Wednesday, July 24, 2019

साहित्य

अधूरी ज़िंदगी का नायक ...वी एस नायपाल: विनम्र श्रद्धांजलि

अधूरी ज़िंदगी का नायक ...वी एस नायपाल: विनम्र श्रद्धांजलि

मीडियावाला.इन।  भारतीय मूल के नावेल पुरस्कार विजेता नायपाल नहीं रहे ...एक स्मरण   कुछ वर्ष पूर्व की घटना है |सुप्रसिद्ध लेखक रंगकर्मी ,अभिनेता ,विख्यात नाटक तुगलक के रचयिता गिरीश कर्नाड को मुंबई की एक संस्था द्वारा एक साहित्य...

रवीन्द्रनाथ  टैगोर की कहानी काबुलीवाला

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला

मीडियावाला.इन। रबिन्द्रनाथ टैगोर विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के  नोबल पुरस्कार विजेता हैं।  वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। टैगोर एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं – भारत का...

। विजय-पथ ।।

। विजय-पथ ।।

मीडियावाला.इन। । विजय-पथ ।। कभी लिखता हूँ, कभी बुनता हूं, अपने पसीने से माथे की लकीरें बदलता हूं कभी रूखी-सुखी खाकर, तो कभी थोड़े में गुजारा करता हूं मैं अपने हाथों की लकीरो को अपने श्रम से बदलता हूं...

कहानी: सुनो वत्स, सुनो

कहानी: सुनो वत्स, सुनो

            शुरुआत एक छोटी सी कहानी से,वत्स! एक गाँव में एक किसान का युवा पुत्र जेठ की चिलमिलाती धूप में सामान को ढोनेवाली अपनी गाड़ी ठीक कर रहा था ,उसका बूढा बाप उसे देख रहा था .आसमान आग बरसा...

मायका

मायका

मीडियावाला.इन।लघु कथा      सुशी सक्सेना         मम्मी पापा के गुजर जाने के बाद मायके जाने को दिल ही नहीं कर रहा था। एक कहावत जो सुन रखी थी कि " मां बाप से ही मायका होता है।" डरती थी...

कहानी :गिल्लू

कहानी :गिल्लू

मीडियावाला.इन।- महादेवी वर्मा सोनजुही में आज एक पीली कली लगी है। इसे देखकर अनायास ही उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की सघन हरीतिमा में छिपकर बैठता था और फिर मेरे निकट पहुँचते ही कंधे...

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

कालिदास की शेषकथा के अमर गायक

आज राष्ट्रकवि डा.शिवमंगल सिंह सुमनजी की जयंती है। सुमनजी, दिनकरजी की तरह ऐसे यशस्वी कवि थे जिनकी हुंकार से राष्ट्रअभिमान की धारा फूटती थी। संसद में अटलजी ने स्वयं की कविता से ज्यादा सुमनजी की कविताएँ उद्धृत की।...

खण्डित प्रतिमाएं

खण्डित प्रतिमाएं

राघव अभी भी मुँह बाए, आँखें फाड़े, जड़वत खड़े थे और वह भारी देह वाला छ: सवा छ: फुट का आदमी बड़े इत्मीनान से उसी कुएँ से पानी निकाल रहा था, जिसमें अभी कुछ देर पहले ही उसने एक...

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र

मीडियावाला.इन।  पाठकों के लिए   क्लासिक साहित्य  शृंखला में आज एक ख़ास कहानी  रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी : स्त्री का पत्र   लेकर आये है   कहानी : स्त्री का पत्र    पूज्यवर, आज पन्द्रह साल हुए...

वो जो भी है, मुझे पसंद है

वो जो भी है, मुझे पसंद है

मीडियावाला .इन   स्वाति तिवारी "कब आ रही हैं आप?" "परसों रात की फ्लाइट है... अच्छा मैं तुम्हें अपना टिकट मेल करती हूँ। तुम समय देख लेना।" "जी, आप बेफिक्र होकर आइए मैं आपको लेने पहुंच जाऊंगी।"...

माई री मैं टोना करिहों

माई री मैं टोना करिहों

मीडियावाला.इन। “ कहां से आ रही हो...ये तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ा हुआ है...फोन क्यों नहीं उठाया तुम लोगो ने..कितनी बार कॉल किया है..कुछ अंदाजा है तुम दोनों को...?”   दोनों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।...

अंतराल

अंतराल

मीडियावाला.इन। धूप लगातार तेज हो रही थी। लू ऐसी चल रही थी, मानो धूल का गुबार उड़ाकर मनुष्य का मजाक उड़ाना चाहती हो! शायद वह चुनौती दे रही थी कि मगना देखती हूँ, तू तेज चलता है या मैं?...

निगोड़ी

निगोड़ी

मीडियावाला.इन। रूपकान्ति से मेरी भेंट सन् १९७० में हुई थी. उसके पचासवें साल में. उन दिनों मैं मानवीय मनोविकृतियों पर अपने शोध-ग्रन्थ की सामग्री तैयार कर रही थी और रूपकान्ति का मुझसे परिचय ‘एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर’, अतिपाती तनाव से...

सुर्खाब: मामला भ्रामक है

सुर्खाब: मामला भ्रामक है

मीडियावाला.इन। श्री कालू राम शर्मा सुर्खाब पक्षी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चाएं आम हैं। चित्र, वीडियो और फोटो के साथ एक संक्षिप्त नोट भी होता है: “सुर्खाब का यह वीडियो बड़ी मुश्किल से बनाया गया है।” ज्योतिषियों...

कहानी : आढ़ा वक्त 

कहानी : आढ़ा वक्त 

तब गांव में इक्का दुक्का लोग ही जागे होंगे, जब अकेली सुभद्रा ने विदिशा स्टेशन आकर सीधे भोपाल की ट्रेन पकड़ ली थी। वह रात भर से दादा की तबियत बिगड़ने की खबर से हलकान थी। पप्पू के...

एक फलसफा जिन्दगी

एक फलसफा जिन्दगी

मीडियावाला.इन। ''शाम का अखबार पढ़ा?'' अमन ने शाम को दफ्तर से घर आकर अपनी टाई ढीली टाई ढीली करते हुए मेरी तरफ देखकर पूछा। ''नहीं, अखबार आया ही नहीं।'' ''मेरी फाइल के अंदर रखा है।'' अमन यह कहते हुए...

कहानी : तितली

कहानी : तितली

यह भी फरवरी की एक सर्द सुबह थी.  असल में उन्हें इतना अचम्भा न हुआ  होता जो उस मल्टीस्टोरीड इमारत के अट्ठारहवें माले के दूसरे टावर में उनके पहुंचते ही यह घटा न होता, उन्होने उस वारदात...

कहानी : तुम लोग

कहानी : तुम लोग

       घर के भीतर चूल्हे के अंदर कसमसाती है आग. कागज पर सवार होकर आग गीली लकड़ियों के उपर चढ़ती है और दम तोड़ने लगती है. कागज जलाने से पहले पढ़ती है उन पर लिखी हुई इबारत को. उनमें...

कहानी : हिवड़ो अगन संजोय

कहानी : हिवड़ो अगन संजोय

"ऐ तवा ल्यो, कड़ाही ल्यो, चिमटा ल्यो, दरांत ल्यो ...."  बलखाती हुई आवाज़ के साथ वह लचककर मूलिया दर्जी की दुकान के नुक्कड़ से घूमी तो चौराहे पर मौजूद नज़रें उसी दिशा में उठ गईं!  हर कदम के...

कविता : पचास पार की औरतों

कविता : पचास पार की औरतों

पचास पार की औरतों थोड़ी सी आंच अपने लिए बचा कर रखो  राख़ के ढेर मे बदलने से पहले  अपनी पसंद का कोई तंदूर चुन कर रख दो अपनी थोड़ी सी आंच  खुद को भस्म करने...