Wednesday, July 24, 2019
असंतुष्टों से मेलजोल का मकसद कहीं पार्टी पर दबाव बनाना तो नहीं?

असंतुष्टों से मेलजोल का मकसद कहीं पार्टी पर दबाव बनाना तो नहीं?

मीडियावाला.इन।

 इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन 'ताई' के राज्यपाल बनने की एक अफवाह ने पिछले दिनों माहौल को गरमा दिया था! दिनभर बधाइयाँ चलती रही! 'ताई' के समर्थकों ने खुशियाँ मानना शुरू कर दिया था! लेकिन, बाद में पता चला कि अभी उन्हें ऐसी कोई ये जिम्मेदारी नहीं दी गई! लेकिन, इस अफवाह ने ये सवाल खड़ा जरूर कर दिया कि क्या वास्तव में सुमित्रा महाजन राज्यपाल बनेंगी? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है! इसके बाद 'ताई' ने दिल्ली में जिस तरह भाजपा के असंतुष्ट नेताओं के यहाँ मेलजोल का चक्र चलाया, उसने नया शिगूफा छेड़ दिया कि आखिर 'ताई' को असंतुष्टों के घर जाने जरुरत क्यों महसूस हुई! क्या वे पार्टी पर इसके जरिए कोई दबाव बनाना चाहती है?    

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 भारतीय जनता पार्टी की पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन अपने राजनीतिक पुनर्वास का इंतजार कर रही है! उन्हें भरोसा है कि पार्टी ने उनका लोकसभा चुनाव का टिकट 75 साल के फॉर्मूले के तहत काटा था, अब उसकी भरपाई किसी और पद पर नवाज सकती है! ये पद राज्यपाल भी हो सकता है! जो भाजपा अकसर करती रही है! सुमित्रा महाजन अकेली महिला नेता नहीं है, जिन्हें पुनर्वास का इंतजार हो! सुषमा स्वराज और उमा भारती भी ऐसे ही किसी पद की बाट जोह रही है! हाल ही में देशभर में सुमित्रा महाजन के राज्यपाल बनने की अफवाह के बाद उनके समर्थकों को ये विश्वास हो चला है, कि पार्टी जल्द ही ऐसा कोई फैसला कर सकती है! लेकिन, ऐसा होगा ही, इसका दावा नहीं किया जा सकता! क्योंकि, राजनीति में जब तक नतीजा सामने नहीं आ जाए, किसी अनुमान के आधार पर धारणा नहीं बनाई जा सकती!   

  सुमित्रा महाजन 1989 से 2014 तक लगातार 8 बार इंदौर से सांसद चुनी गई। वे अटलबिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री भी रहीं। नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे लोकसभा अध्यक्ष थीं! लेकिन, अब वे सभी दायित्वों से मुक्त हैं! उन्हें राज्यपाल बनाया ही जाएगा, अभी ये सिर्फ कयास ही है! इससे हटकर दिल्ली में उनका भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से जाकर मिलना ज्यादा बड़ा मसला बन गया! वे लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू समेत कई ऐसे नेताओं से उनके घर जाकर मिलीं, जो अभी राजनीति की मुख्यधारा में नहीं हैं! लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज दोनों लोकसभा चुनाव नहीं लड़े और अभी आराम की स्थिति में हैं! जबकि, वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति जरूर बना दिए गए, पर बताते हैं कि वे खुश नहीं हैं! 'ताई' ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भी मुलाकात की! 'ताई' की कोशिश तो राजनाथ सिंह से भी मिलने की थी, पर उन्होंने मिलने का समय नहीं दिया! पार्टी में अब सुगबुगाहट इस बात को लेकर है कि 'ताई' का इन नेताओं से मिलने के पीछे असल मंतव्य क्या है? लोकसभा अध्यक्ष के पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी से मिलने का कभी समय नहीं निकाला! अब ऐसी क्या जरुरत पड़ गई कि सुमित्रा महाजन उनके घर पहुंची और ट्विटर पर इस बात का जिक्र भी किया?  

  इन मुलाकातों के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मैसेज भी डाले! लालकृष्ण आडवाणी से मिलने के बाद उनका ट्वीट था 'आज सुबह माननीय आडवाणीजी के घर जाने का अवसर मिला। मेरे संसदीय जीवन 1989 से 2019 तक एक जूनियर सांसद से स्पीकर के पद की यात्रा में मुझे आपका अनुशासन, दिशादर्शन और अनुभव का लाभ सदैव मिला। आपको ईश्वर स्वस्थ रखते हुए दीर्घायु प्रदान करें।' ऐसा ही संदेश सुषमा स्वराज  आने के बाद भी सोशल मीडिया पर घूमा! उन्होंने लिखा 'आज ही पूर्व विदेश मंत्री माननीय सुषमा स्वराजजी से भी उनके निवास पर मुलाकात की! मेरा सुषमाजी के साथ संसद, सरकार और परिवार सब जगह का रिश्ता है! मैं उनके भाषणों की प्रशंसक हूँ! ईश्वर से सुषमाजी को स्वस्थ्य और दीर्घायु जीवन प्रदान करें! पूर्व राष्ट्रपति से मिलने के बाद उनका संदेश था 'पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जीजी से भेंट की। उन जैसे अनुभवी गुणी व्यक्तित्व से सदैव मार्गदर्शन मिला। हृदयपूर्वक धन्यवाद।  उन्हें मेरी देवी अहिल्या पर लिखी पुस्तक 'मातोश्री' भेंट की। ईश्वर से प्रणवदा के स्वस्थ्य दीर्घायु जीवन की प्रार्थना! फिर मिलने आऊंगी!' 'ताई' की इस मिलन सक्रियता को पार्टी के नेता अलग ही नजरिए से देखा जा रहा है!        

  भाजपा नेताओं को लग रहा है कि जब पार्टी ने उनके राजनीतिक पुनर्वास को लेकर अभी कोई विचार नहीं किया है! सुमित्रा महाजन शायद इसे लेकर ही पार्टी पर दबाव की राजनीति बना रही है! क्योंकि, 'ताई' को टिकट से वंचित करने का कारण सिर्फ 75 साल वाला फार्मूला नहीं था! इसके अलावा भी कई ऐसे कारण रहे हैं, जो पार्टी ने उनको टिकट नहीं दिया! एक कारण उनके बेटे मंदार महाजन है, जिसे टिकट दिलाने के लिए उन्होंने हरसंभव कोशिश की! 'ताई' ने अपनी तरफ से पार्टी को जो पैनल दिया था उसमें मंदार महाजन के अलावा सब बेहद कमजोर नाम थे! खुद के टिकट पाने की कोशिश में जब 'ताई' की दाल नहीं गली तो उन्होंने बेटे को आगे किया, लेकिन भाजपा के जानकारों ने पार्टी के दिल्ली दरबार को हर सच्चाई से अवगत रखा! इसके बाद अम्बेडकर जयंती पर जब सुमित्रा महाजन लोकसभा परिसर में हुए कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली गईं थी, तब ये समझा जा रहा था कि शायद टिकट को लेकर अटका हुआ मसला सुलझ जाएगा और 'ताई' फिर इंदौर का नेतृत्व करने में सफल रहेंगी! लेकिन, बताते हैं कि नरेंद्र मोदी ने वहाँ भी उनको कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी थी! 

   अब, सुमित्रा महाजन के समर्थक उनके महाराष्ट्र के राज्यपाल बनने को लेकर कुछ ज्यादा ही आशांवित हैं! क्योंकि, महाराष्ट्रीयन होने से उनका मध्यप्रदेश राजनीति के मराठी समुदाय में ज्यादा प्रभाव रहा है! लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद उनकी महाराष्ट्र में सक्रियता भी ज्यादा रही है। उनका जन्म स्थान भी महाराष्ट्र है। लेकिन, यदि पार्टी ऐसा कोई फैसला करती है, तो उनके छत्तीसगढ़ की राज्यपाल बनने की संभावना ज्यादा है। इसलिए कि छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक राज्यपाल का पद अगस्त 2018 से खाली है।  लोकसभा अध्यक्ष होने के कारण उनके पास संसदीय कार्य का अनुभव तो है! अभी प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ही अतिरिक्त प्रभार के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

  सुमित्रा महाजन को महाराष्ट्र की राज्यपाल नियुक्त किए जाने संबंधी मैसेज जब सोशल मीडिया पर चले! भाजपा पदाधिकारियों तक ने 'ताई' को बधाई देने में देर नहीं की! बाद में पता चला कि ऐसा कोई आदेश ही नहीं हुआ! ऐसे में सोशल मीडिया पर नेताओं की ये बधाई चर्चा का विषय बन गई! उज्जैन से सांसद रहे चिंतामण मालवीय ने अपने ट्वीटर हैंडलर पर लिखा 'महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर 'ताई' सुमित्रा महाजन को बहुत बहुत शुभकामनाएं। भाजयुमो अध्यक्ष अभिलाष पांडे ने लिखा 'आदरणीय ‘ताई’ सुमित्रा महाजन जी को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएं।' एक केंद्रीय मंत्री ने भी बधाई देने  नहीं की! इन नेताओं ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को सही मानते हुए, बधाई देना शुरू कर दिया था। जबकी, पार्टी की तरफ से इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई। अभी भी कहा नहीं जा सकता कि ऐसा कुछ होगा! लेकिन, उनकी असंतुष्टों से मेल मुलाकात की घटना ज्यादा बड़ा मसला बन गया है! इसे उनकी भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है! 

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हेमंत पाल

तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में संलग्न। नवभारत, नईदुनिया (इंदौर, भोपाल) और जनसत्ता (मुंबई) में कार्य किया। नईदुनिया में लम्बे समय तक चुनाव डेस्क प्रभारी। राजनीतिक और फिल्म और टीवी पत्रकारिता में परीचित नाम। देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन। राजनीतिक और फिल्म स्तंभकार। फिलहाल 'सुबह सवेरे' के इंदौर संस्करण में स्थानीय संपादक।


संपर्क : 9755499919