Tuesday, October 15, 2019
अमेरिका ने मान लिया कराची में है दाऊद, जानिए भारत के दावे पर कैसे लगी मुहर

अमेरिका ने मान लिया कराची में है दाऊद, जानिए भारत के दावे पर कैसे लगी मुहर

मीडियावाला.इन।

अब तक पाकिस्तान इनकार करता रहा है कि दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान में छिपा है लेकिन अब तो अमेरिका ने भी लंदन की अदालत में भारत का दावा दोहरा दिया है.

पाकिस्तान की लाख ना-ना के बावजूद कोई यकीन करने को राजी नहीं कि भारत का मोस्ट वॉन्टेड अपराधी दाऊद इब्राहीम कराची में नहीं रहता. अब तो अमेरिका भी इस दावे को ना सिर्फ खारिज कर चुका बल्कि लंदन की एक अदालत में वही बात कह रहा है जो भारत दोहराता रहा है.

दरअसल अमेरिकी एजेंसियां लंदन से डी कंपनी के खासमखास जाबिर मोती का प्रत्यर्पण चाहती हैं. इस मामले में अमेरिका की ओर से पक्ष रख रहे जॉन हार्डी ने कहा कि- 'एफबीआई पाकिस्तान, भारत और यूएई में आधार रखनेवाली डी कंपनी की जांच न्यूयॉर्क में कर रही है. इसका प्रमुख भारतीय मुसलमान दाऊद इब्राहीम है जो पाकिस्तान में रहता है. वो और उसके भाई 1993 से ही हिंदुस्तान के भगौड़े हैं, अमेरिका में कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं खासतौर पर रंगदारी और हवाला में. एफबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि मोती सीधा दाऊद को रिपोर्ट करता है और रंगदारी, कर्ज़ वसूलना, हवाला उसके प्रमुख धंधे हैं.'

अब अमेरिकी सरकार चाहती है कि लंदन में रहनेवाले मोती को अमेरिकी कानून के मुताबिक सज़ा दिलवाई जाए जिसके लिए प्रत्यपर्ण की कोशिशें जारी हैं.

 

 

मंगलवार को 51 साल के आरोपी मोती को लंदन की अदालत में लाया गया. वो पाकिस्तानी नागरिक है जिसने यूके का दस साल का वीज़ा हासिल कर रखा है. शुक्रवार को ही लंदन के एक होटल से उसे मेट्रोपॉलिटन पुलिस प्रत्यपर्ण यूनिट ने तब धरा जब अमेरिकी सरकार से प्रत्यर्पण संबंधी निवेदन मिला.

कहा जा रहा है कि यदि मोती पर आरोप सिद्ध हुए तो वो 25 साल के लिए जेल जाएगा. 2012 से एफबीआई डी कंपनी और उसके सहयोगियों की पड़ताल में लगी है. क्राउन प्रोसिक्यूशन सर्विस की ओर से बोलते हुए लियाना बेज़ंट ने कहा कि- 'डी कंपनी के लीडर पाकिस्तान में रहते हैं जबकि तस्करी के लिए उनके रास्ते दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका से जाते हैं. जाबिर मोती उनका बड़ा सिपहसालार है. वो अमेरिका और पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट्स से मिला है और माना कि नशे की तस्करी में शामिल था जिससे बहुत पैसा कमाया गया. डी कंपनी विवादों को सुलझाने के लिए अमेरिका और उसके बाहर हिंसा का इस्तेमाल करती है. ये लोग कर्ज़ लेनेवाले लोगों के परिजनों को धमका कर पचास फीसदी तक मुनाफा कमाते हैं.'

 

 

सुनवाई के दौरान मोती के वकील टोबी कैडमेन ने पब्लिक गैलरी में बैठे पत्रकारों को हटाने की गुहार लगाई क्योंकि वो भारतीय मीडिया में इसे लेकर चर्चा नहीं होने देना चाहते थे. जज ने उनके निवेदन को साफ खारिज कर दिया. अब मोती 28 अगस्त को जेल से ही वीडियो लिंक के ज़रिए सुनवाई में शामिल होगा.

अमेरिका को मोती वापस मिले या ना मिले लेकिन लंदन की अदालत में एजेंसियों का ये मानना कि दाऊद इब्राहीम कराची में रहता है दरअसल भारत की बड़ी जीत है. भारतीय एजेंसियों ने कई बार इससे जुड़े सबूत पेश किए हैं लेकिन पाकिस्तान हमेशा मुकरता रहा है. अब जब खुद अमेरिका भारत के दावे से सहमत दिख रहा है तो ये इमरान सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ा कर सकता है.

पाकिस्तान के कराची में दाऊद का एड्रेस

दाऊद इब्राहीम मुंबई बम धमाकों के बाद भारत से भागकर कई ठिकाने बदलता रहा. आखिरकार उसे पाकिस्तान में ही शरण मिली. अपने परिवार के साथ आराम से रहते हुए उसने डी गैंग को ज़िंदा रखा और विकसित किया. भारत के पास दाऊद की पाकिस्तान में मौजूदगी के दर्जनों सबूत हैं और कई बार पाकिस्तान को वो मुहैया कराए जा चुके. महज़ चार साल पहले एक भारतीय अखबार में दाऊद को लेकर विस्तार से जानकारी छपी थीं. दाऊद के नए ठिकाने 'डी- 13, ब्लॉक-4, कराची डेवलेपमेंट अथॉरिटी, स्कीम-5, क्लिफ्टन, कराची' का भी खुलासा हुआ था.

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