Wednesday, September 18, 2019
अध्यक्ष के रास्ते सिंधिया की मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश

अध्यक्ष के रास्ते सिंधिया की मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश

मीडियावाला.इन।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बेचैनी और छटपटाहट अब छुपाये नहीं छुप पा रही । वे केवल मप्र कांग्रेस अध्यक्ष तक रुकना नहीं चाहते , बल्कि असल मंशा श्यामला हिल्स स्थित नव श्रृंगारित मुख्यमंत्री आवास में एक-दो साल रहना चाहते हैं । राजनीतिक रूप से सिंधिया कतई गलत नहीं सोच रहे और ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने वक्त गलत चुना है ।गड़बड़ यह है कि वे मप्र के कांग्रेसी दिग्गजों के बीच आज भी सर्वमान्य नहीं हैं ।इसमें भी उनकी ऐसी कोई गलती या कमतरी नहीं है कि वे राजघराने में पैदा हुए और राजसी ठसक आज भी बरकरार है । बहरहाल ।

  पहले तो यह जान लें कि आलाकमान उनके खिलाफ नहीं है , लेकिन ऊपर मजबूत किलेबंदी कर खड़े सिपहसालार रुकावटें बिछा देते हैं ।दिग्विजयसिंह सबसे बड़ा रोड़ा हैं । माधवराव सिंधिया से चली आ रही खुन्नस अभी कायम है । राजपूती वचनबद्धता या हेकड़ी इसके मूल में है । मुश्किल और दिलचस्प पहलू यह है कि सामने राघोगढ़ से कई गुना बड़ा राजघराना और राजसी अहंकार खड़ा है । अभी तक की हकीकत यह है कि राघोगढ़ का पसीना व्यर्थ नहीं बहा और ग्वालियर का खून ज्यादा गर्माहट नहीं दिखा पाया । इस बार लग रहा है कि छोटे सिंधिया बड़े ठाकुर को गढ़ी में लौटने को विवश कर देंगे ।

   सिंधिया यकायक उम्मीद से तब हो गए, जब मई में लोकसभा नतीजों ने गांधी परिवार को आईना दिखाया । तब कुछ स्वर काफी तेज उभरे कि किसी युवा और गैर गांधी को कांग्रेस की कमान सौंप देनी चाहिए । जो नाम हवा में उड़े उनमें सिंधिया भी थे , लेकिन यह ज्योति जल्द ही बुझ गई और अंततः गांधी(सोनिया) से कांग्रेस मुक्त नहीं हो पाई ।

   इसके बाद मप्र में नए अध्यक्ष की कवायद शुरू हुई तो नवंबर 2018 में मुख्यमंत्री पद से एन वक्त वंचित कर दिए गए सिंधिया ने फिर उम्मीद की ज्योत रोशन कर डाली । इस बार उनके समर्थक मंत्री-विधायक खुलकर सामने आ गए । इस बीच विरोधियों ने भी मुंह में दही नहीं जमाया, बल्कि यह कहकर रायता फैलाने की कोशिश की कि सिंधिया भाजपा में जाकर मुख्यमंत्री बनने की जुगत लगा रहे हैं । इसे हवा यूं मिली कि दिल्ली में सिंधिया ने अमित शाह से मुलाकात की , जिसका सबब बीसीसीआई के अध्यक्ष का चुनाव था, जिसे सिंधिया लड़ना चाहते हैं।पहले अमित शाह और अब उनका बेटा गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष है । इस नाते यह मुलाकात थी । वैसे , सिंधिया अपनी दादी और बुआओं की पार्टी में आकर क्यों अपना धर्म संकट बढ़ाएंगे ?

   हां , मप्र कांग्रेस अध्यक्ष पद की ख्वाहिश इसलिए है कि एकाध साल इस पर रहकर मुख्यमंत्री पद का दावा पुख्ता कर लेंगे । वैसे भी स्वास्थ्य कारणों से कमलनाथ वल्लभ भवन के वातानुकूलित कक्षों से बाहर निकल नहीं पाते और पहले दिग्विजयसिंग, फिर शिवराज सिंह ने गांव-गली-डगर नापकर मुख्यमंत्री की यायावरी छवि गढ़ दी है , जो कमलनाथ से निभाई नहीं जा रही ।

 

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

स्थानीय संपादक - पीपुल्स समाचार,इंदौर                               

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प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

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कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० १९९० में एक दैनिक अखबार के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985

० म.प्र., छत्तीसगढ़ व राजस्थान के विधानसभा चुनाव 2013 के तमाम विश्लेषण सटीक रहे, जिनमें सीटों का भी उल्लेख था।

० 2014 के लोकसभा चुनाव में म.प्र. की सीटों का विश्लेषण शत-प्रतिशत व देश में भाजपा की 260 व गठबंधन की 300 सीटों का सटीक आकलन। साथ ही 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का प्रकाशन भी किया, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 


सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकाारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।


विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।


मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।


किताबें- इंदौर के सितारे (2014), इंदौर के सितारे भाग-2(2015) , इंदौर के सितारे भाग-3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) सहित 7 किताबें प्रकाशित ।


भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी


रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार 


संप्रति- भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण, दबंग दुनिया, आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में नियमित लेखन।