Monday, September 23, 2019
हरिवंश : पत्रकार से राज्य सभा के उपसभापति तक का सफर

हरिवंश : पत्रकार से राज्य सभा के उपसभापति तक का सफर

हरिवंश जी का जवाब नहीं !
हरिवंश जी विज़नरी  पत्रकार रहे  हैं, वे अच्छे सांसद भी माने जाते हैं और अब वे राज्यसभा के सफल उपसभापति भी साबित होंगे, इसमें कोई शक नहीं है। 

धर्मयुग में मुझसे पहले की पीढ़ी के,  मेरे वरिष्ठ रहे, आजीवन सक्रिय पत्रकारिता करने वाले हरिवंश जी के राज्यसभा का उपसभापति बनने पर वास्तव में खुशी का एहसास हो रहा है। उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता के बारे में कुछ कहना नहीं चाहता, लेकिन एक पत्रकार के रूप में उन की  प्रतिबद्धता हमेशा अपने पेशे के प्रति बनी रही। अपने जूनियर्स  के साथ हमेशा मानवीय व्यवहार करने वाले और बेहद संवेदनशील पत्रकार हरिवंश ने प्रभात खबर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े रहे हरिवंश जी ने पत्रकारिता की शुरुआत टाइम्स ऑफ इंडिया समूह में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में की थी।  बाद में वह धर्मयुग में उपसंपादक हुए और फिर उसके बाद  आनंद बाजार समूह की पत्रिका रविवार  में सुरेंद्र प्रताप सिंह के साथ चले गए। 1989 में उनके नेतृत्व में रांची से  प्रभात खबर शुरू किया गया था, जिसने पत्रकारिता में कई  कीर्तिमान स्थापित किये। 
प्रभात खबर ने ही  सबसे पहले दशरथ मांझी के संघर्ष को उद्घाटित किया था।

वे हमेशा ही सक्रिय, सजग, प्रतिबद्ध, विचारवान और दूरदृष्टिवाले संपादक मने जाते रहे।  उनके सहकर्मी उन्हें बेहद आदर के साथ याद करते हैं। अपने ओहदे का तनिक भी  गुमान किए बिना वे हर छोटी बड़ी बात पर ध्यान रखते हैं। 

उन्होंने  जीवन में जो कुछ भी किया, निष्ठापूर्वक किया। जब चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री बने थे तब  वे उनके एडिशनल मीडिया एडवाइजर थे, उन्हें पता था कि चंद्रशेखर जी इस्तीफ़ा देने वाले हैं, लेकिन उन्होंने अपने उस पद की गरिमा का ध्यान रखा और अपने अखबार प्रभात खबर में भी उस खबर को प्रकाशित नहीं किया।

हरिवंश जी सन 2014 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे और वे ऐसे उम्मीदवार थे, जिन्हें राज्यसभा तक पहुंचने के लिए एक रूपया  भी खर्च नहीं करना पड़ा।  राज्यसभा के लिए नामांकन फार्म की कीमत ₹10000 थी, जो उन्होंने खरीदा था, लेकिन जब निर्विरोध चुने गए तब  उन्हें वह राशि वापस मिल गई इस तरह ₹1 भी खर्च किए बिना राज्यसभा के सदस्य बने। 

मजेदार बात यह है कि जब वे उपसभापति बने और सभापति वेंकैया नायडू ने उन्हें आसंदी संभालने के लिए कहा तब आसंदी संभालते ही उन्होंने  सभी सदस्यों का अभिवादन किया और उसके बाद जो पहला वाक्य कहा था उससे सदन में ठहाके गूँज गए। वह वाक्य था --''सदन दो बजे तक के लिए स्थगित किया जाता है."
 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।