Wednesday, June 19, 2019
आखिर कब तक हम शर्मसार होते रहेंगे ?

आखिर कब तक हम शर्मसार होते रहेंगे ?

मीडियावाला.इन।

जेसिकालाल से लेकर निर्भया और अब ऐसी अनेक घटनाएं ,भूलिए मत इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली कठुआ और उन्नाव गैंग रेप की घटनाओं से लेकर इन दिनों देश में हो रही घटनाओं पर नजर डालिए, उसके पीछे की विकृत मानसिकता, युवाओं का भटकाव, इंटरनेट की सुलभता और इससे जुड़े कारणों को खोजना होगा।

रोजाना खबरें पढ़िए, और शर्मसार होइए, क्योंकि अब आपके पास कोई चारा ही नहीं बचा है, सिवाए शर्मिंदगी के। हर आधे घंटे में एक 'बच्ची' का बलात्कार हो रहा है और हर घंटे इंसानियत शर्मसार. 

 हालांकि इस तरह की घटनाएं पहली या आखिरी बार नहीं हो रही हैं । एक दिन हम शर्मसार होना भी छोड़ देंगे ,तब दुनिया हम पर शर्मसार  होगी ,कहेगी एक देश ऐसा भी -------जहाँ ---? दिल्ली की निर्भया से लेकर जेसिका लाल तक कितनी तरह के कांड सामने आते रहे हैं । मोमबतियां जला कर जंतर मंतर पर कितनी बार प्रदर्शन किए गये । सवाल यह कि क्या इनका कोई असर पडा ? या इनका किसी ने नोटिस लिया ? उत्तरप्रदेश के अलीगढ के टप्पल में मारी गई ढाई साल की बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद रोंगटें खड़े हो जाते हैं। दरिंदगी की इंतहा की गई। एक हाथ शरीर से अलग कर दिया। मासूम बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में शामिल डॉ.के के शर्मा ने बताया कि यह पहला पोस्टमार्टम था, जिसमें उनकी रूह कांप गई। सात साल से पोस्टमार्टम कर रहा हूं, लेकिन ऐसा केस पहले कभी नहीं सामने आया। 

मासूम को दरिंदों ने इस कदर मारा कि की  उसकी नेजल ब्रिज (नाक व माथे को जोड़ने वाली हड्डी) और एक पैर में फ्रेक्चर तक हो गया। जिसके चलते बच्ची की मौत शॉक की वजह से होना पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है। अलीगढ़ के टप्पल थाना क्षेत्र के मोहल्ला कानून गोयान निवासी ढाई साल की मासूम 30 मई को लापता हो गई थी। दो जून की सुबह शव घर के पास ही कूड़े के ढेर पर मिला था। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हवाले से कहा कि बच्ची के हाथ और पैर टूटे थे। शरीर की कई अन्य हड्डियां भी टूटी हैं।  रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्ची की किडनी व यूरिनरी ब्लेडर नहीं पाया गया। बच्ची का सीधा हाथ धड़ से अलग था। इसकी वजह से उस जगह पर कीड़े पड़ चुके थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने हत्या तीन से चार दिन पूर्व होने की संभावना जताई है। 

यानि बच्ची की हत्या 30 मई को लापता होने के बाद ही कर दी गई थी। इस वजह से शव सड़ चुका था। जगह-जगह कीड़े पड़ चुके थे।  रिपोर्ट में मौत का कारण डॉक्टरों ने शॉक ड्यू टू एंटी मार्टम इंजरी लिखा है। मेडीकल एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति जब होती है जब किसी को कोई सदमा बैठता है।  

 देशभर में अलीगढ़ की घिनौनी घटना का मामला अभी ठंडा ही नहीं हुआ था कि एक बार फिर उज्जैन में ऐसी ही एक और शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। उज्जैन के लालपुल इलाके में  5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई है।दादा-दादी के पास सो रही 5 साल की बालिका का अपहरण कर उससे दुष्कर्म कर हत्या करने वाले बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हैवान पड़ोसी ही निकला। पीएम रिपोर्ट के अनुसार आरोपित ने पहले मासूम के साथ ज्यादती की। फिर खुद की पहचान छुपाने के लिए र्ईंट से चेहरा कुचल दिया। इसके बाद बच्ची को जिंदा ही शिप्रा नदी में फेंक दिया। दरिंदगी ऐसी थी कि बच्ची के चेहरे पर पांच फ्रैक्चर मिले। दिल दहला देने वाली घटना से हड़कंप मच गया। 

                       मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार सुबह  मंडवा बस्ती के पास नाले में एक नौ साल की बच्ची का शव मिला। बताया जा रहा है कि बच्ची शनिवार रात 8 बजे से लापता थी। इसके बाद से ही परिजन उसकी तलाश कर रहे थे, इस बारे में कमला नगर थाना पुलिस को भी शिकायत की गई थी। पुलिस ने शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जिसमें बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या करने की बात सामने आई है।

                           फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, उधर पुलिस इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने की कोशिश कर रही है। इस मामले में परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाए हैं, समय रहते अगर उसकी तलाश शुरू की जाती तो वह मिल जाती। लेकिन पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। बच्ची का शव जैसे ही हमीदिया अस्पताल पहुंचा, वहां आए परिजनों ने हंगामा किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए गृहमंत्री बाला बच्चन ने एएसआई और 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने की बात कही है। गृहमंत्री ने कहा कि पुलिस ने सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं। आरोपी जल्द ही पुलिस की पकड़ में होगा, उसकी पहचान कर ली गई है। इसके साथ ही संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। मामले की जांच के लिए 20 अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।

                            इन घटनाओं के सम्बन्ध में भारत में मेंटल हेल्थ और चाइल्ड एब्यू़ज के क्षेत्र में काम कर रहे एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपराधी हम में से कोई भी हो सकता है और वे हमारे घरों में या घरों के आसपास ही रहते हैं. बच्चों के साथ रेप या यौन शोषण करने वाले ज्यादातर लोग घर के आसपास के ही होते हैं.एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट कहते है कि 'यौन हिंसा और क्रूरता जैसे खतरनाक व्यवहार जो हम देखते हैं, ऐसा लगता है कि हर दूसरा व्यक्ति एक मनोरोगी है. जबकि उसे मदद की जरूरत है, अपराधी को समझने की जरूरत है कि वो कहां से आ रहे हैं?' इस तरह के घिनौने अपराधों को अंजाम देने वाले लोगों का बैकग्राउंड देखें तो अधिकांश में एक बात कॉमन पाई जाती है कि इनके अतीत में हिंसा का एक इतिहास रहा होता है- छोटे-छोटे कारण भी जो समय के साथ विचलित व्यवहार में तबदील होते चले जाते है ,

                         उज्जैन वाली घटना के आरोपी ने स्वीकार किया  कि  वह मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखता और नशा भी करता था। इसी कारण बच्ची को उठा ले गया। ज्यादती के दौरान वह जाग गई और पहचान लिया, इस कारण उसकी हत्या की। यहाँ सवाल यह है कि मोबाइल पर अश्लील विडिओ ?क्या कभी हमने इस बात पर गौर किया की सस्ते मोबाईल ,फ्री इंटरनेट का क्या प्रभाव पड़ रहा है , कई बार मैंने देखा है गली मोहल्लों के बच्चे खास कर झुग्गी झोपडी और स्लम के वे बच्चे, जिनके घरों का वातावरण  गरीबी का है, पर आसपास सुविधा सम्पन्न  लोग रहते है, जिनसे एक तुलनात्मक जीवनशैली उन्हें प्रभावित करती है, वे समूह में या अकेले  किसी कोने या सुने क्षेत्रों में मोबाइल पर कुछ देख रहे होते है ?क्या ? निश्चित ही वे वही कुछ देख रहे होते है जो नहीं देखा जाना चाहिए , अधकचरा ज्ञान सबसे खतरनाक होता है .दरअसल पोर्न साइट भरमार में उपलब्ध है। स्थिति यह है कि किसी के सामने मोबाईल खोलने से पहले सोचना पड़ता है, कुछ गलत ना आ जाय ?अभी हाल ही में किसी विडिओ कांफ्रेंसिंग की खबर पढने में आई थी कि हाईलेवल मीटिंग के दौरान पोर्न साइट खुल जाने पर हडकंप मच गया था । तो हमें ,समाज, और सरकारों को यह सोचना होगा कि  नेट और मोबाइल अपराध के कितने विकृत कारण बनते जा रहे है। सुविधाएँ पतन का कारण भी बन रही है 

इस तरह की घटनाएं और दरिंदगी रोकने के लिए हमें उसकी तह में जाना होगा कि आखिर आज के युवाओं में इस तरह की विकृत भावनाएं क्यों जन्म ले रही है और इसके पीछे क्या कारण है । अगर वक्त रहते नहीं चेता गया तो इस तरह घटनाएं दिन ब दिन बढ़ती जाएंगी और इसके दुष्परिणाम आगे भी भुगतने पड़ेंगे .

सच लगती हैं अब ये पंक्तियाँ बेटियों  पर 

- हाथ लगाओ तो डर जाएगी, बाहर निकालो तो मर जाएगी। ये पंक्तियां मछलियों से कब बेटियों तक पहुंच गई...इसका जवाब किससे और कब तक मांगें ?

 

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