Monday, September 23, 2019
अब तो चल कर दिखाइए सरकार

अब तो चल कर दिखाइए सरकार

mediawala.in

​​​​​देश में नई सरकार बने दस दिन हो रहे हैं लेकिन सरकार अभी भी चुनावी खुमार से बाहर नहीं निकली है।केवल सरकार ही नहीं बल्कि विपक्ष भी इसी खुमार में डूबा है ,देश सेवा का संकल्प अभी भी खूंटी पर लटका हुआ है ।और लगता भी नहीं है कि देश की सियासत चुनावी खुमार से मुक्त हो पाएगी ।
दुर्भाग्य कि बात है कि देश में सियासी सौजन्य स्थापित ही नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने केरल दौरे के समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी और केरल वाले बयान को लेकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर अविश्वास जताते हुए कहा कि वह गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं और उनसे उन्हें सहयोग की कोई अपेक्षा नहीं है। लोकसभा चुनाव में वायनाड संसदीय सीट से सांसद चुने जाने पर मतदाताओं को धन्यवाद दे रहे राहुल गांधी ने दावा किया कि सत्तारूढ़ भाजपा 'घृणा और क्रोध' में अंधी है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों को न मानने वालों को भारतीय भी नहीं मानती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इससे निपटने का संकल्प भी जताया।
दूसरी तरफ श्रीलंका से लौटकर तिरुपति मंदिर में दर्शन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर तंज कसा। बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कुछ लोग चुनाव परिणामों के प्रभाव से अभी भी बाहर नहीं निकल पाए हैं, ये उनकी मजबूरी है। उन्होंने  ने कहा कि चुनाव जीतना, ये चुनाव के समय चुनाव के मैदान में करना होता है लेकिन जनता जनार्दन का दिल जीतना हमें 365 दिन करते रहना है। यही वजह है कि देश ने हमें इतना बड़ा जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि हमें सरकारें भी बनानी है और देश भी बनाना है और इसलिए सरकार का उपयोग भी देश बनाने के लिए होना चाहिए, दल को बढ़ाने के लिए करना न हमारी प्रवृत्ति और न ही उस प्रकार से काम करने के आदी हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में जनसंपर्क ये हमारा नित्य कर्म है, जनसंवाद हमारी कार्यशैली का हिस्सा है, जनसंग्रह हमारी निरंतर विस्तार की प्रक्रिया का रूप है और जनहित हमारा लक्ष्य है
देश में इस तरह के टकराव से विकास का बंद दरवाजा खुलता दिखाई नहीं दे रहा क्योंकि चौरफा टकराव ही टकराव नजर आ रहा है।
बंगाल ,जम्मू- कश्मीर,के अलावा अनेक गैर भाजपा शासित राज्य अभी भी भाजपा के निशाने पर है ।प्रधानमंत्री पूरे देश को आश्वस्त करने में कामयाब नहीं हुए हैं ,जबकि प्रचंड जनादेश के बाद प्रधानमंत्री जी को विनम्रता का नया अध्याय आरम्भ करना था ।देश में चुनावों का एक अखंड चक्र चलता रहता है और सत्तारूढ़  दल की विवशता है कि वो उसमें जूझता  ही है,देश को कांग्रेस रहित बनाने का एक संकल्प सामने जो है ।
सत्तारूढ़ दल का अजेंडा पहले से तय है ,जबकि विपक्ष अभी भी सन्निपात में है,उसके पास फिलहाल कोई कार्ययोजना दिखाई नहीं देई ।सब अपने-अपने वजूद के लिए संघर्षरत हैं ।संसद के पहले स्तर में विपक्ष सरकार के साथ कैसा व्यवहार करेगी और सरकार ने विपक्ष के साथ कैसा बर्ताव करने का मन बनाया है ये भी पता नहीं है।लोकसभा अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के चुनाव में यदि पहले की तरह सौजन्य न रहा तो फिर पूरे पांच साल गाल बजाने की राजनीति चलेगी।संसद में हंगामा होगा या सड़कों पर ड्राम होगा जनादेश देने वाली जनता ठगी सी देखती रह जाएगी ।इसलिए दायित्व सभी का है की पुरानी रिवायतों को महफूज रखा जाए ।अति संघर्षण से चंदन भी आग उगलने लगता है,ये तो सियासी दल ही ही है पहरेदार साहब 

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।