Monday, August 19, 2019
एक कमिश्नर जो दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में दस्तक देकर ले रहा है स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण की जानकारी

एक कमिश्नर जो दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में दस्तक देकर ले रहा है स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण की जानकारी

मीडियावाला.इन।

 भोपाल: मध्य प्रदेश में एक संभागीय कमिश्नर ऐसे हैं जो संभाग के दूरदराज  आदिवासी क्षेत्रों में जाकर, वहां रह रहे जरूरतमंद आदिवासियों से रूबरू बात कर, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण की जानकारी ले रहे हैं। ये कमिश्नर हैं रीवा संभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ अशोक कुमार भार्गव ।
डॉ भार्गव के आदिवासियों के घर पर दस्तक देने से उन्हें  सरकार की  योजनाओं की जमीनी हकीकत का पता चल रहा है और इसका सीधा लाभ आदिवासी परिवारों को मिल रहा है।

 

 डॉ.भार्गव ने हाल ही में रीवा विकासखंड के ग्राम रौसर में पहुंचकर संभाग में दस्तक अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने आदिवासी बस्ती रौसर में स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग के अमले के साथ प्रतीक स्वरूप कुछ घरों में स्वास्थ्य एवं पोषण की दस्तक देकर बच्चों की जानकारी ली। उन्होंने स्वयं घर का दरवाजा खटखटाकर अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य के विषय में चर्चा की और उनकी अपने समक्ष जांच भी कराई। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन के निर्देशन में 10 जून से 20 जुलाई तक संभाग में दस्तक अभियान चलाया जा रहा है , जिसमें शून्य से 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक उपचार एवं दवायें प्रदान की जायेंगी। 
डॉ भार्गव ने आदिवासी बस्ती रौसर में राजू कोल के घर दरवाजा खटखटाया तो अपने बच्चों के साथ राजू कोल की पत्नी अंजू कोल बाहर आईं।  अधिकारियों-कर्मचारियों ने उनके घर आने का मकसद समझाया। डॉ भार्गव ने कहा कि राज्य शासन की मंशा है प्रदेश में बच्चे स्वस्थ्य रहें, इसके लिए दस्तक अभियान की शुरूआत की गई है। अभियान के तहत स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारियों द्वारा घर-घर दस्तक दी जायेगी। अगर बच्चे अस्वस्थ एवं कुपोषित होंगे तो आवश्यक उपचार और समझाइश भी दी जायेगी। बच्चों की जांच के माध्यम से उनकी बीमारियों का पता लगाया जायेगा। उन्होंने अपने समक्ष अंजू और राजू कोल के जुड़वा बच्चों विराट और सम्राट के हीमोग्लोबिन की जांच कराई। जांच से पता चला कि बच्चे स्वस्थ हैं। इसी तरह उन्होंने अन्य घरों में भी दस्तक दी और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी ली।

 

डॉ. भार्गव ने लोगों से स्वयं ही सवाल किया कि आपको मालूम है कि हम यहां क्यों आये हैं। उन्होंने लोगों को सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की और कहा कि इसी तरह दस्तक दल आयेगा जिसकी आप लोग मदद करें। गांव में कोई भी बच्चा दस्तक अभियान के तहत दर्ज होने से नहीं छूटे। उन्होंने  गांव की आंगनवाड़ी में पहुंचकर बच्चों को प्यार से दुलारते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई, नाश्ता, भोजन एवं खेलों की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को साफ-सफाई का महत्व समझाया और अपने समक्ष बच्चों को हाथ धुलाई का तरीका समझाया। उन्होंने बच्चों को फल एवं टाफियां भी वितरित की।  आदिवासी बस्ती में भ्रमण के दौरान लोगों को बच्चों का टीकाकरण, स्तनपान के महत्व की  जानकारी दी।

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