Monday, October 22, 2018
कार्तिकेय की पत्तल में लड्डू देखना चाहते हैं पंगत में बैठे मंत्री-सांसद-विधायक 

कार्तिकेय की पत्तल में लड्डू देखना चाहते हैं पंगत में बैठे मंत्री-सांसद-विधायक 

इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के वो सारे विधायक-सांसद जो अपने पुत्र, बहू या अन्य किसी पारिवारिक सदस्य को टिकट दिलाना चाहते हैं ये सब मुख्यमंत्री पुत्र कार्तिकेय को टिकटोद्धारक की नजर से देख रहे हैं। भाजपा को राज्य में चौथी बार सत्ता प्राप्त करने के लिए पहली बार इतनी मशक्कत करना पड़ रही है, एक एक सीट जीतना उसके लिए अहम है।बीते सिंहस्थ में शिव-साधना पुत्र कार्तिकेय की उज्जैन में धार्मिक लांचिंग तो हो ही गई थी है।उसके बाद से वे प्रदेश के स्थानीय निकाय के उप चुनाव, नर्मदा परिक्रमा यात्रा समापन, संकल्प यात्रा से लेकर विधानसभा उपचुनाव तक धुंआधार भाषण से अपनी राजनीतिक काबिलियत भी साबित कर चुके हैं ।

अब जबकि चुनाव में भाजपा अपने कई विधायकों-सांसदों को आराम देकर उन सीटों के लिए नए चेहरे 

तलाश रही है तो राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सरकार के मंत्री माया सिंह, गोपाल भार्गव सहित अन्य विधायक अपने पुत्रों के उज्जवल राजनीतिक भविष्य के लिए कार्तिकेय सिंह की तरफ आशाभरी नजरों से देख रहे हैं।उनकी इस तिकड़म के पीछे लड्डू-बाफले की पंगत वाली चाल है कि पड़ोसी की पत्तल में लड्डू परोसने का आग्रह करेंगे तो अपनी पत्तल में स्वत: लड्डू आएगा ही। ये सारे नेता चाह रहे हैं कि शिवराज पुत्र को विधानसभा का टिकट मिलता है तो उन्हें भी अपने कुलदीपकों के लिए हक मांगने का अधिकार मिल जाएगा, फिर वंशवाद जैसे आरोप भी नजरअंदाज हो जाएंगे।  


भारतीय जनता पार्टी मप्र में विधानसभा चुनाव टिकट वितरण में नए चेहरों पर अधिक भरोसा करेगी यह बात छन छन कर आ रही है। तो क्या ये नए चेहरे विधायक-सांसद और सत्तर पार नेताओं के परिवार से हो सकते हैं? यह इसलिए कि परंपरागत सीट से लड़ते-जीतते आ रहे नेताओं के बदले परिवार के नए चेहरे को टिकट देने से सीट निकालना आसान हो जाएगा पर इस नीति के अपनाने से कहीं भाजपा पर भी कांग्रेस वाले वंशवाद के आरोप ना लग जाएं, यही चिंता सता रही है। बहरहाल इन नेता पुत्रों ने सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता से इतनी पहचान तो बना ही ली है कि इनके नाम पर विचार करने में पार्टी को ज्यादा खोजबीन नहीं करना पड़ेगी। 


इंदौर से लगातार आठ बार सांसद-लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी पुन: प्रत्याशी बनाएगी इस पर संदेह है ऐसे में वे अपने पुत्र मंदार महाजन या बहू को क्षेत्र क्रमांक तीन से विधानसभा टिकट देने का आग्रह कर सकती हैं, इसे टालना संगठन के लिए संभव नहीं होगा। वैसे भी इस क्षेत्र से विधायक उषा ठाकुर को लेकर पार्टी में असंतोष है, पार्टी उनके विकल्प पर विचार भी कर रही है।जिले का सबसे छोटा और मराठी बहुल क्षेत्र होने से महाजन परिवार के किसी सदस्य को टिकट मिलने पर जीत आसान भी हो सकती है। 


फिर लोकसभा कौन लड़ेगा? 


इंदौर से लोकसभा के लिए यदि सुमित्रा महाजन को नहीं  लड़ाया जाता है तो भाजपा से प्रत्याशी कौन होगा? फिलहाल दो नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं कृष्ण मुरारी मोघे और कैलाश विजयवर्गीय।दोनों इंदौर के महापौर रहे हैं, वर्तमान में पूर्व सांसद मोघे गृनिमं अध्यक्ष हैं तो विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।मोघे की सक्रियता इन दिनों बड़वाह विस क्षेत्र में भी बढ़ी हुई है, वे यहां से भी टिकट मांग सकते हैं।महू में विजयवर्गीय का अब पहले जैसा आकर्षण नहीं रहा, इंदौर संसदीय क्षेत्र से उनका नाम चलने का यह भी एक कारण है। ऐसी स्थिति में महू से उनके पुत्र आकाश विजयवर्गीय को इस शर्त पर संगठन टिकट दे सकता है कि विजयवर्गीय-मेंदोला की जोड़ी इंदौर की अन्य सीटों पर भी पार्टी की जीत के लिए धन बल लगाएं।मेंदोला खेमा भी चाहता है कि आकाश महू से लड़े क्योंकि दो नंबर से रमेश मेंदोलो को दो लाख पार से रेकार्ड जीत की रणनीति तय कर रखी है, मेंदोला को टिकट मिलना तय है, पर वे यह क्षेत्र छोड़ना नहीं चाहते हैं, वैसे क्षेत्र क्रमांक तीन में भी इन दिनों अधिक  सक्रिय हैं ।   

समीप के उज्जैन संभाग में पूर्व मंत्री-राज्यसभा सदस्य डॉ सत्यनारायण जटिया के पुत्र राजकुमार भी लंबे समय से आगरमालवा में अपनी जमीन तैयार करने में लगे हैं। उज्जैन में यदि जटिया अपने किसी समर्थक को टिकट दिलाने में कामयाब नहीं हो पाते हैं तो अपने पुत्र के लिए आगरमालवा से टिकट मांग सकते हैं।यहां से डॉ जटिया भी विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी राजनीतिक विरासत को राजकुमार आगे बढ़ाने में लंबे समय से सक्रिय हैं। 

इसी तरह शाजापुर से सांसद मनोहर ऊंटवाल अपने पुत्र संतोष के लिए आलोट से टिकट के लिए प्रयासरत हैं। लोकसभा के लिए पार्टी अधिकांश सीटों पर नए चेहरे उतार सकती है जिसमें शाजापुर भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में ऊंटवाल भी चाहते हैं कि पार्टी के फैसला उन पर भारी न पड़े इस दृष्टि से पुत्र को आलोट से मौका मिल जाए।

पाल में गोविंदपुरा सीट बाबूलाल गौर की जीत का पर्याय बन चुकी है लेकिन क्या इस बार पुन: गौर को पार्टी टिकट देगी, क्योंकि सत्तर पार के कथित नियम का हवाला देते हुए गौर और सरताज सिंह इन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। यदि उम्र का यही बंधन टिकट में बाधक बनता है तो गोविंदपुरा से वे अपनी बहू कृष्णा गौर को टिकट दिए जाने का दबाव बना सकते हैं। इंदौर के भाजपा नेता मदन सिंह यादव की बहन कृष्णा गौर भोपाल की महापौर रही हैं।यादव समाज का प्रतिनिधित्व करने वाला परिचित नाम हैं, इन्हीं सारे कारणों से गोविंदपुरा सीट से उनका नाम तय माना जा रहा है।

  • कार्तिकेय सिंह चौहान 
  • कृष्णा गौर 
  • आकाश विजयवर्गीय
  • मंदार महाजन   
  • राजकुमार जटिया
  • संतोष ऊंटवाल 

                    

 

         

 

 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


संपर्क : 8989789896