Tuesday, September 17, 2019
रोटियां सेंकती   मेरी माँ

रोटियां सेंकती  मेरी माँ

मीडियावाला.इन।

रसोई में चूल्हे पर

रोटियां सेंकती 

मेरी माँ का 

लाल लाल 

दमकता चेहरा 

मुझे साहस मेहनत 

विश्वास देता है

 

अंधेरों में

टिमटिमाती ढिबरियों में

मेरी माँ की

चमकती दो आंखे 

टपरियो में आने वाले 

तूफानों के 

आघात व्यवघात से 

भय मुक्त होने का 

मुझे आश्वासन देते हैं ।

 

कुत्ते भौंकते है 

बिल्लियां लड़ती है

ताले टूटते है 

चीखें हवाओं में तैरती है

नदियां लाल होती है 

आकाश फटता है 

धरती रोती है

मेरी माँ के चौकन्ने कान 

हरदम मुझे चौकस 

कर देते है

 

ह्रदय के अंतः स्थल पर 

मेरे बचपन के डर को

जब वह कस कर दबोच लेती है

स्नेह का बहता अमृत

एक पुष्ट होता संस्कार

मुझे चमकते भविष्य का

आभास देता है

 

परिवार के किनारों को

सुघड़ता से संवारते 

मेरी माँ के सधे हुवे ठोस हाथ 

उसकी कसी हुई मुट्ठियाँ

उत्ताल तरंगों में

कुछ न कुछ 

करने की तमन्ना 

मुझे 

विराट सत्य से स्थापित होने के 

तादात्म्य को 

सायास 

ऊर्जा किरणों का 

समास देती है

    डॉ सीमा शाहजी

    थांदला जिला झाबुआ

 

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