Monday, August 26, 2019

साहित्य

फेसबुकिया मॉम

फेसबुकिया मॉम

मीडियावाला.इन। कहानी  अगस्त माह का पहला रविवार है | सुबह-सुबह का झुटपुटा है | अभी वृक्ष सोये पड़े हैं | डालियाँ पंछियों की चहचहाहट सुनने के लिए आतुर हैं लेकिन कहीं कोई आवाज़ नहीं केवल एक आवाज़ को छोड़कर...

पुराना पता

पुराना पता

मीडियावाला.इन। ‘इन दीज न्यू टाउन्ज वन कैन फाइन्ड द ओल्ड हाउजिस ओनली इन पीपल’ (‘इन नये शहरों में पुराने घर हमें केवल लोगों के भीतर ही मिल सकते हैं।’) इलियास कानेसी वह मेरा पुराना मकान है... उस सोते का उद्गम...

चांद से मुलाकात

चांद से मुलाकात

मीडियावाला.इन। सच, चंद्रयान से एक बात पूछने का बड़ा मन है। चांद पर जा तो रहे हो, लेकिन वहां देखोगे क्या। क्या सिर्फ वहां की मिट्टी खोदोगे, फोटो क्लिक करोगे, पानी ढूंढने की कोशिश करोगे और लौट आओगे। क्या सच...

सीता के बेदाग चरित्र पर तो सियासत का दागी दांव न खेलें ...!

सीता के बेदाग चरित्र पर तो सियासत का दागी दांव न खेलें ...!

मीडियावाला.इन।   कहावत है ‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्टमलट्ठा।‘ श्रीलंका स्थित दिवुरमपोला में सीता माता का मंदिर बनवाने को लेकर मध्यप्रदेश में दो राजनीतिक जुलाहों सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच कुछ इसी तरह का लट्ठमलट्ठा छिड़ा...

हिन्दी लघुकथा:अतीत के पन्नों से

हिन्दी लघुकथा:अतीत के पन्नों से

मीडियावाला.इन। ‘उदंत मार्तण्ड’ में प्रयुक्त खड़ी बोली गद्य का स्वरूप दिखाने के लिए पत्र के जिस अंश को उद्धृत किया था, वह कथात्मक भी है और न्याय व्यवस्था से जुड़े तत्कालीन भारतीय उच्च-वर्ग की मानसिकता का खुलासा करने में सक्षम...

शेष रह गया है सब अनकहा, अनसुना

शेष रह गया है सब अनकहा, अनसुना

मीडियावाला.इन।                       भारती पंडित शेष रह गया कह दूँगी फिर कभी सब कुछ तुमसे सोचते- सोचते  कितना सब रह गया कहने- सुनने को रह गया बताना कि तुम्हारा यूँ गहरी नज़र से देखना ...

विदाई

विदाई

मीडियावाला.इन। विदाई कल से दुलारी ने काम पर जाना छोड़ दिया था| उसके ब्याह को केवल पाँच दिन रह गए थे| वह सोचने लगी कम से कम पाँच दिन तो वह भी रानी महारानी की तरह आराम से...

विदूषक

विदूषक

मीडियावाला.इन। 2 जुलाई सुशील सिद्धार्थ के जन्म दिन पर उनकी  चर्चित कहानी दिवंगत सुशील  हिंदी गद्य और कविता लेखक, आलोचक, संपादक और व्यंग्यकार थे। वह एक पत्रकार और स्तंभकार और कई पत्रिकाओं के सह-संपादक थे। उनकी...

बापवाली !

बापवाली !

मीडियावाला.इन।बापवाली ! “बाहर दो पुलिस कांस्टेबल आए हैं,” घण्टी बजने पर बेबी ही दरवाज़े पर गयी थी, “एक के पास पिस्तौल है और दूसरे के पास पुलिस रूल. रूल वाला आदमी अपना नाम मीठेलाल बताता है. कहता है,...

हैप्पी फादर्स डे

हैप्पी फादर्स डे

मीडियावाला.इन। हैप्पी फादर्स डे पूज्य 'पिता दिन' आपका,  करता तुम्हें प्रणाम l पहचान बनी मेरी तुमसे,  तुम्ही से पाया नाम ll पिता हमारें सहें कष्ट,  अनभिज्ञ  सारा संसार l झोली में डालीं  खुशियाँ,  झेल वक्ष पर वार ll दसरथ...

प्रेतयोनि 

प्रेतयोनि 

मीडियावाला.इन "दीदी, दीदी... उठो, उठो! बाबूजी बुला रहे हैं तुम्हे बालकनी में।" छोटी बहन चिंकी ने अधीर हो उसे बाँह पकड़कर झिंडोड़ने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल से चिंकी की झिंझोड़न व...

मेमने की चीख

मेमने की चीख

मीडियावाला.इन। रात आधी से अधिक बीत गई है, पर चौधरी बिस्तर  पर करवट ही बदल रहे हैं | भुलई काका के खखारने की आवाज आई तो चौधरी उठकर बिस्तर पर बैठ गये | कोई अन्य दिन रहा होता तो भुलई...

पुस्तक अंशः कलम के सेनापति; तो ऐसी थी हिंदी पत्रकारिता, ऐसे थे संपादक

पुस्तक अंशः कलम के सेनापति; तो ऐसी थी हिंदी पत्रकारिता, ऐसे थे संपादक

मीडियावाला.इन।सैनिकों के घाव दिखते ही उपचार की व्यवस्था होती है, लेकिन संपादक के घाव-दर्द को देखना-समझना आसान नहीं और उपचार भी बहुत कठिन. संपादक की निष्पक्षता और गरिमा से लोग उन्हें ‘स्टार’ मानते हैं, लेकिन उनके संघर्ष की भनक बहुत...

दादा की भीनी भीनी यादें

दादा की भीनी भीनी यादें

मीडियावाला.इन लोक संस्कृति पुरुष पंडित रामनारायण उपाध्याय को याद कर रही है उनकी बेटी डॉ सुमन चौरे  दादा चले गए ऐसे तो कभी नहीं जाते थे।  गली के नुक्कड़ पर लगे लाल डिब्बे में चिट्ठी  ...

बूंद गुलाबजल की

बूंद गुलाबजल की

मीडियावाला.इन। इस बार हरिद्वार जाना है, यह सोच लिया था। बाबूजी का अस्थिकलश भी वहीं गंगाजी में प्रवाहित करना है। इसी बहाने तीर्थ भी हो जाएगा और तीन साल से रमिया बुआ से नहीं मिली थी, सो उनसे मिलना...

पर्यावरण संरक्षण की भावना से ओतप्रोत निमाड़ी लोक संस्कार

पर्यावरण संरक्षण की भावना से ओतप्रोत निमाड़ी लोक संस्कार

मीडियावाला.इन। लोक संस्कृति मर्मज्ञ डॉ सुमन चौरे,   जल से लबालब भरे  नदी-सरोवर, हरे-हरितम वृक्षों से बसे वन-उपवन, मुक्त बहती सुरभित पवन, मधुर कोल-किलोल करती मनोहर मंजुल पखेरूओं की जोड़ियाँ, सब कुछ हमारे लोक की अपनी निजी सम्पदा हैं।...

फैसला 

फैसला 

मीडियावाला.इन। ------------------------ शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है | राघव  पहली बार अकेले सफर कर रहा है | उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा...

WhatsApp में जुड़े कुछ फायदेमंद फीचर्स, पढ़ें इनके बारे में

WhatsApp में जुड़े कुछ फायदेमंद फीचर्स, पढ़ें इनके बारे में

मीडियावाला.इन। WhatsApp के नए फीचर्स जल्द ही आपको देखने को मिलेंगे, क्योंकि अपडेट भी आने वाला है. इसमें वॉयस मैसेज से जुड़े कुछ खास फीचर्स हैं और फोटो एल्बम फीचर में भी इंप्रूवमेंट है.  WhatsApp...

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

मीडियावाला.इन।किसी बहुत अच्छे लेखक के बारे में यह जानने और लिखने की कोशिश करना कि वह इतना अच्छा क्यों है, वास्तव में एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। विद्वान व्यंग्य विशेषज्ञ लोगों की शिकायत भी है कि व्यंग्य को समझने और...

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

मीडियावाला.इन।क्या मेरी तरह आपको भी बचपन की  फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता की याद आती है ,कभी हम गांधी बनते थे , और कभी विवेकानन्द ,एक बार जब मैं आठवीं में थी तब मैं एक भटकी आत्मा बनी थी। काला बुरके जैसा...