Monday, April 22, 2019
इंदौर में इतिहास बदलने का बीज अंकुरित हो रहा है

इंदौर में इतिहास बदलने का बीज अंकुरित हो रहा है

मीडियावाला.इन

इंदौर लोकसभा सीट की चर्चा इंदौर की सीमा को लांघकर प्रदेश, और देश के राजनीतिक महलोों की दिवारों से टकराकर लौट रही है। सुमित्रा महाजन की पचहत्तर साल की उम्र उम्मीदवारी में बाधा बनी तो कांग्रेस शिविर में हलचल बढ़ने लगी है। प्रकाशचंद सेठी जैसे अजेय योद्धा को परास्त कर सुमित्रा ताई ने इंदौर की चाबी छीन ली थी। अपने पल्ले में कसकर बांधी इस चाबी को भाजपा ने उनसे पचहत्तर की उम्र बताकर ले ली है। चुनाव के बाद ताई के किस उत्तराधिकारी को चाबी मिलती है या निर्वाचन अधिकारी कांग्रेस के उम्मीदवार को थमा दे, यह तय होना है, और यह  इंदौर की शानदार जनता ही तय करेगी।

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले चरण के मतदान के बाद कहने लगे हैं कि इस बार 2014 से भी बड़ी आँधी चल रही है। समूचा प्रतिपक्ष पहले चरण में ईवीएम, वीवीपेट मशीनों को लेकर सवाल खड़े करने लगा है। इसका आशय जनता समझने लगी है। राजनीतिक समीक्षक भी अगले चरण तक इसका विश्लेषण करते रहेंगे।  मां अहिल्या की नगरी के कुशल राजनीतिक प्रबंधक कैलाश विजयवर्गीय के रणकौशल ने बंगाल में अस्सी प्रतिशत तक का मतदान करवाकर ममता के नीचे की जमीन ढीली कर दी है। बंगाल में भगवे का करिश्मा होने जा रहा है, इसीलिए कैलाश ने कहा, इंदौर से बड़ी चुनौती मेरे सामने बंगाल में है। इस चुनौती को सफलता में बदलना मेरा पहला लक्ष्य है। वहीं उन्होंने कहा कि पार्टी कहेगी तो इंदौर से चुनाव लड़ने से इंकार नहीं करूंगा। कैलाश विजयवर्गीय एक बार इंदौर में घूम जाएं और फिर बंगाल में सक्रिय हो जाएं तब भी वे कांग्रेस के किसी भी उम्मीदवार को परास्त करने का दमखम रखते हैं। शायद यह हो और तेईस मई को वे इंदौर के साथ बंगाल में भी बड़ी जीत दिलवाने में कामयाब हो जाएं। जो उनको जानते हैं वे इसकी भविष्यवाणी करने में भी संकोच नहीं करते।

   तो फिर क्या इंदौर देश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी में है। यहीं से होमी दाजी ने इतिहास रचा था। ठेठ वामपंथी नेता ने अपना लाल झंडा फहराया था। यहीं से समाजवादी आंदोलन के नेता कल्याण जैन ने अपनी पताका फहराई थी। नये नवेले इंटक नेता नंदकिशोर भट्ट ने भी विजय दर्ज की थी। इंटक, वामपंथ, समाजवाद की जमीन पर सुमित्रा ताई ने प्रकाशचंद सेठी को शिकस्त दे राष्ट्रवाद की मशाल जलाई। कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी तपस्या से इंदौर चार को अयोध्या बनाया, मजदूरों की राजनीति के लिए जाना जाने वाला इंदौर दो भी कैलाश ने भगवा रंग में रंगा। गांधीवादी आर सी जाल की तिरंगी जमीन महू पर कैलाश ने ही अपनी ध्वजा फहराई। साम्रप्रदायिक नारों से ओतप्रोत जटिल इंदौर तीन पर कैलाशजी के बेटे आकाश ने मुश्किल सीट को जीत लिया। इसलिए इंदौर की राजनीतिक जमीन में फिर कोई इतिहास लिखे जाने के लिए बीज अंकुरित हेने लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी चर्चा चल पड़ी है, वे शायद इंदौर से भी चुनाव लड़ें, यह हो गया तो यहां के राजनीतिक रंग समूचे देश में बिखरेंगे ही। बहरहाल इंदौर में चुनाव दिलचस्प होने वाला है, मतदाताओं को इसका इंतजार है।

 

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सतीश जोशी

पिछले चालीस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे, राजनीतिक विश्लेषक, टिप्पणीकार, नईदुनिया, भास्कर, चौथा संसार सहित प्रदेश के कई समाचार पत्रों के लिए लेखन। 


आदिवासी जनजीवन पर एक पुस्तक, राजनीतिक विश्लेषण पर पांच पुस्तकें, राज रंग, राज रस, राज द्रोह, राज सत्ता, राज पाट।  


रक्षा संवावदाता, रिपोर्टिंग के क्षेत्र में खोजी पत्रकारिता में महारथ हांसिल। प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में सांध्य दैनिक 6pm के समूह सम्पादक, इंदौर में कार्यरत।


संपर्क : 9425062606