Wednesday, June 19, 2019
क्या आगे पीछे हाशिए पर धकेले जाएंगे राजनाथ

क्या आगे पीछे हाशिए पर धकेले जाएंगे राजनाथ

मीडियावाला.इन।

क्या मोदी - शाह और राजनाथ के बीच विश्वास की कमी है?

क्या राजनाथ का कांटा मोदी को एक न एक दिन निकालना ही है?

क्या आगे पीछे हाशिए पर धकेले जाएंगे राजनाथ?

क्या प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को गठित कैबिनेट मामलों की 8 समितियों में राजनाथ को केवल दो समिति में रख यह संदेश नहीं दिया कि अब इसकी शुरुआत हो चुकी है?

क्या यह सही है कि संघ के भारी दबाव और राजनाथ के इस्तीफे की धमकी का असर रहा कि सुबह दो समितियों में शामिल किए गए राजनाथ शाम होते होते 6 समितियों में शामिल हो गए?

क्या कैबिनेट की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों की समिति से राजनाथ को बाहर रखना किसी षडयंत्र का हिस्सा माना जाना चाहिए?

यह सारे वे प्रश्न हैं जो बीजेपी ही नहीं देश के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम राजनीतिक सोच वाले व्यक्ति के दिमाग में घूम रहे हैं।

राजनाथ के लिए इमेज परिणाम

 जो व्यक्ति उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का मुख्यमंत्री, दो बार पार्टी का अध्यक्ष और अभी-अभी देश का गृहमंत्री रहा हो, उसे राजनीतिक और संसदीय मामलों की समिति से बाहर रखना , क्या यह सोचने पर मजबूर नहीं करता है कि अब  नेतृत्व का राजनाथ पर विश्वास नहीं रहा। अब वे गौण हो गए हैं ।जो बात अभी तक पार्टी के बंद गलियारों में मानी जाती थी वह अब खुलकर बाहर आ गई है। हालांकि राजनाथ ने सुबह  तो कुछ नहीं बोला लेकिन अंदर ही अंदर वे मोदी शाह के षड्यंत्र को समझ गए । संघ  फिर उनकी मदद के लिए सामने आया।  परिणाम यह हुआ कि शाम होते-होते संघ से उनके संबंध एक बार फिर काम आए और इसी के साथ उनकी इस्तीफे की धमकी भी काम कर गई।

राजनाथ के लिए इमेज परिणाम

इस बात का एहसास तो सभी को था और है कि जो भारी बहुमत भाजपा को इस लोकसभा चुनाव में मिला है,  राजनाथ सिंह के  इसमें कोई  विशेष रोल कभी भी माना नहीं गया और है भी नहीं।  रणनीति, राजनीति और योजना बनाने का सारा काम  मोदी और शाह का ही था। यह सभी जानते हैं कि मोदी और शाह की जोड़ी अभी तक की सबसे कामयाब जोड़ी रही है और उनकी योजना ऐसी होती है जो अच्छों अच्छों के समझ में नहीं आती है। अब ऐसा लगता है कि उनके नई योजना में राजनाथ - गडकरी  सरीखे  नेताओं को भा ज पा की मुख्यधारा से खो करना है। लेकिन इस काम को अंजाम देने की शुरुआत इतनी जल्दी हो जाएगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी ।

  राजनाथ सिंह वर्तमान में रक्षा मत्री हैं . रक्षा मंत्री के पास अभी भी रफाएल के सारे दस्तावेज और सूत्र हैं। उनको नाराज़ और नज़रंदाज करना मोदी और शाह की जोड़ी के लिए अभी आसान नहीं होगा। और यह बात दोनो को जल्दी ही याद आ गयी यह अच्छा ही हुआ।

बहरहाल नई सरकार के गठन के एक सप्ताह में  पार्टी में हुई गतिविधियों से राजनाथ को यह  समझ लेना चाहिए की उनकी स्थिति अब भाजपा और सरकार में क्या है और उसी अनुसार  अब आगे  अपने भविष्य के बारे में सोचना चाहिए ।

 

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  • Good point that Defence minister has access to all the documents on Rafale. If he has to be sidelined he will have to be shifted to a less important ministry but this will not be an easy task given stature of Rajnath Singh.

सुरेश तिवारी

मध्यप्रदेश शासन के पूर्व जनसम्पर्क संचालक एवं मध्यप्रदेश माध्यम के पूर्व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश तिवारी एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी, प्रखर मीडिया पर्सन और नवोन्मेषी जनसंपर्क कर्मी है। आपका पत्रकारिता के साथ ही जनसम्पर्क और राज्य शासन के प्रचार उपक्रम मध्यप्रदेश माध्यम में प्रतिष्ठापूर्ण वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का 35 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव रहा है।

आप अनेक जिलों में जनसम्पर्क अधिकारी के रूप में कार्य करने के बाद प्रदेश की औद्योगिकी राजधानी और प्रमुख मीडिया सेन्टर, इंदौर में संयुक्त संचालक, देश की राजधानी नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के सूचना केन्द्र के प्रभारी और सेवा निवृति से पूर्व 8 वर्षों तक प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपर संचालक व संचालक जनसम्पर्क के रूप में और राज्य शासन के प्रचार उपक्रम मध्यप्रदेश माध्यम में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कुशल मीडिया अधिकारी रहे है।


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