Monday, September 23, 2019
कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

कलश मंगाय के केसर घोलो, श्याम हमें आज रंग में बोरो

मीडियावाला.इन।होली रंगों का त्यौहार है जिसमें रंगों का अपना महत्व है। होली के आनंद की शुरुआत रंगों से होती है और गुलाल से ही इसके आनंद का खात्मा होता है। देश के कई हिस्सों में होली पारंपरिक और आधुनिक तरीके से मनाई जाती है।

1----होली का गीत

होली आई रे कन्हाई ब्रज के रसिया, होली आई रे।
बाट तकें सब सखा तुम्हारे,
बाहर आओ मोहन प्यारे,
डफ बजने दो रंग उड़ने दो,
अब क्यों देर लगाई रसिया।। होली आई रे....
कलश मंगाय के केसर घोलो,
श्याम हमें आज रंग में बोरो
होली आ गई ओ मन बसिया, 

 

2---होली खेल रहे शिव शंकर गौरा पार्वती के संग
गौरा पार्वती के संग माता पार्वती के संग। होली....
कुटी छोड़ शिव शंकर चल दिए लियो नादिया संग
गले में रुण्डों की माला, सर्प लिपट रहे अंग। होली....
मनियों खा गये आक धतूरा धड़ियों पी गये भंग
एक सेर गांजे को पीकर हुए नशे में दंग। होली....
कामिनी होली खेल रही है देवर जेठ के संग
रघुवर होली खेल रहे है सीता जी के संग। होली..... 

राजा इन्द्र ने होली खेली इन्द्राणी के संग
राधे होली खेल रही है श्री कृष्ण के संग। होली.....
विष्णु होली खेल रहे है लक्ष्मी जी के संग
ब्रह्मा, विष्णु मिलकर खेले शंकर जी के संग। होली.....

 

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