Monday, October 22, 2018
मोबाइल पर बच्चों की निर्भरता कम होने से पेरेंट्स भी खुश  

मोबाइल पर बच्चों की निर्भरता कम होने से पेरेंट्स भी खुश  

मीडियावाला.इन। बच्चों में रचनात्मक सोच बढ़ाने का काम कर रही है दीक्षा-विभा की जोड़ी 

इंदौर कीर्ति राणा । एक निजी कंपनी में कार्यरत दीक्षा शर्मा की जो चिंता है वही चिंता उनकी फ्रेंड विभा गांधी की है और अमूमन सभी परिवारों की महिलाओं की भी यही चिंता है कि बच्चों की मोबाइल पर निर्भरता कैसे कम की जाए। बाकी परिवारों की महिलाएं तो इस दिशा में किसी नतीजे पर शायद नहीं पहुंची लेकिन दीक्षा-विभा की जोड़ी ने हल खोज लिया है।छोटे बच्चों के लिए उन्होंने क्रिएटिव थिंकिंग वाला मात्र दो घंटे का ऐसा मजेदार पाठ्यक्रम तैयार किया है जो बच्चों में टीम बिल्डिंग के साथ ही ऑउट ऑफ द बॉक्स सोचने की क्षमता विकसित कर रहा है। 

यह आयडिया कैसे आया के जवाब में दीक्षा शर्मा कहती हैं दुकानदार का परिवार हो या किसी बड़े शो रुम संचालक की फैमिली ही क्यों न हो ऐसे सभी परिवारों में बच्चा चाहे केजी या फिफ्थ स्टैंडर्ड का, परिवार के बड़े सदस्यों की यह चिंता रहती है कि छोटे बच्चों की मोबाइल पर इतनी निर्भरता होती जा रही है कि वे अपना दिमाग लगाना भूलते जा रहे हैं। विभा गांधी कहती हैं यह बिल्कुल वैसा ही है कि अब हम बड़ों को अपने परिवार के ही सदस्यों के मोबाइल नंबर तक याद नहीं रहते क्योंकि हम भी मोबाइल की फोन बुक/कांटेक्ट पर निर्भर हो गए हैं। मोबाइल से पहले हम सब की जेब में फोन डायरी हुआ करती थी उसमें नोट करते करते कई लैंड लाइन नंबर मुंह जुबानी याद हो जाते थे। 

अब हालत यह है छोटी उम्र वाले बच्चों को पोएम भले ही पूरी याद न हो लेकिन अपने पेरेंट्स से ज्यादा मोबाइल के फंक्शन मालूम रहते हैं फिर चाहे फोन स्मार्ट हो या एंड्रायड हो। कारण बताते हुए दीक्षा शर्मा कहने लगीं इसकी वजह यह कि रोते हुए दुधमुंहे बच्चे को चुप कराने के लिए खिलोने की तरह हाथ में मोबाइल थमा दिया जाता है। बस इस उम्र से उसे मोबाइल के ऐसे संस्कार मिल जाते हैं कि बच्चे अपने दिमाग का उपयोग करना भूल कर गूगल या अन्य एप पर निर्भर होते जाते हैं। स्कूल का होमवर्क हो, ड्राइंग बनानी हो या गणित का सवाल हल करना हो-बच्चों को टेंशन नहीं रहता क्योंकि मोबाइल उनके लिए अलादीन के चिराग जैसा है। हमने अपने घरों के बच्चों में जब यह मोबाइल फोबिया देखा तो खूब सोचा कि क्या करें ? फिर आयडिया आया कि बच्चों को क्रिएटिव थिंकिंग की तरफ मोड़ा जाए तो बात बन सकती है। 

चूंकि हम दोनों सप्ताह के पांच दिन अपने ऑफिस में व्यस्त रहती हैं इसलिए शनि-रवि इन दो दिन एक-एक घंटे का समय तय किया, बच्चों के दिमाग पर बोझ ना पड़े और वे खेल खेल में कुछ नया समझें-सीखें ऐसा स्टडी मटेरियल तैयार किया।पहले अपने घर और आसपास के बच्चों को पार्टी के बहाने एकत्र किया।दो दिन बाद जब उनके पेरेंट्स से फीडबेक लिया तो बच्चे में आए बदलाव से वे चमत्कृत थे।बस दिक्कत यह आई कि हमारी इस मेहनत की गंभीरता इसलिए नजरअंदाज की गई कि हम कोई फीस वगैरह नहीं ले रहे थे। वो कहते हैं ना मुफ्त में कोई अमृत भी बांटे तो लोग उस पर सहज विश्वास नहीं करते।मजबूरन नॉमिनल शुल्क तय करना पड़ा जबकि अनाथाश्रम के बच्चों के बीच निशुल्क सेवा और सारा स्टडी मटेरियल भी मुफ्त उपलब्ध कराते हैं।

वैशाली नगर से शुरुआत की, मॉउथ पब्लिसिटी का असर यह हुआ कि अन्य कॉलोनियों के लोग भी संपर्क कर रहे हैं।हमारा अनुरोध यही रहता है कि कम से कम 15 बच्चों का रजिस्ट्रेशन और हॉल आदि की व्यवस्था हो जाए तो हम आ जाएंगे।जब शुल्क निर्धारित नहीं था तब से अधिक रिस्पांस अब यदि मिल रहा है तो हमें इसका यही कारण समझ आता है कि हर परिवार अपने बच्चे में रचनात्मक सोच देखना चाहता है। 


खेल खेल में आ जाता है बदलाव 


कहते तो हैं बचपन गीली लकड़ी की तरह होता है जैसा मोड़ दो वैसा मुड़ जाता है। प्रभावी व्यक्तित्व रचनात्मक सोच, पब्लिक स्पीकिंग, टीम बिल्डिंग, एकाग्रता और सामाजिक व्यवहार आदि से बनता है। दीक्षा शर्मा बताती है कम उम्र से ही बच्चों को इन गुणों की तरफ मोड़ दिया जाए तो वे पेरेंट्स के सपनों को हकीकत में बदलने की ऊर्जा से लबरेज हो जाते हैं। क्रिएटिव थिंकिंग विकसित करने के लिए सर्कल बनाना, स्क्वेअर, स्टार आदि के माध्यम से बच्चों में स्पर्धा पैदा करते हैं कि सर्कल, स्टार आदि से और क्या क्या बना सकते हो।बच्चों में छुपे सुपर पॉवर को बाहर लाने के लिए ड्राइंग सबसे अच्छा माध्यम रहता है। अब तक जहां जहां भी क्लास ली है पेरेंट्स का यही फीडबेक मिला है कि मोबाइल पर निर्भरता कम होने के साथ ही बच्चे अब अपनी रचनात्मक सोच का इस्तेमाल करने लगे हैं। 


दीक्षा-विभा का यह काम आपको भी अच्छा लगा होगा।उनसे इस क्लास के संबंध में अधिक जानकारी लेना हो या नेक काम के लिए बधाई देना चाहें तो आप 88899-12369 पर कॉल कर सकते हैं।

 

                                                                        

खेल खेल में 


विभा गांधी 


दीक्षा शर्मा 
 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


संपर्क : 8989789896