Wednesday, June 26, 2019

साहित्य

बापवाली !

बापवाली !

मीडियावाला.इन।बापवाली ! “बाहर दो पुलिस कांस्टेबल आए हैं,” घण्टी बजने पर बेबी ही दरवाज़े पर गयी थी, “एक के पास पिस्तौल है और दूसरे के पास पुलिस रूल. रूल वाला आदमी अपना नाम मीठेलाल बताता है. कहता है,...

हैप्पी फादर्स डे

हैप्पी फादर्स डे

मीडियावाला.इन। हैप्पी फादर्स डे पूज्य 'पिता दिन' आपका,  करता तुम्हें प्रणाम l पहचान बनी मेरी तुमसे,  तुम्ही से पाया नाम ll पिता हमारें सहें कष्ट,  अनभिज्ञ  सारा संसार l झोली में डालीं  खुशियाँ,  झेल वक्ष पर वार ll दसरथ...

प्रेतयोनि 

प्रेतयोनि 

मीडियावाला.इन "दीदी, दीदी... उठो, उठो! बाबूजी बुला रहे हैं तुम्हे बालकनी में।" छोटी बहन चिंकी ने अधीर हो उसे बाँह पकड़कर झिंडोड़ने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल से चिंकी की झिंझोड़न व...

मेमने की चीख

मेमने की चीख

मीडियावाला.इन। रात आधी से अधिक बीत गई है, पर चौधरी बिस्तर  पर करवट ही बदल रहे हैं | भुलई काका के खखारने की आवाज आई तो चौधरी उठकर बिस्तर पर बैठ गये | कोई अन्य दिन रहा होता तो भुलई...

पुस्तक अंशः कलम के सेनापति; तो ऐसी थी हिंदी पत्रकारिता, ऐसे थे संपादक

पुस्तक अंशः कलम के सेनापति; तो ऐसी थी हिंदी पत्रकारिता, ऐसे थे संपादक

मीडियावाला.इन।सैनिकों के घाव दिखते ही उपचार की व्यवस्था होती है, लेकिन संपादक के घाव-दर्द को देखना-समझना आसान नहीं और उपचार भी बहुत कठिन. संपादक की निष्पक्षता और गरिमा से लोग उन्हें ‘स्टार’ मानते हैं, लेकिन उनके संघर्ष की भनक बहुत...

दादा की भीनी भीनी यादें

दादा की भीनी भीनी यादें

मीडियावाला.इन लोक संस्कृति पुरुष पंडित रामनारायण उपाध्याय को याद कर रही है उनकी बेटी डॉ सुमन चौरे  दादा चले गए ऐसे तो कभी नहीं जाते थे।  गली के नुक्कड़ पर लगे लाल डिब्बे में चिट्ठी  ...

बूंद गुलाबजल की

बूंद गुलाबजल की

मीडियावाला.इन। इस बार हरिद्वार जाना है, यह सोच लिया था। बाबूजी का अस्थिकलश भी वहीं गंगाजी में प्रवाहित करना है। इसी बहाने तीर्थ भी हो जाएगा और तीन साल से रमिया बुआ से नहीं मिली थी, सो उनसे मिलना...

पर्यावरण संरक्षण की भावना से ओतप्रोत निमाड़ी लोक संस्कार

पर्यावरण संरक्षण की भावना से ओतप्रोत निमाड़ी लोक संस्कार

मीडियावाला.इन। लोक संस्कृति मर्मज्ञ डॉ सुमन चौरे,   जल से लबालब भरे  नदी-सरोवर, हरे-हरितम वृक्षों से बसे वन-उपवन, मुक्त बहती सुरभित पवन, मधुर कोल-किलोल करती मनोहर मंजुल पखेरूओं की जोड़ियाँ, सब कुछ हमारे लोक की अपनी निजी सम्पदा हैं।...

फैसला 

फैसला 

मीडियावाला.इन। ------------------------ शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है | राघव  पहली बार अकेले सफर कर रहा है | उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा...

WhatsApp में जुड़े कुछ फायदेमंद फीचर्स, पढ़ें इनके बारे में

WhatsApp में जुड़े कुछ फायदेमंद फीचर्स, पढ़ें इनके बारे में

मीडियावाला.इन। WhatsApp के नए फीचर्स जल्द ही आपको देखने को मिलेंगे, क्योंकि अपडेट भी आने वाला है. इसमें वॉयस मैसेज से जुड़े कुछ खास फीचर्स हैं और फोटो एल्बम फीचर में भी इंप्रूवमेंट है.  WhatsApp...

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

मीडियावाला.इन।किसी बहुत अच्छे लेखक के बारे में यह जानने और लिखने की कोशिश करना कि वह इतना अच्छा क्यों है, वास्तव में एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। विद्वान व्यंग्य विशेषज्ञ लोगों की शिकायत भी है कि व्यंग्य को समझने और...

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

मीडियावाला.इन।क्या मेरी तरह आपको भी बचपन की  फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता की याद आती है ,कभी हम गांधी बनते थे , और कभी विवेकानन्द ,एक बार जब मैं आठवीं में थी तब मैं एक भटकी आत्मा बनी थी। काला बुरके जैसा...

बचपन को बचाइए सेक्सुअल हैरेसमेंट का पाश उन्हें ताउम्र जकड़ा रहता है..

बचपन को बचाइए सेक्सुअल हैरेसमेंट का पाश उन्हें ताउम्र जकड़ा रहता है..

मीडियावाला.इन | केके बिड़ला फौन्डेशन से बिहारी पुरस्कार प्राप्त उपन्यास स्वप्नपाश  पर चर्चा  "कुछ किताबों में जिंदगी खुद शब्द का रूप लेकर मुखर होती है...हंसती-मुस्कुराती ही नहीं डराती है...सहमाती है...फिर धीरे से चाबी दे जाती है, उस बंद ताले...

पुराने पन्ने

पुराने पन्ने

मीडियावाला.इन। इस सन् २०१६ के नवम्बर माह का विमुद्रीकरण मुझे उन टकों की ओर ले गया है साठ साल पहले हमारे पुराने कटरे के सर्राफ़, पन्ना लाल, के परिवार के पाँच सदस्यों की जानें धर ली थीं| अट्ठाइस वर्षीया...

रोटियां सेंकती   मेरी माँ

रोटियां सेंकती  मेरी माँ

मीडियावाला.इन। रसोई में चूल्हे पर रोटियां सेंकती  मेरी माँ का  लाल लाल  दमकता चेहरा  मुझे साहस मेहनत  विश्वास देता है   अंधेरों में टिमटिमाती ढिबरियों में मेरी माँ की चमकती दो आंखे  टपरियो...

.उपहार जिन्दगी का

.उपहार जिन्दगी का

मीडियावाला.इन। आज कालोनी में बडी हलचल है । हर कौई उदास है , दुखी है ।   बहुत बूरा हुआ भाई ,,,,, ,,,,, घर चलाने वाले अकेले ही थे शुक्ला जी ,,,,,, ,,,,,,,, पिछले ग्यारह महीनों से इलाज चल...

प्यारी माँ

प्यारी माँ

मीडियावाला.इन। "मातृ दिवस"शुभकामनाएँ मां तारों की छइयां बन लोरी गा शिशु को सुलाती हो  शीतल  छांह बन दुलराती हो जीवन पथ के संग्राम से जूझना  सिखाती हो...

तीन सहेलियाँ, तीन प्रेमी

तीन सहेलियाँ, तीन प्रेमी

मीडियावाला.इन। ‘और बता क्या हाल है?’ ‘अपना तो कमरा है, हाल कहाँ है?’ ‘ये मसखरी की आदत नहीं छोड़ सकती क्या?’ ‘क्या करूँ आदत है, बुढ़ापे में क्या छोड़ूँ? साढ़े पाँच बज गए मेघना नहीं आई?’ ‘बुढ़ऊ झिला रहा होगा।’...

रोटियाँ

रोटियाँ

मीडियावाला.इन। रोटियाँ  उर्मिला शिरीष        यह तीसरा दिन था जब वह रोटियाँ वापस ले जा रही थी। रोटियाँ बैग में थीं... जिन्हें वह...

आत्म मु्ग्ध होना छोड़कर आलोचकों का आश्रय लें साहित्यकार..

आत्म मु्ग्ध होना छोड़कर आलोचकों का आश्रय लें साहित्यकार..

मीडियावाला.इन। - ताज नगरी में हुआ विश्व मैत्री मंच भोपाल का सातवां राष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलन  --देश भर से जुटे 75 कवि साहित्यकार, विमर्श के केंद्र में रही लघुकथा     विश्व मैत्री मंच भोपाल द्वारा  वैभव...