Wednesday, February 20, 2019
थैंक यू गांधी,गोडसे या पूजा

थैंक यू गांधी,गोडसे या पूजा

मीडियावाला.इन।

नफरत और प्यार के बीच क्या पसंद किया जाए? जवाब सीधा सा हो सकता है प्यार लेकिन यह प्यार भी तब ही महसूस होगा जब दूसरी तरफ नफरत मौजूद हो। एक तरफ गांधी और दूसरी तरफ गोड़से और उनकी नफरत को सहेजने वाली पूजा शकुन पांडेय हैं।थैंक्स गांधी जी को ही कहा जाना चाहिए कि उनकी हत्या करने वाले उनके विचारों की हत्या कहाँ कर पाए। गांधी जी को थैंक्स तो गोड़से और हिंदू महासभा नैत्री ने भी कहना चाहिए कि गांधी की वजह से इन्हें भी पहचान मिली हुई है।ये राम भक्त गांधी का ही चमत्कार है कि उनके नाम की माला जपने वाले सत्ता शिखर पर पहुँच जाते हैं और उनके पुतले को गोली मारने वालों को भी पहचान मिल जाती है।

देश में गांधी को पसंद करने वालों का प्रतिशत यदि अधिक है तो उसकी एक वजह गांधी का नोटों पर होना भी है।गोड़से की पिस्तौल से चली नफरत की गोली का शिकार हुए गांधी की यदि सामान्य मौत हुई होती तो न देश राष्ट्रपिता का सम्मान देता, न देश में इतने एमजी रोड होते और न ही उस अधनंगे फकीर के इतने पुतले ही होते। 

डेढ़ सौ साल पहले जन्मे गांधी को याद करते हुए सरकार ने साल भर आयोजन तय किए हैं, हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करने के साथ ही प्रधानमंत्री के साथ ही मंत्रियों ने भी गांधी जी को याद किया और देश में गांधी के सफाई संदेश को जन जन तक पहुँचाने-प्रेरित करने का श्रेय जितना मोदी को जाता है उस अंदाज में कांग्रेस सरकार के रहते गांधी के नाम वाला ऐसा काम तो नहीं हुआ है।कांग्रेस को तो आभार मानना चाहिए कि गुरु गोलवलकर, डॉ हेडगेवार के सपनों वाला भारत बनाने में जुटे पीएमजी ने गांधी जी की डेढ़ सौवीं जन्म जयंती पर गांधी के संदेश स्वच्छ भारत की ऐसी ब्रांडिग-मार्केटिंग की है कि सारा देश गांधी के सपनों को पूरा करने, भारत को स्वच्छ बनाने में जुट गया।

गाँव-गलियों-घर-आँगन का कचरा तो साफ किया जा रहा है लेकिन दिमाग में यदि कचरा भर जाए तो उसकी सफाई नहीं हो सकती।गांधी विचार को जीने वालों के लिए हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडेय के दिमाग में क़ूड़ा भरा होने की राय हो सकती है लेकिन गांधी जी ने तो अपने विरोधियों, विचार से असहमत रहने वालों को भी सम्मान दिया है।नृशंस तरीके से गांधी की हत्या करने वाले गोड़से को भी कहाँ पता होगा कि उसकी इस नफरत का उल्टा असर ऐसा होगा कि सारा विश्व गांधी को इतनी शिद्दत से याद करता रहेगा। 

हिंदू महासभा नेत्री पूजा शकुन पांडेय यदि कह रही हैं कि नोट से गांधी जी की तस्वीर हटा देना चाहिए तो गलत क्या है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने जब से बड़े-छोटे नोटों के रंग बदले हैं इन नए नोटों के कलर में पीएमजी की जैकेट के रंग तलाशे जाने लगे हैं, गांधी जी के मुस्कुराते चेहरे पर कहाँ नजर ठहरती है। जिस गांधी ने भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने और रामराज्य की स्थापना का अभियान चलाया वह तो कांग्रेस के पचपन, बाकी अन्य दल और पीएमजी के इन साढ़े चार साल में भी स्थापित नहीं हो पाया किंतु बच्चा बच्चा राम के उद्घोष से आसमान गुंजाने वालों की भी इतनी समझ तो विकसित हो ही गई है कि गांधी के नाम से नफरत चलेगी लेकिन अपने अटके काम निपटाने के लिए गांधी के मुस्कुराते चेहरे वाले नोट से ही काम बनेगा।शायद इसीलिए पूजा शकुन पांडेय के मन में यह भाव आया है कि रिश्वत के लेनदेन में क्यों गांधी को उलझाया जाए। गांधी को गोली मारने वाले इस प्रहसन के चर्चा में आने के बाद कम से कम आज की पीढ़ी को यह अंतर भी समझ आया होगा कि उन महात्मा गांधी और चौकीदार चोर है चिल्लाने वाले गांधी में कोई रिश्ता नहीं है।ये सारे गांधी उस मोहनदास के गांधी नाम होने का फायदा उठा रहे हैं, इनके बंगलों में तो फिरोज गांधी की बड़ी तस्वीर भी नहीं होगी कि पुण्यतिथि पर हार चढ़ा सकें।   

मुझे जो ताज्जुब है वो इस बात का कि विश्वमंच से गांधी के गुणगान का अवसर झपटने वाले पीएमजी सहित बाकी नेता भी गांधी पुतले को गोली मारने वाले इस पूरे मामले से नजरें चुराते रहे।राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी यह हिंसा चर्चा का विषय नहीं बन पाई।आमिर खान, नसीरुद्दीन शाह थोड़े भी भयभीत नजर आएं तो पाकिस्तान में बसने की सलाह देने वालों को भी नहीं लगा कि इस घटना की निंदा की जाए, हिंदू महासभा ने अब तक कार्रवाई करने, पद से हटाने जैसा कोई कदम नहीं उठाया है तो माना जाए कि यह पब्लिसिटी स्टंट नहीं, एक गंभीर मैसेज है।राम मंदिर के लिए चिंतित रहने वाले संघ प्रमुख ने भी अंत समय में हे राम का उच्चारण करने वाले गांधी की हत्या का सीन रिक्रिएट करने वाली इस नैत्री की निंदा या प्रशंसा भी नहीं की।मोदी का ट्विट आया न राजनाथ विचलित हुए, मोदी के भारत रत्न प्रणव दा भी चुप्पी साध गए ! गोड़से का मंदिर बनाने, माला पहनाने से वो ज़िंदा भले ही न हो लेकिन गांधी के पुतले को गोली मारने से गांधी के विचारों की तो हत्या नहीं होगी।घटना के दस दिन बाद यूपी पुलिस ने इस प्रकरण में पति अशोक पांडेय के साथ पूजा शकुन पांडेय की गिरफ्तारी कर ली है।अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में विभिन्न धाराओं में 12 मुक़दमे दर्ज कर लिए गए हैं।यह फिर सिद्ध हो जाएगा कि गांधी का नाम प्रेम से लेने वालों के साथ ही उनके प्रति नफरत का इज़हार करने वाले भी उतनी ही प्रसिद्धि पा सकते हैं।अलीगढ़ में सफाई अभियान चलाया होता तो इतना नाम नहीं होता, जितना दिमाग़ी फ़ितूर से हुआ। 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


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