैसे यह अभ्यास करतीं हैं】

【जाने स्त्रियां कैसे यह अभ्यास करतीं हैं】

मीडियावाला.इन। 1. अचानक एकदिन  स्त्रियां साड़ी पहनने लगतीं हैं और उसे पहनकर तेज-तेज चलने लगतीं हैं वे उसी साड़ी के एक छोर से अपना पूरा मुंह ढंक लेतीं हैं और मुंह ढंके-ढंके चलने लगतीं हैं जाने स्त्रियां कैसे यह...

आहत  है  मन

आहत है मन

मीडियावाला.इन। काँप उठती है भीतर तक रूह  थम जाती है कलम  आहत है मन । कैसी प्रगति है!  अखबार के मुखपृष्ठ की प्रथम पंक्ति  शर्मसार करती खबर,  हिम्मत कर पृष्ठ पलटा  साधु द्वारा सतत्...

गुलाब के बहाने।

गुलाब के बहाने।

मीडियावाला.इन। हर जगह नहीं उगता गोखरू  हर जगह नहीं पाई जाती है  कटेरी  बबूल के लिए भी  निश्चित है स्थान।  परन्तु हो सकता है गुलाब  अधिकतर हर जगह ...

खांटी घरेलू औरत

खांटी घरेलू औरत

मीडियावाला.इन। देश की ख्यातनाम साहित्यकार ममता कालियाजी के जन्मदिन पर  विशेष  कभी कोई ऊंची बात नहीं सोचती खांटी घरेलू औरत उसका दिन कतर-ब्योंत में बीत जाता है और रात उधेड़बुन में बची दाल के मैं पराठे बना लूं खट्टे...

कुछ अनकहे अलफ़ाज़.

कुछ अनकहे अलफ़ाज़.

मीडियावाला.इन।आज साहित्य के कविता की कड़ी में एक युवा वैज्ञानिक डॉ पल्लवी तिवारी की कवितायें लेकर आयें है ,मध्यप्रदेश की रहनेवाली पल्लवी विगत दस वर्षों से यू एस ए के ओहायो स्टेट मे रह रही है ,वे वहाँ क्लीवलैंड...

अमृता प्रीतम की  कविताएं 

अमृता प्रीतम की  कविताएं 

मीडियावाला.इन। मीडियावाला.इन।अमृता प्रीतम को याद  करते हुए -- अमृता प्रीतम देश की उन कवियित्रियों में से एक हैं जिनकी मोहब्बत की कहानी आज भी मशहूर है। 31 अगस्त 1919 को पंजाब के गुंजरावाला में जन्मीं अमृता का बचपन लाहौर में...

हिरोशिमा

हिरोशिमा

  मैंने   हाँथ  बढ़ाया ही था खिड़की  खोल  तुम्हे टाटा करने  मानव  दानव का फूट पड़ा  प्रकाश  पुन्ज तुम  देखते  ही देखते  वाष्पित हो गये  और मैं  जीवित  ...

। विजय-पथ ।।

। विजय-पथ ।।

मीडियावाला.इन। । विजय-पथ ।। कभी लिखता हूँ, कभी बुनता हूं, अपने पसीने से माथे की लकीरें बदलता हूं कभी रूखी-सुखी खाकर, तो कभी थोड़े में गुजारा करता हूं मैं अपने हाथों की लकीरो को अपने श्रम से बदलता हूं...

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

आज राष्ट्रकवि डा.शिवमंगल सिंह सुमनजी की जयंती है। सुमनजी, दिनकरजी की तरह ऐसे यशस्वी कवि थे जिनकी हुंकार से राष्ट्रअभिमान की धारा फूटती थी। संसद में अटलजी ने स्वयं की कविता से ज्यादा सुमनजी की कविताएँ उद्धृत की।...

कविता : पचास पार की औरतों

कविता : पचास पार की औरतों

पचास पार की औरतों थोड़ी सी आंच अपने लिए बचा कर रखो  राख़ के ढेर मे बदलने से पहले  अपनी पसंद का कोई तंदूर चुन कर रख दो अपनी थोड़ी सी आंच  खुद को भस्म करने...

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

आज मै दुःखी हूँ उदास हूँ  मेरा पुत्र प्रस्थान कर गया  महा लोक को देव लोक को अंजुली की रेत बिखर गई  महा शून्य शेष रहा मै उसमे नहीँ रची बसी वह मेरी बूँद बूँद मे...

कविता : एब्स्ट्रैक्ट

कविता : एब्स्ट्रैक्ट

तुम्हें लगता है मेरा अक्स - एब्स्ट्रैक्ट लगना भी चाहिए - तुम्हें ! एब्स्ट्रैक्ट हूँ मैं - झूठ और  नाइंसाफ़ी के बीच इंसाफ़ में ... इंसानियत और नफ़रत की दीवारों पर ठुंकी कीलों से झूलती रस्सी की...