Wednesday, December 12, 2018
लोकमाता की साड़ी देखने आए थे मोटा भाई ! 

लोकमाता की साड़ी देखने आए थे मोटा भाई ! 

मीडियावाला.इन। पैदल तो चले नहीं, खुली जीप में भी आधा ही महाजनसंपर्क किया और कार से निकल लिए

बाकी किसी की समझ में आए ना आए अपनी तो समझ में आ गया है कि मोटा भाई राजवाड़ा क्यों आए थे ? वो देखने आए थे कि लोकमाता देवी अहिल्या साड़ी में कैसी लगती हैं ! वैसे तो सफेद संगमरमर की प्रतिमा में लोकमाता साड़ी पहने हुए ही दर्शाई गई हैं। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष पहली बार राजवाड़ा आए थे तो लोकमाता को भी मूर्ति वाली साड़ी के ऊपर सुर्ख गुलाबी बार्डर वाली सफेद साड़ी पहनाई थी। इससे पहले मनीं 223वीं पुण्यतिथि ही नहीं अन्य कई अवसर पर भी किसी को याद ही नहीं रहा कि लोकमाता को साड़ी पहनाएं। महापौर से लेकर सुमित्रा महाजन उनकी प्रतिमा पर ऐसे ही माल्यार्पण करती रहीं। आज मोटाभाई आए तो लोकमाता को भी नई निकोर साड़ी मिल गई। 


लोकमाता भी धन्य हुईं, बाकी तो कोई और कारण समझ नहीं आया उनके राजवाड़ा आने का। जिस राजवाड़ा पर अटल जी की सभा सुनने के लिए पैर रखने की जगह मुश्किल से मिलती थी उस ऐतिहासिक जगह पर बड़ी पार्टी के सबसे बड़े नेता को देखने इतने कम कार्यकर्ता क्यों थे, इसके कारणों से पार्टी के पदाधिकारी शायद ही मोटा भाई को संतुष्ट कर पाएं। इससे अधिक भीड़ तो यहां कांग्रेस के पूर्व विधायक अश्विन जोशी के आजादी दिवस की पूर्व रात्रि वाले संगीत समारोह में या क्रिकेट में भारत की जीत पर बिन बुलाए राजवाड़ा प्रेमियों की हो जाती है।मोटाभाई सीधे दशहरा मैदान ही चले जाते तो लोकमाता या महालक्ष्मी माता श्राप तो देती नहीं। कामकाजी दिन में शहर के मध्य क्षेत्र में उनके इस आगमन से बेवजह चार-पांच घंटे लोग परेशान होते रहे।पुलिस प्रशासन का हमेशा से सारा ध्यान वीवीआयपी पर रहता है लिहाजा लोगों को तो परेशान होना ही था।कृष्णपुरा क्षेत्र के ही आधे दुकानदार तो एक दूसरे से पूछते रहे कि वो आगए या गए? गणेश केप मार्ट वाले तिराहे पर देवी अहिल्योत्सव समिति के मंच से जो गदा भेंट की गई उस गदा से उनका माथा ऐसा ठुकाया कि भन्नाए हुए मोटाभाई वहीं से गाड़ी में बैठकर दशहरा मैदान की तरफ रवाना हो गए।पता नहीं नगर अध्यक्ष गोपी नेमा ने कैसे कह दिया था कि पैदल महाजनसंपर्क करेंगे, मीडिया से बात करेंगे।जेड सिक्योरिटी वाले ऐसे खुले में पैदल चलते हैं क्या। पैदल चलते तो बस उन्हें अटल जी की अंतिम बिदाई में ही देखा था, यहां तो बस प्रतिमा पर माल्यार्पण, महालक्ष्मी मंदिर दर्शन और एक इत्र दुकानदार से खुशबू बटोरने जितना ही चल पाए।रही बात मीडिया से चर्चा वाली तो पीएमजी हों या मोटा भाई जाने क्यों सारा मीडिया इन्हें रविश कुमार लगता है। राजवाड़ा से आधा कृष्णपुरा मार्ग के खुली जीप वाले महाजनसंपर्क अभियान में मुख्यमंत्री, प्रदेशअध्यक्ष राकेश सिंह भी साथ थे।शिवराज को भी लग रहा होगा इससे तो मेरी जनआशीवार्द यात्रा में अच्छा मजमा रहता है।


तो मान लें घबराहट है .....
महा जनसंपर्क अभियान से लेकर बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए इंदौर और उसके बाद झाबुआ, जावरा और उज्जैन। जिस तरह से स्थान चयन किया गया है वो संकेत है कि इन शहरों में भाजपा की हालत इंदौर के जर्जर पुल सी हो गई है।मंदसौर में किसान आंदोलन-गोलीकांड, उज्जैन में केंद्र सरकार और पार्टी के खिलाफ असंतोष का उदाहरण बनी करणी सेना-सपाक्स की ऐतिहासिक रैली और मालवा निमाड़ क्षेत्र में काले झंडे वाले विरोध के फैलते दायरे से चिंतित संगठन को समझ आ गई है कि मामा के कथा-प्रवचन के भरोसे नहीं रहा जा सकता।मालवा निमाड़ क्षेत्र की 66 सीटों में जिस दल का जादू चल जाता है उसकी सरकार बन जाती है।2008 के विस चुनाव में भाजपा  को 40 सीटें मिली, 2013 में भाजपा की बढ़त 56 पर पहुंच गई थी। इंदौर संभाग में 37 और उज्जैन संभाग की 29 कुल 66 सीटों में से भाजपा को इस बार पिछले चुनाव जितनी (56) सीटें मिलना संभव नहीं लगता। मोटा भाई का इंदौर, झाबुआ, जावरा और उज्जैन का यह दौरा फिलहाल तो प्रभावी कम फ्लॉप शो अधिक रहा है। इस दौरे से मोटाभाई को बाहुबली मानने वालों को भी अहसास हो गया होगा कि बैठकों में उनका जितना भी आतंक रहता हो, उनकी एक आवाज पर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पेट्रोल के दाम में ढाई रु कम कर देते हों लेकिन भीड़ तो पीएमजी के नाम पर ही जुटती है। 
 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


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