Monday, September 23, 2019
जानिए कलश का धर्म में महत्व

जानिए कलश का धर्म में महत्व

मीडियावाला.इन।

हिन्दू धर्म में कलश-पूजन का अपना विशेष महत्व है। विशेष मांगलिक कार्यों जैसे गृह प्रवेश , व्यापार में नए खातों के आरंभ, नववर्षारंभ, दीपावली के पूजन , नवरात्र और किसी भी अनुष्ठान, पूजा आदि के अवसर पर कलश स्थापना की जाती है। परंपरा के अनुसार लोग पुरोहित के कहने पर कलश की स्थापना कर देते हैं। पर क्या आपने कभी इस विषय में सोचा है कि कलश स्थापना क्यों की जाती है? आइए आपको कलश स्थापना के पीछे के रहस्य से अवगत कराते हैं...

हिंदू धर्म में कलश को सुख-समृद्धि , वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश एक विशेष आकार का बर्तन होता है, जो चौड़ा होने के साथ ही कुछ गोलाई लिए होता है। मान्यताओं के अनुसार कलश विश्व ब्रह्मांड ,विराट ब्रह्म और भू-पिंड यानी कि ग्लोब का प्रतीक है...इसे शांति और सृजन का संदेशवाहक भी कहा जाता है। सभी देवी-देवता देवता कलशरूपी पिंड में एकसाथ समाए होते हैं। वेद मंत्र के अनुसार कलश के मुख में विष्णु का निवास है, उसके कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं।

कलश के मध्य में सभी मातृशक्तियां निवास करती हैं। कलश में समस्त सागर, सप्तद्वीपों सहित पृथ्वी, गायत्री, सावित्री, शांतिकारक तत्व, चारों वेद, सभी देव, आदित्य देव, विश्वदेव और सभी पितृदेव एकसाथ निवास करते हैं। कलश की पूजा मात्र से एकसाथ सभी देवी-देवता प्रसन्न होकर यज्ञ कर्म को सुचारुरूपेण संचालित करने की शक्ति प्रदान करते हैं और निर्विघ्नता से यज्ञ कर्म को समाप्त करवाकर प्रसन्नतापूर्वक आशीर्वाद देते हैं।

इसलिए पूजन से पहले कलश को देवी-देवता की शक्ति, तीर्थस्थान आदि का प्रतीक मानकर स्थापित लिया जाता है।

 

शास्त्रों में बिना जल के कलश को स्थापित करना अशुभ माना गया है। इसी कारण कलश में पानी, पान के पत्ते, आम के पत्ते, केसर, अक्षत, कुमकुम, दुर्वा-कुश, सुपारी, पुष्प, सूत, नारियल, अनाज आदि का उपयोग कर पूजा के लिए रखा जाता है। कलश का पवित्र जल इस बात का प्रतीक है कि हमारा मन भी जल की तरह हमेशा ही स्वच्छ, निर्मल और शीतल बना रहें। हमारा मन श्रद्धा, तरलता, संवेदना और सरलता से भरा रहे। यह क्रोध, लोभ, मोह-माया और घृणा आदि से कौसों दूर रहे। कलश पर लगाया जाने वाला स्वस्तिक चिह्न हमारे जीवन की चार अवस्थाओं बाल्य, युवा, प्रौढ़ और वृद्धावस्था का प्रतीक है। कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है जो कि श्री गणेश का प्रतीक है। सुपारी, पुष्प, दुर्वा आदि चीजें जीवन शक्ति को दर्शाती हैं। कलश के ऊपर आम्रपत्र होता है जिसके ऊपर मिट्टी के पात्र में केसर से रंगा हुआ अक्षत रहता है जिसका भाव यह है कि परमात्मा यहां अवतरित होकर हम अविनाशी आत्माओं एवं पंचतत्व की प्रकृति को शुद्ध करें। दिव्यज्ञान को धारण करने वाली आत्मा आम्रपत्र के समान हमेशा हरियाली युक्त रहे।

कलश में डाला जाने वाला दूर्वा-कुश, सुपारी, पुष्प इस भावना कोदर्शाता है कि हमारी पात्रता में दूर्वा के समान जीवनी-शक्ति, कुश जैसी प्रखरता, सुपारी के समान गुणयुक्त स्थिरता, फूल जैसा उल्लास एवं द्रव्य के समान सर्वग्राही गुण समाहित हो जाए।

Source - Nation1Voice

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