Wednesday, July 24, 2019

साहित्य

कहानी : डर

कहानी : डर

लड़की के साथ गैंग रेप। भीगा तैलिया आंगन में फैलाते हुये उसके कानों में टी.वी. पर आती आवाज टकराई। लॉबी में रखा टी.वी. लगातार अमंत्रित करता है ब्रकेंग न्‍यूज् किचन की ओर जाते उसकी निगाह टी.वी. पर पड़ती...

कहानी : नदी के तहखाने में 

कहानी : नदी के तहखाने में 

उसे बता दिया गया था कि वहाँ जाने के अधिकांश  रास्ते बंद हो गए हैं। उसने अपनी पत्नी को बताया।  -''फिर?'' -''तुम चिंता मत करो। अपने घर-गाँव पहुँचने के लिए हम सरकारी रास्तों...

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

कविता : सादर श्रद्धांजलि आ. परम पूज्य नर्मदा पुत्र श्री वेगड़ जी को

आज मै दुःखी हूँ उदास हूँ  मेरा पुत्र प्रस्थान कर गया  महा लोक को देव लोक को अंजुली की रेत बिखर गई  महा शून्य शेष रहा मै उसमे नहीँ रची बसी वह मेरी बूँद बूँद मे...

कहानी : कतरे हुए पंख

कहानी : कतरे हुए पंख

वह किशोरी थी या युवती, कहना मुश्किल था। लड़की थी, बड़ी हो रही थी, पर मुझे तो प्रौढ़ा लगती थी। सुबह के ठीक नौ बजे गेट खड़काती और बिना मालिक के अनुमति के इंतजार किए धड़ाधड़ घोड़े पर सवार...

कहानी : सावन की झड़ी

कहानी : सावन की झड़ी

"भाभी, निबंध लिखवा दो!" चीनू ने उसका ध्यान खींचा।  "किस विषय पर?" चीनू की स्कूल डायरी उठा, फिर से नजर बरामदे की ओर लग गयी। जब से सुषमा बरामदे में खड़ी हुई है और उधर...

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

1-    मंत्रालय की आपातकालीन बैठक हुई और फलां महापुरुष की जयंती का राजकीय अवकाश घोषित| 2-    कैबिनेट मीटिंग में शहरों के बदलने का प्रस्ताव हुआ सर्वसम्मति से पारित| जी हाँ, अब माननीयों की मीटिंगें देश की अन्य समस्याओं...

 कहानी : हत्यारे

 कहानी : हत्यारे

(# अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कहानी ' द किलर्स ' का हिंदी में अनुवाद) ------------------------------------------------------------------------------- - मूल लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे  - अनुवाद : सुशांत सुप्रिय  ------------------------------------------------------------------------------- ' हेनरी भोजनालय ' का दरवाज़ा...

कविता : एब्स्ट्रैक्ट

कविता : एब्स्ट्रैक्ट

तुम्हें लगता है मेरा अक्स - एब्स्ट्रैक्ट लगना भी चाहिए - तुम्हें ! एब्स्ट्रैक्ट हूँ मैं - झूठ और  नाइंसाफ़ी के बीच इंसाफ़ में ... इंसानियत और नफ़रत की दीवारों पर ठुंकी कीलों से झूलती रस्सी की...

कहानी : पुतली घर

कहानी : पुतली घर

सुबह नाश्ता करते हुए टीवी देखना लगभग आदत में शुमार हो चुका था |वीडियो क्लिपिंग सहित खबर आ रही थी कि वर्षों पुरानी कठपुतली कालोनी पर आवास विकास के कारिदों ने कल धावा बोल दिया | अब वहां एक...

कहानी : अभी ही जाना था पापा को

कहानी : अभी ही जाना था पापा को

      'यू हैव ए न्यू मेल!' कम्प्यूटर के स्क्रीन ने लाल सितारे के साथ संदेश दिया.       'ओके'। माउस क्लिक हुआ.       ई-मेल का जाल फैला. मेल खुला. स्क्रीन पर संदेश टिड्डी की तरह...

व्यंग : उलटे लटकते हम और सीधा होता उल्लू

व्यंग : उलटे लटकते हम और सीधा होता उल्लू

ख़बर क्या थी, साक्षात वाइरल होता वीडियो ही था। सीन कुछ यों था कि एक पेड़ था। पेड़ की डाल पर एक बन्दा एकदम उलटा लटक रहा था। ठीक वेताल की तरह। यों वह वेताल नहीं था, क्योंकि उसके...

कहानी : लौट आना ली...

कहानी : लौट आना ली...

वह एक उदास सी शाम थी। धुआँई सी पीली। दूर क्षितिज में गुम होता एक नन्हा नारंगी शावक आसमान की गर्भ से सरक रहा था चुपचाप। आसमान की देह निचुड़ कर साँवली हो गई थी, उदास, कमजोर, और बेजार।...

कहानी : ऊँची बोली

कहानी : ऊँची बोली

मीडियावाला.इन। समाचारों में माँ को उनकी हत्या लाई थी। कारण दो थे। पहला, पप्पा ने माँ के लापता होने पर दर्ज करवाई गई अपनी एफआईआर में जिस बृजलाल का नाम संभावित अपहर्ता के रूप में...

कहानी : रंग ढंग

कहानी : रंग ढंग

मीडियावाला.इन। दफ्तर में तेजी से काम करती शाश्व ती अपनी कर्मठता और दक्षता के बल पर पूरे ऑफिस को अपनी मुट्ठी में कैद करने का जादू जानती थी । जब बॉस केबिन में बुलाकर उससे...

कविताएं - रीता दास राम

कविताएं - रीता दास राम

1  गीला मन  भीगी भीगी औरतें  भरी-भरी आँखें  पसीने से तर-बतर  संस्कृति की जुगाली पर  खींच रही जिंदगी  खोलते हुए बंधन  एक एक इंच गांठ  गर्भाशय को मशीन  शब्द...

व्यंग - बिगड़ा हुआ कूलर और एक अदद ठेले वाले की तलाश!

व्यंग - बिगड़ा हुआ कूलर और एक अदद ठेले वाले की तलाश!

मुझे एक ठेले वाले की तलाश थी, जो घर से कूलर उठाकर मेकेनिक की दूकान तक पहुंचा दे| मेरा कूलर खराब हो गया था| मुझे पता नही था कि इस बीच दुनिया काफी बदल चुकी है| आजकल कूलर सुधारने...

कविता : आनंद कुमार शर्मा

कविता : आनंद कुमार शर्मा

साहित्य की लगभग सभी विधाओं में दखल रखने वाले श्री आनंद शर्माजी का आज जन्म दिन है और आज इस खास अवसर पर हम यहाँ उनकी एक खुबसूरत सी कविता प्रकाशित कर रहे है|  ...

कविताएँ : पंखुरी सिन्हा

कविताएँ : पंखुरी सिन्हा

खील बताशा कविता खील बताशे, कविता मेरी दोस्त, कविता कुल्हिया, चुकिया, कविता तीज त्यौहार, कविता गीत मल्हार, कविता गली नुक्कड़, कविता चौक चोराहा, कविता धरी बातें, कविता बातों में लौटना, कविता बातों का विसर्जन, कविता दराजों में...

कहानी : कार्यशाला बनाम बातशाला

कहानी : कार्यशाला बनाम बातशाला

शालिनी का आज दफ्तर में पहला दिन था। सुबह से काम कुछ न किया था बस परिचय का दौर ही चल रहा था। बड़े साहब छुट्टी पर थे सो पूरा दफ्तर समूह बनाकर खिड़कियों से छन-छन कर आती धूप...

कहानी : एक ढोलो दूजी मरवण...तीजो कसूमल रंग

कहानी : एक ढोलो दूजी मरवण...तीजो कसूमल रंग

महानगर की चहल - पहल में मेरे आगे कई तरह के मौन - मुखर प्रेम गुज़रते रहे हैं.  कई महान प्रेम मेरे सामने - सामने ही अपनी चमक खो बैठे. दो बरस पहले आंख के आगे गुज़रा वह प्रेम...