Monday, July 22, 2019
पानी में मीन पियासी रे

पानी में मीन पियासी रे

मीडियावाला.इन।सत्रहवीं लोकसभा के लिए चुनाव प्रचार थमने में अब कुछ ही दिन बाक़ी है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अपनी अंतिम चुनावी सभा अपने निर्वाचन क्षेत्र काशी में कर 23 मई तक के लिए आराम करने चले जायेंगे .खबर है की मोदी जी वोट मांगने नहीं बल्कि काशी की जनता का आभार प्रकट करने जा रहे हैं .उन्होंने पांच साल पहले गुजरात छोड़कर काशी का वरण किया था और अब काशी के ही होकर रह गए हैं .
काशी को क क्वेटो बनाने की कोशिश कर रहे हसरी नरेंद्र मोदी की कोशिश दोबारा सरकार बनाने की भी है लेकिन पांच साल में न काशी क्वेटो बनी और न पुरानी काशी ही रह गयी .उन्होंने काशी को बदलने की भरपूर कोशिश की लेकिन काशी तो काशी है ,बदलने का नाम ही नहीं ले रही .काशी को बदलना भी नहीं चाहिए ,बेहतर होता की मोदी जी नूतन काशी बसा देते और पुरातन काशी को संरक्षित कर देते ,लेकिन होता तो वो ही है जो बाबा विश्वनाथ की मर्जी हो ?
हम हिन्दुस्तानियों की ईश आस्था का कोई मुकाबला नहीं है.हमारी आस्थाएं बेहद मजबूत हैं.हमारी आस्थाओं के स्रोत भले ही दूषित हो गए हों,[जैसे गंगा ]लेकिन हमने उन्हें तजा नहीं है ,हम उन्हें साफ़ भी नहीं कर रहे हालांकि सरकार ने भारी-भरकम बजट इस काम के लिए दिया .बात चुनाव की चल रही है ,तो अब 23 मई को बाबा विश्वनाथ की मर्जी का पता चलना है की वे मोदी जी से खुश हैं या नाखुश .बाबा की मर्जी जनता की मर्जी से अलग हो ऐसा हो नहीं सकता ,यानी जो जनता चाहेगी बाबा विश्वनाथ उसी पर अपनी मुहर लगाएंगे .बाबा तो बाबा हैं आखिर .
लोकसभा के इन चुनावों ने लोकतंत्र की एक नयी परिभाषा गढ़ी है ,इस नयी परिभाषा में गालियां,धमकिया,और चुनौतियां शामिल हैं .इस चुनाव से लोकतंत्र मजबूत होगा या कमजोर ये कहना कठिन है लेकिन जो होगा सो अच्छा ही होगा क्योंकि हम भविष्य के प्रति आशान्वित रहने वालों में से हैं .मोदी आएं या और कोई इससे हमें कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है .फर्क देश के भविष्य पर पड़ेगा इसलिए आखरी चरण के मतदान में अवाम को बहुत संजीदगी के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए .
सत्रहवीं लोकसभा की तस्वीर एकदम नयी होगी,इस लोकसभा में पुराने चेहरे लगातार कम दिखाई देंगे और इन चेहरों की कमी हमेशा खलेगी .अब नयी लोकसभा को नए सिरे से अपना चरित्र गढ़ना होगा .इस लोकसभा में अधिकाँश चेहर नए होंगे और जो पुराने होंगे वे ही मार्गदर्शक होंगे .जो भी सत्ता में आएगा वो अनुभव की कमी दूर करने के लिए दूसरे सदन की इमदाद जरूर लेगा ,क्योंकि मंजे हुए लोग इस बार मैदान से गायब हैं या गायब कर दिए गए हैं .
बहरहाल दुनिया बदल रही है इसलिए भारत भी बदलेगा .सरकार भी बदलेगी देश की तस्वीर भी बदलेगी.हमें इस बदलाव का स्वागत करने के लिए दरियादिली के साथ अंतिम चरण के मतदान में उतरना चाहिए .यही लोकतंत्र की जरूरत है .पानी में रहकर प्यासा रहना हास्य ही पैदा करता है और काशी में रहकर किसी का निहोरा करना तो और भी ज्यादा हास्यास्पद है,क्योंकि काशी तो काशी है न रे बाबा !
**

 

0 comments      

Add Comment


राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।