Sunday, May 19, 2019
कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

कहे कविराज:चमत्कार को नमस्कार है----

मीडियावाला.इन।

रातों रात दुबेजी बन गये छब्बेजी
पल मे धुल गये उनके सारे धब्बेजी
महा सियासी साबुन का यह चमत्कार है
चमत्कार को नमस्कार है।

कलमघसीटे चप्पल चटकाते फिरते हैं
और जुगाड़ू पाँव न धरती पर धरते हैं
पढ़े क़सीदे सत्ता के वो कलमकार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

टाई पहन धोती को जो नचवाते हैं
कैसे-कैसे वो जुमले रटवाते हैं
सूखा, बाढ़़,अकाल पड़े,इनका त्यौहार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

पीढ़ी गढ़ने वाले चाँदी काट रहे हैं
सबको अपना-अपना हिस्सा बाँट रहे हैं
दान हुआ करती थी शिक्षा, अब व्यापार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

'धरती के भगवान' खोल बैठे दूकानें
खूब धड़ाधड़ भेजें हैं जाँचें करवाने
क्या होगा उसका बेचारा जो बीमार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

काले कोट की बात करें, वो भी न पीछे
कपड़ें तक बिकवा डाले इतना वो खींचे
दर-दर मारा फिरे न्याय का तलबगार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

धंधा धरम का सबसे ज्यादा लाभ बढ़े है
जेब करे ढीली हर कोई पाँव पड़े है
मार न मंदी की झेले यह वो व्यापार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

गुंडों का तो नाम नया अब बाहुबली है
इनकी ही बस अब तो चलती गली-गली है
इनकी चरणवंदना करता हवलदार है।
चमत्कार को नमस्कार है।

खनिज माफिया, भूमि माफिया, शिक्षा माफिया
खबर माफिया, कल्चर माफिया, सकल माफिया
कोई माफिया नहीं, कहे अपनी सरकार है।
भैया यह तो चमत्कार है
चमत्कार को नमस्कार है।

दिनेश मालवीय "अश्क"

 

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