Tuesday, October 15, 2019
औसत लव इन केदारनाथ

औसत लव इन केदारनाथ

मीडियावाला.इन। कहा जाता है कि प्रेम शाश्वत होता है, इसलिए प्रेम कहानियां भी शाश्वत होती है। प्रेम कहानियों में दो पात्र होते है और बॉलीवुड में लगभग सभी फिल्मों में ये दो पात्र समान ही होते है। इनके बीच एक गहरी खाई होती है। इनके परिवार वाले होते है, जो प्रेम के खिलाफ होते है। परिस्थितयां होती है और प्रेम परवान चढ़ते-चढ़ते दुखांत या सुखांत तक पहुंचता है। हिन्दी में प्रेम कहानियां सुखांत ज्यादा होती है। दर्शकों को यही पसंद है। हीरो अमीर होगा तो हीरोइन गरीब, हीरो उच्च जाति का होगा, लड़की उच्च जाति की नहीं होगी, उन दोनों के धर्म अलग-अलग हो सकते है, उनके बीच देश की सीमाएं भी हो सकती है और उम्र की सीमाएं भी। पात्र और पृष्ठभूमि अलग होती है। जैसे 1942 लव स्टोरी का बैकड्राफ्ट स्वतंत्रता संग्राम था, जैसे बाम्बे का बैकड्राफ्ट मुंबई के दंगे थे, टाइटेनिक में डूबता हुआ जहाज था, वैसे ही इस फिल्म के पार्श्व में केदारनाथ है। केदारनाथ है, तो पर्यावरण की बात भी होगी। पिट्ठू वाले मुस्लिमों और ब्राह्मणों की चर्चा भी होगी और वीएफएक्स का इस्तेमाल करके 4 साल पहले की केदारनाथ की महाजलप्रलय की भी चर्चा होगी। 

लोगों ने केदारनाथ से बहुत ज्यादा आशाएं लगा रखी थी। फिल्म ठीक-ठाक है बस। देख सकते है और नहीं भी देख सकते है। अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान अपनी मां जैसी लगती है और सुशांत सिंह राजपूत केदारनाथ के पिट्ठू वाले। सारा अली खान फिल्म में ब्राह्मण पुजारी की बेटी कम और सैफ अली खान - अमृता सिंह की बेटी ही ज्यादा लगी है। सुशांत सिंह ने बहुत मेहनत की, लेकिन पता नहीं क्यों, वह प्रभाव नहीं दिखा पाए। फिल्म है, तो फार्मूले ही फार्मूले है। जिद्दी सी नकचढ़ी हीरोइन, पारंपरिक ब्राह्मण परिवार, घर वालों की तरफ से शादी-ब्याह के दबाव, बीच में धर्म की दीवार, आर्थिक खाई, विकास के नाम पर निर्माण कार्य, एक-दूसरे पर मर-मिटने के वादे और कस्में और अंत में होई है, जो राम रचि राखा। खेल खत्म, पैसा हजम। 

कई दर्शकों को लगता है कि अभिषेक कपूर ने बेमन से फिल्म बनाई है। इसके पहले वे रॉक ऑन और काई पो चे जैसी फिल्म बना चुके है। अच्छा लगता है कि फिल्म में केदारनाथ का फिल्मांकन सुंदर तरीके से किया गया है, जो लोग केदारनाथ नहीं गए, वे फिल्म देखकर संतोष कर सकते है। शुरुआत से ही केदारनाथ के दृश्यों को जैसे दिखाया गया, उससे दर्शकों के मन में केदारनाथ का भूगोल समझ में आने लगता है। फिल्म का कई जगह विरोध भी किया गया था, क्योंकि इसमें ब्राह्मण लड़की और मुस्लिम युवक का प्रेम दिखाया गया था। फिल्म में कुछ डाॅयलाग भी है, जो सांप्रदायिक सौहार्द्रता का प्रतीक है। फिल्म की खूबी यह है कि यह केवल 2 घंटे की है। पहला घंटा नकचढ़ी हीरोइन के नखरे देखते-देखते बीत जाता है और दूसरा प्रेम की ट्रेजडी देखते-देखते। 

कहावत है कि नेवर जज ए बुक बाय एट्स कवर। उसी तरह कहा जा सकता है कि नेवल जज ए मूवी बाय एट्स ट्रेलर। कई फिल्मों का ट्रेलर बहुत अच्छा होता है, लेकिन फिल्म सामान्य निकलती है। यह भी अच्छे ट्रेलर वाली सामान्य लव स्टोरी है। 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।