Monday, August 26, 2019

व्यंग

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

सुशील सिद्धार्थ--कुछ बेतरतीब नोट्स / ज्ञान चतुर्वेदी

मीडियावाला.इन।किसी बहुत अच्छे लेखक के बारे में यह जानने और लिखने की कोशिश करना कि वह इतना अच्छा क्यों है, वास्तव में एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। विद्वान व्यंग्य विशेषज्ञ लोगों की शिकायत भी है कि व्यंग्य को समझने और...

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

लास्ट इम्प्रेशन ही लेटेस्ट इम्प्रेशन

मीडियावाला.इन।क्या मेरी तरह आपको भी बचपन की  फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता की याद आती है ,कभी हम गांधी बनते थे , और कभी विवेकानन्द ,एक बार जब मैं आठवीं में थी तब मैं एक भटकी आत्मा बनी थी। काला बुरके जैसा...

एक अखबार में विज्ञापन देखा

एक अखबार में विज्ञापन देखा

मीडियावाला.इन।  “लिखा है, विदाई के वक़्त कैसे रोये, 7 दिन का क्रेश कोर्स….हरी अप”। ये क्या? मैंने दोबारा आँखें  चौड़ी करके देखा ,फिर वही दिखा। आगे देखा तो लिखा था  विदाई के समय दुल्हन की सहेलियों और...

गासिपिंग के नए अड्डे

गासिपिंग के नए अड्डे

मीडियावाला.इन। गासिपिंग हमारे भारतीय समाज का एक अतिमहत्वपूर्ण अंग है। इसके बिना समझो हमारी दुनिया,सभ्यता और संस्कृति सूनी है। हमारे यहाँ ये परंपरा आदि काल से प्रचलित है। जहां तक ज्ञात है नारद मुनि इसके जनक माने...

भाई के घर ब्याव और मेजबान--  कुतरु और मिठ्ठु---

भाई के घर ब्याव और मेजबान-- कुतरु और मिठ्ठु---

मीडियावाला.इन। हमारे भाई ने पाले है—एक कुतरु एक मिठ्ठु। कुतरु का नाम—शैगी मिठ्ठु हमारा –राजा।   लगभग साथ साथ लाये गये दोनों। अब दोनों में दोस्ती है। जब भाई के घर जाओ--- मिठ्ठु चिल्लाकर बुआ आई खुशीयां लाई खुशियां...

बीमारी, तीमारदारी, दुनियादारी

बीमारी, तीमारदारी, दुनियादारी

मीडियावाला.इन।  सुशील सिद्धार्थ बीमारियाँ जीवन दर्शन के वृक्ष की शाखाएँ हैं। किसी भी शाखा में लटक जाइए किसी न किसी ज्ञान में अटक जाएँगे। बीमार शब्द ही अद्भुत है। अस्वस्थ कहने से हाय हाय के कैनवास पर मुर्दनी, बदहाली, तबाही...

कुछ बात है कि गाली मिटती नहीं हमारी

कुछ बात है कि गाली मिटती नहीं हमारी

मीडियावाला.इन। कुछ दिन पहले  तेरह साल के एक बच्चे की प्रतिभा जान कर मैं खुशी से बेजान सा हो गया।इस बच्चे नेपरीक्षा में कम नंबर आने पर अपने ही अपहरण की सफल योजना बनाई थी।पुलिस की मूर्खता सेयोजना असफल हो ...

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

व्यंग्य : नाम और जयंती संस्कृति

1-    मंत्रालय की आपातकालीन बैठक हुई और फलां महापुरुष की जयंती का राजकीय अवकाश घोषित| 2-    कैबिनेट मीटिंग में शहरों के बदलने का प्रस्ताव हुआ सर्वसम्मति से पारित| जी हाँ, अब माननीयों की मीटिंगें देश की अन्य समस्याओं...

व्यंग : उलटे लटकते हम और सीधा होता उल्लू

व्यंग : उलटे लटकते हम और सीधा होता उल्लू

ख़बर क्या थी, साक्षात वाइरल होता वीडियो ही था। सीन कुछ यों था कि एक पेड़ था। पेड़ की डाल पर एक बन्दा एकदम उलटा लटक रहा था। ठीक वेताल की तरह। यों वह वेताल नहीं था, क्योंकि उसके...

व्यंग - बिगड़ा हुआ कूलर और एक अदद ठेले वाले की तलाश!

व्यंग - बिगड़ा हुआ कूलर और एक अदद ठेले वाले की तलाश!

मुझे एक ठेले वाले की तलाश थी, जो घर से कूलर उठाकर मेकेनिक की दूकान तक पहुंचा दे| मेरा कूलर खराब हो गया था| मुझे पता नही था कि इस बीच दुनिया काफी बदल चुकी है| आजकल कूलर सुधारने...

व्यंग : चिंकारा होने की आज़ादी - प्रेम जन्मेजय

व्यंग : चिंकारा होने की आज़ादी - प्रेम जन्मेजय

मीडियावाला.इन। मेरे दांत में भयंकर दर्द था। जब दर्द भयंकर हो तो आप दर्द के अतिरिक्त और कुछ नहीं सोच पाते हैं। वह दर्द रोटी का हो, बेरोजगारी का हो, फसल बरबाद होने का हो...

व्यंग्य - कद की कवायद

व्यंग्य - कद की कवायद

मीडियावाला.इन। व्यंग्य विधा के जाने-माने साहित्यकार स्व. सुशील सिद्धार्थ  आज होते तो वे इस टीम का हिस्सा होते, अफ़सोस पोर्टल शुरू होने के पहले ही वे असमय चले गए | सुशील सिद्धार्थ का जाना दुखद, बेहद दुखद। अविश्वसनीय...