Sunday, May 19, 2019
प्यारी माँ

प्यारी माँ

मीडियावाला.इन।

"मातृ दिवस"शुभकामनाएँमाँ के लिए इमेज परिणाम

मां

तारों की छइयां बन

लोरी गा

शिशु को सुलाती हो 

शीतल  छांह बन

दुलराती हो

जीवन पथ के

संग्राम से

जूझना  सिखाती हो

सहृदयता का पाठ पढ़ा 

जीवन का

दीप स्तम्भ  बन

जाती हो

मां तुम  

हर पल हर क्षण 

याद  आती  ही हो

हर सांसों में 

तुम  रहती हो 

रहती हो

श्रीमती वन्दिता श्रीवास्तव 

मांप्यारी माँ 🌸🥰🌸

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माॅ तुम धरती हो आकाश हो

मेरे जीवन की मधुमास हो

जिन्दा हूॅ क्योंकि दिल धड़कता है

मेरे हर धड़कन की श्वास हो।

गीली मिट्टी को आकार दे

जो चाहे गढ़ लेती हो

बिना पढ़ी पर मन के

भावों को पढ़ लेती हो

सूत्रधार बन रिश्तों मेंमिठास भर

पतझर खुद सहकर बहार देती हो

युगों  युगों से सृष्टि का इतिहास हो

मेरे जीवन की मधुमास हो।

मर्यादा की चादर ओढे फर्ज निभाती हो

चुनौतियों को स्वीकार कर

आगे बढ़ती जाती हो

पन्ना धाय बन राजधर्म निभाती हो

प्रेम परीक्षा देने विष का प्याला भी पी जाती हो

तुम मेरे दुख सुख का एहसास हो

मेरे जीवन की मधुमास हो।

तेरे चरणों में जन्नत चारों धाम है

रंगीन हैं सपने सुहानी शाम है

तेरे ऑचल में सारा संसार है

माॅ शब्द में पूरा ब्रम्हाण्ड है

दूर होकर भी तुम मेरे पास हो

मेरै जीवन की मधुमास हो।

श्रीमती शोभारानी तिवारी

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नानी मां का गांव

 

नानी मां के आंगन में थी,

 केसर आम की छांव ।

अमरेली की अमराई में ,

याद आ गए गांव ।।

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 5 लोग, Ritupriya Khare सहित

छूंदा गोल केरी अचार ,

बहू बेटियां बनाती ।

हलदी नोन राई मसाले ,

बरनी बरनी भराती ।।

 

खट्टे मीठे आम पापड़ ,

खटिया पर सुखाती ।

 ग्रीष्म उत्सव  त्यौहार सब ,

हिल मिल सखी  मनाती ।।

नन्हे-मुन्ने नाती पोते,

 अंगना करते अठखेली ।

नानी का अंगना सजता था,

 बहू बेटी सखी सहेली।।

 तोता मैना और गौरैया,

 फुदके  नानी अंगना ।

दाना पानी चुगने जाते,

 तरुवर अम्बर  गगना।।

आम्र वॄक्ष की सघन छांव सा,

 नानी का था प्यार ।

आम अचार एक माध्यम् ,

बनता ग्रीष्म त्यौहार।।

ऋतु प्रिया खरे

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मां

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धनुषाकार पिरामिड

 

मां

पूजा

ममता

है करुणा

ईश्वर रचना

संस्कार ऊर्जा 

कोई नहीं तुम सा

शब्दों समाई भाषा

देवी रूप बसा

प्रीति संचिता

मां आनंदा

अमृता

माता

है

 

रे

मैया

चरण

छुएं सदा

देती दुआएं

अनंत सदाएं

नाप दे आसमान

तीरथ भागीरथ

विशाल आकाश

हाथ आशीष

लगे न्यारी

है प्यारी

मेरी

मां

डां अंजुल कंसल"कनुप्रिया"

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माँ स्त्रीलिंग नहीं पुल्लिंग भी होती है 

क्योंकि देखा है मैने पिता को मां 

बनते हुये

जन्म देकर बहन नवजात 

व तीन बरस की थी ,मैं..

ईश्वर को प्यारी हो गई जननि 

माँ बोलना कभी आया नहीं रहापिता का साया ही

मां की कल्पना भी न की

देखा है पिता को माँ बनते 

बच्चों को पालते पोसते 

सारी शि़क्षायें माँ बनकर दी 

जो बताना नामुमकिन था 

वो क़रीबी महिला रिश्तों से दिलवाई

जो चोट हमें लगती वो दर्द उन्हें हुआ 

लोरी गाकर सुलाने का उपक्रम भी किया 

दिन में धनोपार्जन तो

शाम घर पर बच्चों पर ध्यानाकर्ष भी किया 

हमारे लिये जिये हमारे लिये रहे 

पुनर्विवाह  भी नहीं किया 

नारी की हर कला में पारंगत किया 

पुरुषोचित कार्यों का परिचय भी दिया  

एेसे थे मेरे पिता 

माँ का फ़र्ज़ अदा किया 

तो बताओ कैसे न कंहूं कि पिता 

माँ भी बन जाता है कभी कभी 

माँ की याद नहीं आई कभी ...

पुल्लिंग माताओं कोभी मेरा नमन🙏🙏

कुसुम सोगानी

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मेरी हृदय स्थली में

 

कौन कहता है मां नहीं है

वह आज भी मेरे पास है

मेरी देह के पोर पोर में

सांसो की मद्धिम ध्वनि में

मेरी रक्तिम धमनियों में

टूटते हौसलों की घड़ी में

सफलता की रंगस्थली में

भय आतंक की गली में

नेह और प्यार की फुलझडी में

ईश्वर की मार्ग स्थली में

वह आज भी मेरे पास है 

मेरी हृदयस्थली में

          'अवनि'

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मेरी मन:स्थिति

 

माँ हों न हों

होने का आभास ही होता

मानो आशीषों का आंचल

माथे पर लहराता रहता।

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प्रश्न यही है मन में,

जैसे माँ बस  गई है हम में

क्या हम भी बस पाएंगे

अपने बच्चों के मन में?

मंजुला भूतड़ा 

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