Saturday, October 19, 2019
कथाकार - नाटककार सुमन ओबेराय के हास्य व्यंग नाटक संग्रह 'यह भी खूब रही ' का विमोचन हुआ

कथाकार - नाटककार सुमन ओबेराय के हास्य व्यंग नाटक संग्रह 'यह भी खूब रही ' का विमोचन हुआ

मीडियावाला.इन।

भोपाल: सुप्रसिद्ध कथाकार - नाटककार सुमन ओबरॉय के हास्य व्यंग्य नाटक संग्रह  'यह भी खूब रही' का विमोचन यहां देश के जाने माने कवि और वरिष्ठ साहित्यकार राजेश जोशी और मुकेश वर्मा  ने किया। पंडित रामानंद तिवारी स्मृति सेवा समिति ' परंपरा ' द्वारा आयोजित इस समारोह की विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार स्वाति तिवारी थी।

 

इस अवसर पर राजेश जोशी ने कहा कि जीवन में हर घटना एक नाटक है ,यह सदा चलता रहता है  यह एक  ऐसी विधा है जो कभी ख़त्म नहीं होती । समारोह में  लेखिका सुमन ओबेरॉय ने अपनी बात के माध्यम से अपनी रचना प्रक्रिया  और पुस्तक की  भूमिका रखते हुए कहा यह  साहित्य की एक जटिल विधा है जिसमे कई बातों का  ध्यान रखना होता है .इस अवसर पर उन्होंने अपने  बहुचर्चित नाटक नरक की यात्रा का पाठ किया .मुख्य अतिथि  मुकेश वर्मा ने कहा  कि  नाटक लिखना सबसे  मुश्किल विधा है इसके लिए एक साथ कई विधाओं को  साधना होता है। सुमन जी ने सभी दृष्टि से नाट्य विधा को साधते हुए ये रचनाये लिखी है ।उनकी भाषा की ,संवाद की सहजता इन नाटको को संप्रेषणीयता प्रदान करती है .विशेष अतिथि कथाकार स्वाति तिवारी ने कहा  कि नाटको का प्रत्यक्ष प्रयोजन मनोरंजन होता है किन्तु सार्थकता सामाजिक सन्देश होती है ।नाटक एक ऐसी विधा है जिसमें सर्वाधिक रसानुभूति होती है इसलिए यह लोक चेतना के सबसे निकट है । इसका मूल तत्व अनुकरण भी होता है जो सामाजिक सरोकारों को प्रभावित करने की अद्भूत क्षमता रखता है  .कवि राजेश जोशी ने कहा नाटक के माध्यम से साहित्यकार अपने लेखन से पूरे समाज को एक नई दिशा देने का काम करता है।नाटक एक ऐसी जादुई कला है, जो सदियों से रिझाती आई है .जीवन एक नाटक है बल्कि हर घटना एक नाटक की कथा है ,यह जन्म से ही शुरू होने वाली विधा है। एक नन्हा बच्चा भी जब दूध के लिए  रोता है ,जिद करता है तो अनजाने में भी वह एक नाटक की कर रहा होता है .यह सदा चलती रहनेवाली विधा है इसलिए नाटक को कोई खतरा नहीं है। यह कभी ख़त्म नहीं होगा।

कार्यक्रम के आरम्भ में   अतिथियों द्वारा पंडित रामानंद तिवारी जी  को स्मरण करते हुए माल्यार्पण किया गया ,अतिथियों का स्वागत ,साहित्यकार श्री महेश सक्सेना ,श्री युगेश शर्मा ,सुश्री जया आर्य ,कोमल सिंह सोलंकी द्वारा किया गया ,कार्यक्रम का सफल संचालन  घनश्याम मैथील ने किया .इस अवसर पर वरिष्ठ रचनाकार धनश्याम सक्सेना  एवं नाटक कार श्री बुलानी ने  भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम  में बड़ी संख्या में  साहित्यकार ,नाटककार , साहित्य प्रेमी उपस्थित थे . आभार प्रदर्शन परम्परा परिवार की और से स्वाति तिवारी ने  प्रगट किया .

 

 

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