Wednesday, September 18, 2019
मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है ?

मेरे अँगने में तुम्हारा क्या काम है ?

मीडियावाला.इन।

भोजपुरी फिल्मों के नायक रविकिशन हमारे चंबल में राजयसभा सांसद प्रभाद झा के बेटे की पैरवी करने आये तो सबको हैरानी हुई ।भाजपा वालों की तो भवें तन गयीं ।तनना ही चाहिए ।ग्वालियर चाम्ब्ल में दूसरों के हाथों से लगाए पौधे पनपते ही नहीं हैं ये न प्रभात जानते  हैं और न उनके मित्र रविकिशन महाराज ।
प्रभात झा ने ग्वालियर में भाजपा के जन्म से लेकर बहुत बाद तक फर्श बिछाने और उठाने से लेकर बड़े-बड़े नेताओं की सेवा करने का श्रमसाध्य काम किया ,जिसका समुचित पारितोषक उनकी पार्टी ने उन्हें दिया ।पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी से लेकर राष्ट्रीय सचिव और राज्य सभा तक पहुंचा दिया ।वे जब ग्वालियर में थे तब अपने प्रभाव से राशन की एक दूकान का लायसेंस तक हासिल नहीं कर पाए थे क्योंकि तब प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता थी और जब उनकी पार्टी सत्ता में आयी तो वे पूरी तरह से पल्ल्वित-पुष्पित हो गए ।उन्होंने जिस तरह का कारोबार पसंद किया पार्टी ने उन्हें करने के अवसर दिए ।वे मुखर्जी भवन के एक संकरे  से कमरे से निकलकर दिल्ली के मीना बाजार तक में एक आलीशान इमारत के स्वामी बन गए ।
झा साहब की प्रगति से रश्क करने वाले पार्टी और पार्टी के बाहर तमाम लोग हैं ,मैंने जैसे-तैसे अपने आपको इस जलन से बचाकर रखा ।अब झा साहब की मुश्किल ये है  की  वे अपनी राजनीतिक विरासत के लिए अपने बेटे को ग्वालियर-चंबल की सियासत में स्थापित नहीं कर पाए ।राज्य में पंद्रह   साल भाजपा की सरकार रही लेकिन झा साहब के बेटे को विधायक का तो दूर पार्षद का टिकिट नहीं मिल पाया ,या यूं समझिये की झा साहब दिला नहीं पाए ।झा साहब के बेटे के मुकाबले ज्यादा सक्रिय केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह के बेटे इसमें सबसे बड़ी बाधा बने रहे। नरेंद्र सिंह ने जब अपने बेटे के लिए टिकिट की जुगाड़ नहीं देखी तो झा साहब के बेटे की जुगाड़ वे कैसे करने देते ?
एक जमाने में झा साहब   ने ग्वालियर-चंबल की राजनीति में जगह बनाने के लिए खूब हाथ-पांव मारे लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली यहां तक यहां तक की उनकी समर्थक समीक्षा गुप्ता को न विधान सभा का टिकिट मिला और न महापौर का।हालात ये बने की वे बाग़ी तक हो गयीं झा साहब भी पार्टी के निर्देश के बावजूद उन्हें नहीं मना सके थे ।ऐसी स्थिति में अपने बेटे तुष्मुल के लिए जगह बनाना आसान नहीं दिखाई दिया तो उन्होंने अपनी सांसद निधि को इसका हथियार बनाना बेहतर समझा ।झा साहब ने सांसद निधि के चैक वितरण के लिए नवनिर्वाचित भाजपा सांसद और सिने स्टार रवि किशन को न सिर्फ ग्वालियर भेज दिया बल्कि उनके मुंह से कहलवा भी दिया की वे झा साहब के बेटे तुष्मुल को विधायक बना देखना चाहते हैं ।
तुष्मुल को विधायक बना देखने का रविकिशन का सपना बिहार के लोग तो पूरा कर सकते हैं ग्वालियर-चंबल के नहीं।इसके लिए तो झा साहब को ही झोली फैलाना पड़ेगी ,क्योंकि उन्होंने एक लम्बे समय तक पार्टी के लिए यहां काम किया है ।वे भले अंचल में लोकप्रिय न हुए हों किन्तु जनता उनके नाम-काम से परिचित तो है ही ।बहरहाल सियासत में विरासत सौंपने के लिए भाजपा ही नहीं कांग्रेस के अनेक नेता सक्रिय हैं लेकिन कामयाबी अभी किसी को नहीं मिली ।भाजपा में न यशोधरा को अपने बेटे के लये अवसर मिला और न ध्यानेन्द्र-माया सिंह को ।नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे तो सक्रिय होकर भी अवसर से वंचित हैं ,अनूप मिश्रा ने इस बारे में कोशिश की ही नहीं ,शेजवलकर तो अभी खुद मैदा में हैं ।कांग्रेस में भी कमोवेश यही हाल है ।
मुझे लगता है की आने वाले विधानसभा चुनाव में नेताओं की नयी पीढ़ी ही सामने नजर आएगी लेकिन इसके लिए उन्हें अभी से अपने लिए मैदान बनाना पडेगा कोई फ़िल्मी सितारा उनके लिए मैदान नहीं बना सकता ।नयी पीढ़ी के लोगों को नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे रामू की तरह सक्रिय होना सीखना पड़ेगा ।हमें भी औरों की तरह अपनी नयी पीढ़ी का बेसब्री से इन्तजार है ।

 

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।