Tuesday, August 20, 2019
12 साल में 19 तबादले वाले उप सचिव की पीड़ा: ईमानदार अधिकारी सबसे ज्यादा कष्ट झेलता है -बच्चों को दी सख्त हिदायत, अफसर न बनें

12 साल में 19 तबादले वाले उप सचिव की पीड़ा: ईमानदार अधिकारी सबसे ज्यादा कष्ट झेलता है -बच्चों को दी सख्त हिदायत, अफसर न बनें

मीडियावाला.इन।

भोपाल।  मप्र राज्य प्रशासनिक सेवा के 1999 बैच के अधिकारी नियाज खान ने एक बार फिर कह दिया है कि उन्होंने कानून की किताब के अनुसार अपनी लाईन तय कर दी है, वे इससे एक इंच भी इधर उधर नहीं होंगे बेशक सरकार उन्हें कितना भी प्रताडि़त करे। पिछले 12 साल में 10 जिलों में 19 तबादले झेलने वाले मप्र परिवहन विभाग के उप सचिव नियाज खान ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि यह देश का दुर्भाग्य है कि ईमानदार अधिकारी को ही सबसे ज्यादा कष्ट झेलने पड़ते हैं। दूसरी ओर भ्रष्ट और बेईमानों उप पद और प्रतिष्ठा आसानी से मिलती है। अपने मन की पीड़ा व्यक्त करने के लिए इस अधिकारी ने कलम उठा ली है और अब इनका छठवां उपन्यास ''अंधेरी रातों के प्रेमी की दास्तानÓÓ आने वाला है। अपने उपन्यासों के जरिए नियाज खान पिछले 20 साल की अपनी नौकरी के अनुभवों को सलीके से साझा करते हैं। 
नियाज खान साफ तौर पर कहते हैं कि सरकार में बैठे हुए लोगों को कानून के पालन कराने की नहीं अपने हितों की रक्षा की चिंता रहती है। इसी कारण भ्रष्ट लोगों का बोलबाला है। पिछले 20 साल से ईमानदारी से नौकरी करने की सजा उन्हें ट्रांसफर और प्रताडऩा से मिलती रही है। उनका कहना है कि बाहर से अफसरशाही सम्मानजनक शब्द लग सकता है, लेकिन अंदर आकर देखिए इसमें कितनी गंदगी भरी हुई है। इस गंदगी को महसूस करके ही मैंने अपने बच्चों को अधिकारी न बनने की हिदायत दे दी है। उन्होंने कहा कि यह देश और प्रजातंत्र का दुर्भाग्य है कि भ्रष्ट अफसरों का सम्मान किया जाता है और ईमानदार अधिकारियों का तिरस्कार। खान का कहना है कि उन्होंने अपने मन से कानून के अनुसार लाईन खींच ली है और वे इस जीवन में एक इंच भी इस लाईन से हटने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि बेईमानी और भ्रष्टाचार अब हमारी सोच बन चुका है और शायद अगले एक हजार साल में भी हम इस सोच को नहीं बदल पाएंगे। 


इसलिए बने लेखक

नियाज खान का कहना है कि  पिछले 20 साल से मैं इस सिस्टम में अपना सिर फोड़ रहा हूं। ऐसा महसूस करता हूं कि मैं कहीं खो न जाऊं इसलिए अपने दर्द को साझा करने और अपने व्यक्तित्व को स्थापित करने मैंने कलम उठाई है। कलम के जरिए मैं अपने खट्टे अनुभवों को लोगों तक पहुंचाता हूं। उनके उपन्यासों का भी बिना पढ़े लोग विरोध करते हैं जो पढ़़ते हैं वे ही मेरा दर्द समझ पाते हैं। 

प्रमुख सचिव की शिकायत करनेेेे पर आए थे चर्चा में


नियाज खान उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपने तत्कालीन प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल की लिखित शिकायत प्रमुख सचिव को करते हुए आरोप लगाया था कि प्रमुख सचिव ने उनसे बदतमीजी की है। इस शिकायत के बाद उनका विभाग बदला गया था।

वरिष्ठ पत्रकार और अग्निबाण भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन की खास खबर

0 comments      

Add Comment