Thursday, October 24, 2019
तू क्यों पूजे रफाल !

तू क्यों पूजे रफाल !

मीडियावाला.इन।

पूजा-पाठ से मेरी  असहमति  कभी  नहीं  रही ।मै इस मामले में कभी अपनी श्रीमती तक को नहीं टोकता क्योंकि पूजा-पाठ निजी आस्थाओं का मामला है लेकिन जब देश  का रक्षा मंत्री   रफाल  पूजने  फ्रांस   जाता  है तब  मै अपने  आपको  रोक नहीं पाता और टोका-टाकी पर उतर आता हूँ  ।यकीनन  दशहरे पर देश के एक बड़े हिस्से में शस्त्र पूजन की परम्परा है लेकिन ये किसी सरकार की परम्परा नहीं है। देश की सरकार केवल हिन्दुओं की नहीं सबकी है,सबकी ही नहीं बल्कि संविधान के मुताबिक़ धर्मनिरपेक्ष है इसलिए संविधान की शपथ लेकर भारत सरकार में मंत्री बने किसी भी महापुरुष को ये शोभा नहीं देता की वो पूजा-पाठ जैसे निजी क्रियाकलाप को राष्ट्रीय बनाने का उपक्रम करे ।
भारतीय वायुसेना को रफाल की जरूरत है इसलिए उन्हें खरीदा जाना चाहिए,धूम-धाम से भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल किया जाना चाहिए लेकिन उसके लिए पूजा-पाठ का काम किसी प्रहसन से ज्यादा नहीं लगता ।सरकार की ओर से कहा गया  है कि हमारे रक्षा मंत्री जी रफाल की डिलीवरी लेने गए हैं जबकि रक्षा मंत्रालय बता रहा है कि रफाल को भारत आने  में अभी  कम  से कम  एक-डेढ़ साल लगेगा,सवाल ये है कि फिर ये नौटंकी क्यों ?आखिर रफाल एक लड़ाकू विमान है कोई खिलौना नहीं ।
देश में भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की 40  टुकड़ियां चाहिए,लेकिन इतनी हम अभी तक जुटा नहीं पाए।रफाल के आने के बाद भी हमारे पास कम से कम 13  और टुकड़ियों की जरूरत रहेगी ।हम रफाल के लिए उत्सुक हैं क्योंकि इसके सौदे को लेकर ठीक वैसी ही चर्चा देश में हुई थी जैसी की बोफोर्स तोप को लेकर किसी जमाने में हुई थी ,लेकिन हमारा उत्साह पूजा-पाठ तक पहुँच जाएगा ये कभी सोचा नहीं गया था ।
हमारे यहां उस शस्त्र की पूजा की जाती है जो हमारे शस्त्रागार में हो। हम किसी दूकान में रखे शस्त्र की पूजा नहीं करते।हम किसी आदेशित चीज की पूजा भी नहीं कर सकते क्योंकि उसका भौतिक स्वत्व हमारा नहीं होता।यही बात रफाल के मामले में है। रफाल अभी हमारा नहीं है।हमने केवल रफाल का सौदा किया है। रफाल हमें अभी एक साल बाद मिलेगा  ,फिर उसकी पूजा की इतनी हड़बड़ी सरकार को क्यों है ?हमारी पूजा-पाठी सरकार पता नहीं क्या प्रदर्शित करना चाहती है ?कबीर ने कहा था कि यदि पाहन पूजने से हरि मिलते हों तो मै पहाड़ पूजने के लिए  तैयार हों,मै भी कहता हूँ कि यदि रफाल पूजने से हमें स्थाई शांति मिलती हो तो मै दुनिया भर के हथियार पूजने को तैयार हूँ ।सरकार क्यों नहीं समझती की ये सब नौटंकियां हास्यास्पद हैं और इनसे बचा जाना चाहिए ।
देश का दुर्भाग्य है कि आज के दौर में सरकार को सही-गलत पर टोका-टाकी करने वाला कोई नहीं है। भय1     के कारण प्रिय बोलने पर विवश हैं और जो बोलने की कोशिश करते हैं उनके खिलाफ हमारी अदालतें आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दे देतीं हैं ।देश की बड़ी अदालतें तक इस असंवैधानिक कदाचरण के लिए अपनी अधीनस्थ अदालतों को नहीं फटकारती क्योंकि वे खुद अब सुनवाई से हाथ खड़े करने लगीं हैं ।मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में अब विधि-विधान के बजाय पूजा-पाठ के रास्ते से ही सब काम होंगे ।
मुझे हैरानी होती है की हमारी धर्मभीरु सरकार एक और बीते छह साल से दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला का बहिष्कार कर रही है वो ही सरकार रफाल पूजने फ्रांस जाने में संकोच नहीं करती। सरकार का ये दोहरा  आचरण शोध का विषय है ।रक्षा मंत्री जी को शस्त्र पूजा में यदि गहरी रूचि है तो वे अपने लाइसेंसशुदा हथियारों को पूजें,देश की सेनाओं के शस्त्रागार उनके नहीं हैं ।उनकी पूजा हमारे वर्दीधारी करें तो समझ आता है,वैसे इसकी भी क्या जरूरत है ?कल को मांग आएगी कि रफाल की दिल के बाद मौलूद शरीफ का पाठ हो,या वहां अखंड पाठ कराया जाये या फिर कोई कहेगा की रफाल तभी वायुसेना में शामिल किया जाये जब उसके लिए चर्च में विशेष प्रार्थना सम्पन्न हो जाए !
रफाल [जो अभी हमारे स्वत्व में नहीं है ] के पूजन पर मेरी आपत्ति से भक्तगण ही नहीं अभक्तगण भी नाराज हो सकते हैं,वे मेरी निंदा कर सकते हैं मुझे देशद्रोही कह सकते हैं ,शौक से कहें,लेकिन मै तो अपने मन की बात कह रहा हूँ जिसे सुनना हो सुने,नहीं सुनना हो नहीं नहीं सुने/पढ़े ,यानि कोई जबरदस्ती नहीं है ।मै हर समय कहूंगा की देश में इस तरह के प्रहसन नहीं होना चाहिए ।इससे पहले भी जब चंद्रयान का प्रक्षेपण हुआ था तब भी इसी तरह के पूजा-पाठ के दृश्यों ने जन मानस को उद्वेलित किया था लेकिन तब भी किसी ने किसी की नहीं सुनी और न अब कोई सुनने वाला है ।बहरहाल जब रफाल आएगा तब हम सब मिलकर ढोल-मजीरे बजा लेंगे,अभी तो मान जाइये सरकार !
 

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राकेश अचल

राकेश अचल ग्वालियर - चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार है। वर्तमान वे फ्री लांस पत्रकार है। वे आज तक के ग्वालियर के रिपोर्टर रहे है।