Saturday, September 21, 2019
दर्दनाक के साथ भावुक कहानी : जब परिवारों को अपने पुश्तैनी मकान खाली करना पड़े, आंसू थम नहीं रहे थे

दर्दनाक के साथ भावुक कहानी : जब परिवारों को अपने पुश्तैनी मकान खाली करना पड़े, आंसू थम नहीं रहे थे

मीडियावाला.इन।

बड़वानी से सचिन राठौर की विशेष रिपोर्ट

सरदार सरोवर डूब का पानी लगातार बढ़ा है और कई गांव अब डूब की जद में आ गए ऐसे में गांव में रह रहे लोगों को यहां से हटाया जा रहा है लेकिन जो तस्वीरें सामने आ रही है वह आप और हमको भावुक कर देगी एक बुजुर्ग महिला है जिसके घर में पानी भर आया लेकिन वह घर खाली करने को तैयार नहीं और उसका रो-रोकर बुरा हाल है वहीं एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने गांव के व्यक्ति के गले लग के बिलक बिलक के रो रहा है क्योंकि इन गांव से घरों से उनकी बेशकीमती यादें जुड़ी है जिस की निशानियां पानी के साथ डूबती जा रही है

बड़वानी-  गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के बैकवॉटर के बढ़ते स्तर से नर्मदा घाटी के गांवों  में नर्मदा नदी के पास स्थित हजारों पेड़ों और खेतों के अलावा रिहायशी इलाके भी डूब रहे हैं। इन डूब गांवों में  गांव के सैकड़ों लोगों के लिए पलायन का दौर भावुकता से भरा है,नर्मदा के बढ़ते जल स्तर से अगस्त में ही डूब आना शुरू हो गई थी। बैक वाटर का लेवल 132 मीटर पहुंचने पर राजघाट टापू बन गया था। 133 मीटर वाटर लेवल पर पिछोड़ी और चीपाखेड़ी भी टापू में तब्दिल हो गए जहां पिछोड़ी में आज लोग अपना घर खाली करते वक्त भावुक हो गए और मोहल्ले और गांव वालों से गले मिलकर रोने लगे उनके आंसू रुकने का नाम नहीं रुक वह रहे थे क्योंकि उनके जीवन की बहुत सारी यादें यहां से जुड़ी हुई है लेकिन आज उन्हें उन सब को छोड़कर डूबते मकान को डूबते गांव को छोड़कर जाना है वही धार जिले के चीखल्दा में भी एक ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली जिससे आंखे भर आई एक बुजुर्ग महिला जिसके घर में पानी भर गया है उसे घर से निकाला जा रहा है लेकिन बुजुर्ग महिला के आंसू रुक नहीं रहे और वह जाने को तैयार नहीं यह ऐसी तस्वीरें हैं जो आपको और हमको सोचने पर मजबूर कर देगी और शायद सरदार सरोवर बांध के लिए इनके बलिदान को याद रखा जाएगा क्योंकि अपना घर अपना आंगन अपना गांव छोड़ना आसान नहीं होता अब 134.500 मीटर पर पिछोड़ी, नंदगांव, पेंड्रा भी टापू बन गया। वाटर लेवल 135 पर पहुंचने पर पिपलुद, बगुद, केसरपुरा, मोहिपुरा, जांगरवा, बोरखेड़ी, मोरकट्टा भी टापू बन गए। जल स्तर 136 मीटर पर पहुंचने से कई ओर गांव टापू में बदल जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रशासन को भी अंदेशा नहीं था कि इतनी तेजी से पानी बढ़ेगा और गांव में कहां से पानी घुसेगा।

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